जय इन्द्रवर्मन तृतीय
| जय इन्द्रवर्मन तृतीय | |||||||||
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| राजा-धीराज | |||||||||
| चम्पा के राजा | |||||||||
| शासनावधि | 1139–1145 | ||||||||
| राज्याभिषेक | 1139 | ||||||||
| पूर्ववर्ती | हरिवर्मन पंचम | ||||||||
| उत्तरवर्ती | रुद्रवर्मन चतुर्थ | ||||||||
| जन्म | 1106 चम्पा | ||||||||
| निधन | 1145? विजय (चम्पा), चम्पा | ||||||||
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| पिता | हरिवर्मन पंचम (दतक) | ||||||||
| माता | ? | ||||||||
| धर्म | हिन्दू धर्म | ||||||||
जय इन्द्रवर्मन तृतीय (ल॰ 1106–1145, शासनकाल 1139–1145) 12वीं सदी के मध्य में चम्पा के राजा थे।
हरिवर्मन पंचम ऐसे राजा थे जिनके कोई उत्तराधिकारी नहीं था अतः उन्होंने सन् 1129 में पद त्याग दिया। उनके दत्तक पुत्र जय इन्द्रवर्मन तृतीय को सन् 1133 में चम्पा का राजकुमार मनोनीत किया। सन् 1131 में अंगकोर शासक सूर्यवर्मन द्वितीय ने उन्हें दाई वियत पर आक्रमण करने के लिए मना लिया तथा सन् 1132 में तीन प्रांतों पर कब्जा कर लिया। सन् 1139 में वो चम्पा के राजा बने। उनके कार्यकाल की अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है लेकिन उन्होंने बिन दीन्ह में थाम माम शैली में विस्तार किया।[1]
चूंकि इन्द्रवर्मन ने दाई वियत के साथ शांति समझौते किये तथा दाई वियत के खिलाफ ख्मेर साम्राज्य के अर्थहीन अभियानों में शामिल होने से मना कर दिया अतः ख्मेर राज्य ने चम्पा पर आक्रमण करने का विकल्प चुना। सन् 1145 में सूर्यवर्मन द्वितीय ने चम्पा पर आक्रमण कर दिया जो उनके पिछले विनाशकारी अभियानों के विपरीत सफल रहा। ख्मेर सेना ने चाम राजधानी विजय पर कब्जा कर लिया और वहाँ लूटपाट के साथ मंदिरों को भी तोड़ दिया। ख्मेर राज्य ने चाम राजा को पदच्युत भी कर दिया।[2][3]
युद्ध की अराजकता के बीच इन्द्रवर्मन गायब हो गये, मासपेरो के अनुमान के अनुसार या तो उन्हें ख्मेर ने पकड़ लिया या फिर वो मारे गये।[4]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Coedès 1975, p. 164.
- ↑ Maspero 2002, pp. 75–76.
- ↑ Coedès 1975, p. 160.
- ↑ Lafont 2007, p. 161.
स्रोत
[संपादित करें]- Coedès, George (1975), वेल्ला, वाल्टर एफ॰ (ed.), The Indianized States of Southeast Asia, यूनिवर्सिटी ऑफ़ हवाई प्रेस, ISBN 978-0-824-80368-1
- Lafont, Pierre-Bernard (2007), Le Campā: Géographie, population, histoire, इंडेस सवांटिस, ISBN 978-2-84654-162-6
- Maspero, Georges (2002), The Champa Kingdom, व्हाइट लोटस कोर्पोरेशन लिमिटेड, ISBN 978-97475-3-499-3
| पूर्वाधिकारी हरिवर्मन पंचम 1113–1129 |
चम्पा के राजा 1139–1145 |
उत्तराधिकारी कोई नहीं (खमेर का कब्जा) |
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