चौथी सदी का ईसाई आंदोलन

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चौथी सदी का ईसाई आंदोलन[1] उन लोगों पर आधारित है जिन लोगों ने गंभीर पाप किए हैं, उन्होंने अपने पापों को बिशप या उसके प्रतिनिधि को कबूल किया था और उन्हें एक तपस्या सौंपी गई थी जो कि समय के साथ किया जाना था। अपनी तपस्या पूरी करने के बाद, उन्हें बिशप द्वारा समुदाय के बीच में दी गई अनुपस्थिति की प्रार्थना को वापस लेकर उन्हें पुनः समुदाय के बीच में प्रार्थना का अधिकार दिया गया। तपस्या ने कई रूपों को माना जो कि उनके द्वारा किया जाना था जैसे कि- जैसे पवित्र स्थलों की तीर्थयात्रा; चर्चों का निर्माण, मरम्मत और पुनर्निर्माण; और गरीब और बीमार की देखभाल आदि।

सन्दर्भ[संपादित करें]