जादुई क़ालीन
| जादुई क़ालीन | |
|---|---|
| मध्य पूर्वी साहित्य तत्व | |
| शैली | काल्पनिक |
| काल्पनिक विवरण | |
| प्रकार | जादुई क़ालीन (मायावी वस्त्र) |
| कार्य | परिवहन साधन |
| विशेषताएँ एवं क्षमताएँ | उड़ान में सक्षम अथवा तत्काल स्थानांतरण |
जादुई क़ालीन, जिसे उड़नेवाला क़ालीन भी कहा जाता है, एक पौराणिक क़ालीन है जो कल्पनालोक साहित्य में एक सामान्य उपमा के रूप में प्रयुक्त होता है। यह प्रायः एक परिवहन साधन के रूप में प्रयुक्त होता है, जो अपने उपयोगकर्ता/उपयोगकर्ताओं को शीघ्रता से अथवा तत्काल उनके गन्तव्य तक पहुँचा सकता है।
साहित्य में
[संपादित करें]"अलिफ़ लैला" की एक कथा में वर्णित है कि हिन्दुस्तान के सुलतान के ज्येष्ठ पुत्र राजकुमार हुसैन, भारत के विजयनगर की यात्रा करते हैं और वहाँ एक जादुई क़ालीन क्रय करते हैं।[1] उस क़ालीन का वर्णन इस प्रकार किया गया है— "जो कोई इस क़ालीन पर बैठे और मन में किसी अन्य स्थान पर पहुँचने की इच्छा करे, वह एक क्षण में वहाँ पहुँच जाएगा, चाहे वह स्थान समीप हो या अनेक दिन की कठिन यात्रा दूर।"[2]
विविध संस्कृतियों की साहित्यिक परंपराओं में भी जादुई क़ालीनों का उल्लेख मिलता है, जिनमें अधिकांशतः वे वास्तव में उड़ते हैं, न कि केवल तत्काल स्थानांतरित करते हैं।