छड़वा डैम हजारीबाग

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छड़वा डैम, हजारीबाग
Charwadam.jpg
छड़वा डैम, हजारीबाग
जन्म 1952-05-01
Charwa dam
स्मारक समाधि
24°1'21"N 85°18'36"E
आवास Jharkhand,hazaribagh
राष्ट्रीयता Indian
नागरिकता Indian
गृह स्थान Hazaribagh
अंतिम स्थान 24°1'21"N 85°18'36"E

छड़वा डैम हजारीबाग के प्रान्त में आता है यहाँ डैम हजारीबाग शहर से सिर्फ 7 किलोमीटर की दुरी पर है। इस डैम मे अपने भागती जिंदगी को दूर छोड़ कर बेहतरीन पिकनिक मानाने लोग दूर दूर से आते है। ...इस डैम का खास बात यहाँ भी के यहाँ ठंडी पड़ते ही दुसरे देशों के पंक्षी का आगमन होना शरू हो जाता है और इस डैम की खूबसूरती में चार चाँद लग जाता है इस दृश को देखें के लिए पर्यटन का आना शुरू हो जाता है छड़वा डैम में विंटर विजिटर बर्ड्स की बहुतायत देखी जाती है। छड़वा डैम में ये प्रवासी पक्षी बड़ी संख्या में कलरव करते देखे जा सकते हैं। सर्दियों में हर साल यह पक्षी आते हैं और शाम होते ही पास के जंगलों में चले जाते हैं, मंगोलिया से पक्षियों के आने की पुष्टि बहुत साल पहले हुई थी। जिसमें सबसे ज्यादा हेडेड गूज पंक्षियों की संख्या है। प्रवासी पक्षियों में सबसे ज्यादा हेडेड गूज देखे जा सकता हैं।


पर्यटन[संपादित करें]

छड़वा डैम 1952/१९५२ में बनाया गया था तब से अब तक यह पर्यटन केंद्र बना हुआ है यहाँ लोग अपने परिवार,दोस्तों के साथ पिकनिक मनाने और घूमने आते हैं यहाँ का मौसम बहुत ही रोमैंटिक रहता है इसी की वजह से लोग बिना कोई झिझक के घूमने आते हैं।

दुर्गा पूजा[संपादित करें]

इस डैम के संरक्षण के दोरान एक प्रतिमा मिला जो काली माता का था, प्रतिमा मिलते ही आस पास के इलाको के लोगो को पता चला और प्रतिमा को देखने के लिए बहुत ही संख्या में भीड़ जमा हो गया सब भक्ति मय में डूब गए। और डैम के किनारे ही माता का एक मंदिर का शिलान्यास कर दिए तब से लोगो का माँ के मंदिर में ताँता लगा रहता है और हर साल यहाँ दुर्गा पूजा में मेला भी लगता है जो बहुत ही शानदार तरीके से मनाया जाता है और भाईचार भी देखें को मिलता है

मुहर्रम[संपादित करें]

इस डैम के बारे में जितना भी बात करू कम होगा क्यों की यहाँ दुर्गा पूजा के साथ मुहर्रम का भी एक इतिहास रहा है इस छड्वा डैम के आसपास के गाँवो में रहने वाले मुस्लिम भाई मुहर्रम में डैम के खाली मैदान में एक जुट होकर अपने हुनर दिखाते है और जो जीतता है उसे उपहार भी दिया जाता है मुहर्रम में जो ताजिया बनया जाता है वो बहुत सारे गाँव के परम्परा के अनुसार हिन्दू भाई बनाते है और एक भाईचारा को भी देखने को मिलता है

स्थानीय बाज़ार[संपादित करें]

इस डैम के चर्चा में एक शनिवार बाज़ार भी है जो हर साप्ता के शनिवार के दिन लगाया जाता है यहाँ हरी सब्जी और घर की जरूरत की सम्मान लोग खरीदने आते है

पानी संरक्षण केंद[संपादित करें]

छड़वा डैम कोई बड़ी नदी से नहीं जुडी है बरसात की पानी जमा होती है और एक विशाल जल संग्रह बन कर उभरता है और यहाँ पानी पुरे 12 महीने आसपास के लोगो को पानी से मुक्त करता है

इतिहास[संपादित करें]

छड़वा डैम 5 जनवरी 1952 में बन कर तैयार हुआ और बरसात आने के बाद पानी का जमवा...इस डैम को बनने का मुख्य कारण यह था की आने वाले दिनों में पानी की समस्या जब आयत उससे बचने केलिए बनया गया था क्यों की जब भारत आजद हुआ था तब हमलोग के बस कोई टेक्नोलॉजी नहीं था कोई समस्या का समाधान करने वाला नहीं था कही आकाल तो कही महामारी होता था गाँव के गाँव मर कर खाख हो जाता था। ... कितने सालो तक बारिश नहीं होती थी

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]