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ज़ाज़ा भाषा

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ईरानी भाषाओं के समूह में ज़ाज़ा भाषा की स्थिति।

ज़ाज़ा एक ईरानी भाषा है जो पश्चिमोत्तर ईरानी शाखा से संबंधित है। यह मुख्य रूप से तुर्की के पूर्वी अनातोलिया क्षेत्र में ज़ाज़ा लोगों द्वारा बोली जाती है। 2019 के आंकड़ों के अनुसार, इस भाषा के बोलने वालों की संख्या लगभग 14,80,000 है।[1]

भाषाई वर्गीकरण के अनुसार, ज़ाज़ा भाषा को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है: 'उत्तरी ज़ाज़ा' और 'दक्षिणी ज़ाज़ा'। यूनेस्को के अनुसार यह भाषा 'खतरे में' (Vulnerable) की श्रेणी में आती है।[2]

भाषा का वर्गीकरण

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ज़ाज़ा भाषा अपनी संरचना, मूल शब्दावली और ऐतिहासिक विकास के मामले में ताती, तलीश, संगासरी, सेमनानी, मज़ंदरानी और गिलाकी भाषाओं के साथ घनिष्ठ संबंध प्रदर्शित करती है। अनेक भाषाविदों का मानना है कि ज़ाज़ा भाषा का व्याकरणिक ढांचा प्राचीन पार्थियन और बैक्ट्रियन भाषाओं के साथ काफी समानता रखता है, जो प्राचीन काल में विलुप्त हो चुकी थीं।[3]

भौगोलिक वितरण

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ज़ाज़ा भाषा मुख्य रूप से तुर्की के निम्नलिखित प्रांतों में बोली जाती है:

  • पूर्वी अनातोलिया: बिंगोल, इलाज़िग, एरज़िनकन, एरज़ुरम, मालट्या, मुश, बितलिस और तुनसेली।
  • दक्षिण-पूर्वी अनातोलिया: अदियामान, दियारबाकिर और सानलिउर्फा।
  • मध्य अनातोलिया और काला सागर क्षेत्र: सिवास, कायसेरी, अक्सराय, टोकाट और गुमुशाने।

इसके अलावा, यूरोप (मुख्य रूप से जर्मनी) में भी ज़ाज़ा प्रवासी समुदाय इस भाषा का उपयोग करते हैं।

मैक्रो-भाषा के रूप में मान्यता

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अंतरराष्ट्रीय भाषाई प्राधिकरणों द्वारा ज़ाज़ा को एक 'मैक्रो-भाषा' के रूप में मान्यता दी गई है। इंटरनेशनल और एथ्नोलॉग के अनुसार, इसके अंतर्गत दो स्वतंत्र भाषाएं आती हैं: 1. दक्षिणी ज़ाज़ा 2. उत्तरी ज़ाज़ा

इन दोनों किस्मों के बीच भाषाई भिन्नताएँ स्पष्ट हैं, जो इसे एक विस्तृत भाषाई विविधता वाला समूह बनाती हैं।

वर्तमान स्थिति

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अधिकांश ज़ाज़ा बोलने वाले लोग द्विभाषी हैं और तुर्की भाषा का भी प्रयोग करते हैं। शिक्षा, मीडिया और दैनिक कामकाज में तुर्की भाषा के बढ़ते प्रभाव के कारण ज़ाज़ा बोलने वालों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है, जिस कारण इसे एक लुप्तप्राय भाषा माना जाता है। हालाँकि, ज़ाज़ा समुदाय अपनी भाषाई पहचान को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न सांस्कृतिक प्रयासों में लगा हुआ है।

इन्हें भी देखें

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सन्दर्भ

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