जहाज महल की कहानी

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इंदौर से 100 किलोमीटर दूर धार के पास एतीहासिक नगरी मांडव है । मांडव की सबसे मशहूर इमारत जहाज महल है जिसका निर्माण खिलजी वंश के सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी ने 1470 के आसपास करवाया। इसे जनानखाना भी कहते है क्योंकि ग्यासुदीन ने अपने इस महल में अनगिनत रानियों को रखा। कहते है उन रानियों की संख्या हजारों में थी। मांडव की ये इमारत जहाज महल कहलाती है। इसके पूर्व में मुंज तालाब है (राजा भोज के काका मुंज) , इसके आगे कपूर तालाब है। दोनो तालाब के अलावा इसके उत्तर में एक पोखर है उसमें भी पानी भरा हुआ रहता है । छत पर बीचो-बीच खड़े होकर देखने पर ऐसा लगता है जैसे पानी के बीच मे कोई जहाज खड़ा हो , इस वजह से इस इमारत को जहाज महल कहते है।हिंदुस्तान में दुसरा जहाज महल दिल्ली में है। मांडू के जहाज महल की तामीर मांडव के दूसरे खिलजी सुल्तान ग्यासुद्दीन खिलजी ने की थी । इनकी करीब 15000 रानियां जहाज महल में रहती थी। सारा मांडव औरतों से भरा हुआ था सभी जगह औरतें तैनात थी। चाहे अस्पताल हो या मुसाफिरखाना या फिर सुल्तान की सुरक्षा गार्ड सभी जगह महिला कर्मचारी तैनात थी। महिलाओं के आशिक़ इस बादशाह के जमाने में मांडव का नाम आनंद नगरी यानी शादियाबाद पड़ गया। अमिताभ बच्चन जी ने इस एपिसोड में बताया कि ग्यासुद्दीन खिलजी ने खिलजी वंश की स्थापना की । ये गलत जानकारी है । मांडव में खिलजी वंश की स्थापना ग्यासुद्दीन के वालिद सुल्तान महमूद शाह खिलजी ने 1535 में की । महमूद शाह की मजार धार स्थित मौलाना कमाल की दरगाह के सामने है । इन दोनों बाप -बेटों का हिन्दुतान के वलियों की मजारें बनवाने में काफी योगदान है जैसे ख्वाजा की गुम्बद और मौलाना कमाल की मजार। ग्यासुद्दीन खिलजी ने मेरे पूर्वज हजरत अब्दुल्लाह शाह बियाबानी और मेरे की इल्तिज़ा की। लेकिन अल्लाह के वलियों ने महल के शोर शराबे की जगह जंगल चुना । सुल्तान ने मेरे दादा को मांडव के नीचे छितरी गांव में जमीन दी। जिसे आज बियाबानी या कालीबावड़ी कहा जाता है। यहां मेरे पूर्वजों की मजारें है। ग्यासुद्दीन खिलजी से लेकर अंग्रेजों के बाद आज भी भारत सरकार आने के बाद भी दरगाह मेरे खानदान वालों की मिल्कियत में शुमार है। मेरी दादी के भाई अमीर अली वर्तमान मुजावर और मालिक है।

संदर्भ मांडव दिग्दर्शिका में ये घटना उल्लेखित है[संपादित करें]