जावेद शाह खजराना

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जावेद शाह खजराना एक प्रसिद्ध लेखक , कवि , इतिहासकार , पत्रकार , फ़ोटोग्राफ़र है ।

निमाड़ के प्रसिद्ध सूफीसंत हजरत अब्दुल्लाह शाह बियाबानी रह0 के खादिमें खास , मुजावर और दरवेश हजरत नसीरुद्दीन शाह चिश्ती देहलवी रह0 के वंशज है।इंदौर शहर कांग्रेस कमेटी में सचिव के पद पर नियुक्त है।

जावेद शाह खजराना[संपादित करें]

एक प्रसिद्ध लेखक ,कवि , कहानीकार ,फोटोग्राफर ,इतिहासकार और सूफी अब्दुल्लाह शाह बियाबानी के खादिम खास मुजावर और वारिसों के वंशज है। जावेद शाह खजराना वर्तमान में मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में निवास करते है।
 जावेद शाह खजराना का जन्म जूनी इंदौर में 5 सितम्बर सन 1978 में हुआ। इन्हें दो बार कविता पर राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला है। इंदौर स्थित खजराना में सूफी संत नाहरशाह वली रह0 के खादिम और मुजावरों के नातिन है। इब्राहिम लोधी के जमाने में इनके पूर्वज नसीरुद्दीन शाह चिश्ती रह0 अपने साथी मशहूर सूफी अब्दुल्लाह शाह बियाबानी के साथ इस्लाम फैलाने के दिल्ली से मांडव पहुंचे। मांडव के सुल्तान गयासुद्दीन खिलजी ने आपका शानदार स्वागत कुँए और इनके आग्रह करने पर मांडव के नजदीक छितरी गांव की जागीर आपको दे दी।

हजरत अब्दुल्लाह शाह बियाबानी ने छितरी गांव में रहकर इस्लाम धर्म का प्रचार-प्रसार किया ।

आपके समय निमाड़ में इस्लाम तेजी से फैला। आपकी मृत्यु के बाद आपको छितरी गांव में दफनाया गया वहां पर आज एक स्मारक के रूप में आपकी दरगाह है।

अब्दुल्लाह शाह बियाबानी के बाद उनकी दरगाह और जागीर की देखरेख उनके साथी हजरत नसीरुद्दीन शाह चिश्ती रह0 के अधिकार में आ गई।

आप अब्दुल्लाह शाह बियाबानी के साथी और पहले खादिमें खास है। हजरत नसीरुद्दीन चिश्ती की दरगाह की हजरत अब्दुल्लाह शाह बियाबानी के कदमों की जानिब सहन में बनी हुई है।

ये सन 1500 ईसवी की बात है।
जावेद शाह खजराना इन्हीं नसिरुद्दीन शाह चिश्ती की 25 वी पीढ़ी में से है। इनके पिताजी का ननिहाल धार और कालीबावड़ी में रहा है। इनके पिताजी महमूद अली की माताजी फ़ातेमा के पिताजी अकबर अली शाह 1955 में इस दरगाह के मैनेजर थे।