जनार्दन गोस्वामी

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जनार्दन गोस्वामी संस्कृत में कई ग्रंथों के लेखक और महापुरा की आमेर महाराजा बिशनसिंह द्वारा प्रदत्त जागीर के निवासी शिवानन्द गोस्वामी के अनुज और तैलंग ब्राह्मणों के आत्रेय गोत्र में १७ वीं सदी में जन्मे कृष्ण-यजुर्वेद के तैत्तरीय आपस्तम्ब में मूलपुरुष श्रीव्येंकटेश अनंम्मा के वंशज थे- जिनकी छठी पीढ़ी में जगन्निवासजी (प्रथम) के परिवार में जिनका जन्म शिवानन्द गोस्वामी के बाद हुआ।[1]

ग्रन्थ-रचना[संपादित करें]

कलानाथ शास्त्री एवं घनश्याम गोस्वामी ने १९७७ (और पंडित कंठमणि शास्त्री ने १९४७ में) तेलंगाना से आये विद्वान तैलंग ब्राह्मणों द्वारा समय-समय पर लिखे संस्कृत/ वृजभाषा ग्रंथों की सूची प्रकाशित की है, जिसमें जनार्दन गोस्वामी के लिखे निम्नांकित ग्रन्थ सूचीबद्ध हैं[2] इनमें से कुछ की पांडुलिपियाँ सिटी पैलेस स्थित भूतपूर्व जयपुर राजदरबार के विशाल पुस्तक-संग्रह {पोथीखाना} में हैं।

  • वैद्यरत्नभाषा
  • कविरत्न
  • काल-विवेक
  • हाथिकाशालहोत्र
  • व्यवहारनिर्णयः
  • मंत्रचंद्रिका
  • सारोद्धार
  • लालितार्चाकौमुदी
  • श्रृंगारशतकम
  • वैराग्यशतकम
  • महालक्ष्मीपूजा
  • कामप्रमोद:

सन्दर्भ[संपादित करें]

उत्तरदेशीय, दाक्षिणात्य तैलंग(गोस्वामी) महापुरास्थ आत्रेय कुल व तैलंग समाज की प्रथम मातृपक्ष को केन्द्र में रखकर संकलित,संपादित व प्रकाशित प्रथम ऐतिहासिक वंशावली "वंश-वल्लरी" का संकलन, संपादन - चेतन गोस्वामी। वि.सं.2073, प्रकाशन वर्ष-2017

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

[1]

  1. 'उत्तर भारतीय आन्ध्र- तैलंग- भट्ट- गोस्वामी-वंशवृक्ष : संपादक: बालकृष्ण राव: 2012
  2. संस्कृत-कल्पतरु' : संपादक कलानाथ शास्त्री एवं घनश्याम गोस्वामी : मंजुनाथ शोध संस्थान, सी-8, पृथ्वीराज रोड, सी-स्कीम, जयपुर-302001