ज़िन्दगी कि कहानी

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परिचय[संपादित करें]

अंगूठाकार अंगूठाकार अंगूठाकार जिसको देखो लड़ने झगड़ने मे लगा हुआ है। ये मेरा है वो मेरा है सब हसिल करने मे लगा है। रिश्तो को पिछे छोड़ के पैसे कमने मे जुट गई है ये दुनिया। यु जो आगे बड़ गई है, एक बार मुड़के देख्नना भी नही चाह्ती कि पिछे क्या चोड़ आये है ओर उसकी हमारी जिंदगी मे क्या एह्मियत थी। रिश्ते कभी खतम नही होते है, ये तो इन्सान है जो भूल जाता है ओर अपनो को छोड़ देता है गुस्से ओर एहेन्कार मे आके। आखिर सोचना चाहिए ना कि क्या कर रहे हो ओर क्यु कर रहे हो। इस भाग-दोर भरी ज़िन्दगी मे समये हि नही है हुमरे पास अपने आपको समझने के लिये। समये हि नही है उन रिश्तो के धागो को सनझोग के रखने का जो खुदा कि रेह्मत से मिले है। इन्सान कि फितरत बन् गयी है उन् चिजो कि कादर न करना जो उसके पस पेहले से है। जो हसिल है उस्को छोदके उन चेजो के पिछे पधे है जो मिल नही सक्रती। ऐसा लगता है मानो ज़िन्दगी कि भग्दोर मे इन्सनियत कही मर चुकी है, यहा तक कि प्यार भी एक फोर्मलिटी बनके रेह गया है। वो प्यार जो पेहले हुआ करता था, वो इज़हार जो पेहले हुआ करता था अब प्यार का रिश्ता वैसा नही रहा है एक्दम बदल गया है। पल भर मे लोग यु साथ छोर कर चले जाते है मानो कभी कोई नाता उन्से था हि नही। इतना तो ज़रुर मालुम हो गया है कि कोई अपना नही है यहा ओर ना हि कोई किसी के लिये जीता है यहा। पा कर भी ना पाना हि मोहोबत बन चुका है यहा क्युकि एस ज़मने मे मोहोबत हसिल करना बहुत हि कथिन हो चुका है। लोगो के एह्सास ओर उनका विशवास कही गुम सा गया है। ना जाने ये बदल्ति हवा लोगो को किस ओर उड़ा ले जाएगी, शयद एक ऐसी जगह जहा आशा कि कोई किरन ही नही बची है, शयद वहा जहा से इन्सान नही सिर्फ ज़िन्दा लाशे लौट के आती है। नजाने क्यु पत्थर दिल हो जाते है लोग क्या उन्हे मोह नही है उन चान्द सितारो से, उन खिल्ते गुलाबो से जो हर किसी के आनगन को खुश्बु से मेहेका देते है। क्यु ऐसा लगता है कि इन्सान अब इन्सान नै बल्कि हैवान बन चुका है । दौलत, शोहरत, ओर इज़्ज़त के पिछे पागल हो चुका है, उसके लिये अब प्यार, एह्सस ओर जज़्बात कुछ माइने नहि रख्ते अब। क्यु लोग कतराते है उन्न लोगो को समये देने के लिये जो सिर्फ उन्के लिये जीते है ओर सिर्फ उन्कि राह तक्ते है। ओर फिर उन लोगो के ज़िन्दगी से चले जने के बाद अफ्सोस करते कि कश केह दिया होता उस पल मे जो आज वो सुनने को मोजुद नही है। अफ्सोस बहुत हि दुख देता है फिर भि ये हुमरी फितरत बन चुका है।

शायरी[संपादित करें]

अजीब है ना, न उन्होने कुछ सुना न हुमने कुछ कहा, न वो समझ पाये न हम जाता पाये॥॥

अजीब है ना, उन्को पाता ही नही कि नाराज़ है हम उन्से ओर मान भी गये उन्के बिना मनाये॥

अजीब है ना, जितना समझना चाहा अपने- आपको उतना ही अपने से दुर पाया॥॥

अजीब है ना, जितना दुर सोचा उसको उतने ही उस्से अपने करीब पाया ॥

अजीब है ना, उन्से मोहोबत भी है ओर नफरत् भी , ना वो आते है पुरे ना जाते है पुरे॥॥

अजीब है ना, अपने भी वो ही है ओर पराये भी वो ही॥

अजीब है ना॥॥

संदर्भ[संपादित करें]

तस्वीर का उपयोग किया[1]

लिंक[संपादित करें]

प्यार

दुनिया

  1. "तस्वीर".