जुझारसिंह नेहरा

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
भारत के राजस्थान प्रान्त में झुन्झुनू नगर के संस्थापक जुझारसिंह नेहरा की मूर्ती

नेहरा (1664 – 1730) राजस्थान के बड़े मशहूर योद्धा हुए हैं, उन्हीं के नाम से झुंझुनू जैसा नगर प्रसिद्द है।

इतिहास[संपादित करें]

जुझारसिंह नेहरा का जन्म संवत १७२१ विक्रमी श्रावण महीने में हुआ था। उनके पिता नवाब के यहाँ फौज के सरदार यानि फौजदार थे। युवा होने पर सरदार जुझार सिंह नवाब की सेना में जनरल बन गए।

उन्हीं दिनों सरदार जुझार सिंह की मुलाकात एक राजपूत से हुई। वह किसी रिश्ते के जरिये नवाब के यहाँ नौकर हो गया। उसका नाम शार्दुल सिंह था। दोनों का सौदा तय हो गया। शार्दुल सिंह ने वचन दिया कि इधर से नवाबशाही के नष्ट करने पर हम तुम्हें (सरदार जुझार सिंह को) अपना सरदार मान लेंगे. अवसर पाकर सरदार जुझार सिंह ने झुंझुनू और नरहड़ के नवाबों को परास्त कर दिया और बाकि मुसलमानों को भगा दिया।

कुंवर पन्ने सिंह द्वारा लिखित 'रणकेसरी जुझार सिंह' नमक पुस्तक में अंकित है कि सरदार जुझार सिंह को दरबार करके सरदार बनाया गया। सरदार जुझार सिंह का तिलक करने के बाद एकांत में पाकर विश्वास घात कर शेखावतों ने सरदार जुझार सिंह को धोखे से मार डाला। इस घृणित कृत्य का समाचार ज्यों ही नगर में फैला हाहाकार मच गया। जाट सेनाएं बिगड़ गयी। फिर भी कुछ लोग विपक्षियों द्वारा मिला लिए गए। कहा जाता है कि उस समय चारण ने शार्दुल सिंह के पास आकर कहा था -

सादे लीन्हो झूंझणूं, लीनो अमर पटै
बेटे पोते पड़ौते, पीढी सात लटै

अर्थात - सादुल्लेखान से इस राज्य को झून्झा (जुझार सिंह) ने लिया था, वह तो अमर हो गया। अब इसमें तेरे वंशज सात पीढी तक राज करेंगे।

जुझार अपनी जाती के लिए शहीद हो गया। वह संसार में नहीं रहे, किन्तु उनकी कीर्ति आज तक गाई जाती है। झुंझुनू शहर का नाम जुझार सिंह के नाम पर झुन्झुनू पड़ा है।

शेखावतों का जाटों के साथ समझोता[संपादित करें]

शेखावतों ने जाट के विद्रोह को दबाने के लिए तथा उन्हें प्रसन्न रखने के लिए निम्नलिखित आज्ञायेँ जारी की गयी -

  1. लगान की रकम उस गाँव के जाट मुखिया की राय से ली जाया करेगी।
  2. जमीन की पैमयश गाँव के लम्बरदार किया करेंगे।
  3. गोचर भूमि के ऊपर कोई कर नहीं होगा।
  4. जितनी भूमि पर चारे के लिए गुवार बोई जावेगी उस पर कोई कर नहीं होगा।
  5. गाँव में चोरी की हुई खोज का खर्चा तथा राज के अधिकारियों के गाँव में आने पर उन पर किया गया खर्च गाँव के लगान में से काट दिया जावेगा. जो नजर राज के ठाकुरों को दी जायेगी वह लगान में वाजिब होगी।
  6. जो जमीन गाँव के बच्चों को पढ़ाने वाले ब्राहमणों को दो जायेगी उसका कोई लगान नहीं होगा। जमीन दान करने का हक़ गाँव के मुखिया को होगा।
  7. किसी कारण से कोई लड़की अपने मायके (पीहर) में रहेगी तो उस जमीन पर कोई लगान न होगा, जिसे लड़की अपने लिए जोतेगी.
  8. गाँव का मुखिया किसी काम से बुलाया जायेगा तो उसका खर्च राज देगा।
  9. गाँव के मुखिया को जोतने के लिए जमीन मुफ्त दी जायेगी. सारे गाँव का जो लगान होगा उसका दसवां भाग दिया जायेगा.
  10. मुखिया वही माना जायेगा जिसे गाँव के लोग चाहेंगे. यदि सरदार गाँव में पधारेंगे तो उन के खान=पान व स्वागत का कुल खर्च लगान में से काट दिया जायेगा.
  11. गाँव के टहलकर (कमीण) लोगों को जमीन मुफ्त दी जायेगी.
  12. जितनी भूमि पर आबादी होगी, उसका कोई लगान न होगा।
  13. इस खानदान में पैदा होने वाले सभी उत्तराधिकारी इन नियमों का पालन करेंगे।
  14. किसी भी निर्णय में मुखिया और गाँव का ठाकुर की बात को सर्वोपरि माना जायेगा !

कुछ दिनों तक इनमें से कुछ नियम आंशिक रूप से अनेक ठिकानों द्वारा ज्यों-के-त्यों अथवा कुछ हेर-फेर के साथ मने जाते रहे। कुछ ने एक प्रकार से कटाई इन नियमों को मेट दिया।

झुंझुनू का मुसलमान सरदार जिसे कि सरदार जुझार सिंह ने परास्त किया था, सादुल्ला नाम से मशहूर था। झुंझुनू किस समय सादुल्लाखान से जुझार सिंह ने छीना इस बात का वर्णन निम्न काव्य में मिलता है।

सत्रह सौ सत्यासी, आगण मास उदार
सादे लीन्हो झूंझणूं, सुदी आठें शनिवार

अर्थात - संवत १७८७ में अघन मास के सुदी पक्ष में शनिवार के दिन झुंझुनू को सादुल्लाखान से जुझार सिंह ने छीना.

समझोते का पालन नहीं[संपादित करें]

सरदार जुझार सिंह के बाद ज्यों-ज्यों समय बीतता गया उनकी जाट जाति के लोग पराधीन होते गए। यहाँ तक कि वह अपनी नागरिक स्वाधीनता को भी खो बैठे. एक दिन जो राजा और सरदार थे उनको भी बादमें पक्के मकान बनाने के लिए जमीन खरीदनी पड़ती थी। उन पर बाईजी का लाग लगा और भेंट, न्यौता-कांसा अदि अनेक तरह की बेहूदी लाग और लगा दी गई।

सन्दर्भ[संपादित करें]

नोट - यह वृतांत ठाकुर देशराज द्वारा लिखित जाट इतिहास, महाराजा सूरज मल स्मारक शिक्षा संसथान, दिल्ली, १९९२ पेज ६१४-६१७ पर अंकित है।