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चेका

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ऑल-रशियन एक्स्ट्राऑर्डिनरी कमीशन
Всероссийская чрезвычайная комиссия (रूसी)
ऑल-रशियन एक्स्ट्राऑर्डिनरी कमीशन
संस्था अवलोकन
स्थापनादिसम्बर 20, 1917; 108 वर्ष पूर्व (1917-12-20)
भंगफ़रवरी 6, 1922; 103 वर्ष पूर्व (1922-02-06)
सुपर्सीड संस्थाजीपीयू
मुख्यालय*2 गोरोखोवाया स्ट्रीट, पेत्रोग्राद
संस्था कार्यपालकगणफ़ेलिक्स द्ज़ेरज़िन्स्की (1917–1918)
 
जेकब्स पीटर्स (1918)
 
फ़ेलिक्स द्ज़ेरज़िन्स्की (1918–1922)
मातृ संस्थाकाउंसिल ऑफ़ पीपल्स कमिसर्स

चेका, रूसी क्रांति के बाद बोल्शेविकों द्वारा स्थापित पहली सोवियत गुप्त पुलिस थी। यह एक संगठन था जिसकी स्थापना २० दिसंबर १९१७ को व्लादिमिर लेनिन के नेतृत्व वाली सोवियत रूस सरकार ने की थी। इसके पहले प्रमुख फेलिक्स द्ज़ेरज़िन्स्की थे। चेका का मुख्य उद्देश्य बोल्शेविक सत्ता की रक्षा करना था।

स्थापना और कार्य

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चेका को राज्य की सुरक्षा के लिए बनाया गया था। उसे बोल्शेविक शासन के सभी राजनीतिक विरोधियों का दमन करने के लिेए भी उपयोग में लाया जाने लगा। यह सीधे सुप्रीम सोवियत परिषद के निर्देश पर बिना मुकदमे के गिरफ्तारी, कैद, यातना, यहाँ तक कि मृत्यु दंड भी देने लगी थी। चेका ने श्रम शिविरों की गुलाग प्रणाली पर निगरानी रखी, खाद्यान्न ज़ब्ती की तथा किसानों और मज़दूरों के विद्रोह को भी दबाने का भी काम किया। चेका संगठन के पास लाल सेना की वफ़ादारी की निगरानी और देश की सीमाओं की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी थी। चेका ने व्लादिमीर लेनिन निर्देश पर सामूहिक गिरफ्तारियाँ कीं, लोगों को कारावास दिया, उन्हें यातनाएँ दीं और बिना किसी मुक़दमे के फाँसी देने का काम किया, जिसे "लाल आतंक" की संज्ञा दी गई।

आधिकारिक पदनाम आरएसएफएसआर के पीपुल्स कमिसर्स काउंसिल के तहत प्रति-क्रांति और तोड़फोड़ का मुकाबला करने वाला यह एक अखिल रूसी विशेष (या आपातकालीन) आयोग था। (रूसी में: Всероссийская чрезвычайная комиссия по борьбе с контрреволюцией и саботажем при Совете народных комиссаров РСФСР, Vserossiyskaya chrezvychaynaya komissiya po borbe s kontrrevolyutsiyey i sabotazhem pri Sovete narodnykh komisarov RSFSR)

वर्ष १९१८ में इसका नाम बदलकर ऑल-रशियन एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी कमीशन कर दिया गया जो प्रतिक्रांति, मुनाफ़ाखोरी और भ्रष्टाचार का मुकाबला करने के लिए बना था। वर्ष १९२१ में, गणराज्य की आंतरिक रक्षा के लिए कम-से-कम 2,00,000 था सैनिक नियुक्त थे। ये सैनिक गुलाग व्यवस्था चलाते थे, खाद्यान्न की माँग करते थे, राजनीतिक विरोधियों को गुप्त रूप से गिरफ्तार कर उन्हें नज़रबंद करते थे, उन्हें यातना देते थे और शीघ्र ही मृत्युदंड भी दे दिया करते थे। उन्होंने मज़दूरों[1], किसानों के विद्रोहों को भी दबाया।

1922 के बाद, चेका समूहों ने पुनर्गठन की एक शृंखला की शुरुआत की; हालाँकि सोवियत नागरिक विभिन्न निकायों के सदस्यों को चेकिस्त कहकर पुकारते रहे।

चेका पर बड़े पैमाने पर उन लोगों का नियंत्रण था जो संपन्न पृष्ठभूमि और विविध जातीय समूहों से आते थे। शीर्ष बीस चेकिस्त में से ग्यारह बुर्ज़ुआ या बुर्ज़ुआ-बुद्धिजीवियों से थे। एक धनी ज़मींदारों के परिवार से था। दो औद्योगिक सर्वहारा वर्ग के परिवारों से थे। केवल तीन चेकिस्त किसान थे। तीन की अज्ञात पृष्ठभूमि के थे। बीस में से छह जातीय रूप से रूसी थे। तीन पोलिश यहूदी थे। तीन चेकिस्त लातवियाई थे। दो जातीय रूप से पोलिश थे। एक यूक्रेनी था, एक अज़रबैजानी यहूदी था, एक जॉर्जियाई था, एक अर्मेनियाई था, एक रूसी यूनानी था तथा एक लिथुआनियाई यहूदी था।[2]

इन्हें भी देखें

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  1. ब्रोव्किन, व्लादिमीर (अक्टूबर 1990). "वर्कर्स' अनरेस्ट ऐंड द बोल्शेविक्स' रिस्पॉन्स इन 1919" [Workers' Unrest and the Bolsheviks' Response in 1919.]. Slavic Review (अंग्रेज़ी भाषा में). 49 (3): 350–373. डीओआई:10.2307/2499983. आईएसएसएन 0037-6779. अभिगमन तिथि: 15 अक्टूबर 2025.{{cite journal}}: CS1 maint: url-status (link)
  2. लैगेट्ट, जॉर्ज. द चेका : लेनिन्'स पॉलिटिकल पुलिस : द ऑल-रशियन एक्स्ट्राऑर्डिनरी कमीशन फ़ॉर कॉम्बेटिंग काउंटर-रिज़ॉल्यूशन ऐंड सबोटेज, दिसंबर 1917 टू फरवरी 1922 [The Cheka : Lenin's political police : the all-Russian extraordinary commission for combating counter-revolution and sabotage, December 1917 to February 1922] (अंग्रेज़ी भाषा में). ऑक्सफ़ोर्ड : क्लैरेंडन प्रेस ; न्यूयॉर्क : ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस. ISBN 978-0-19-822552-2. अभिगमन तिथि: 15 अक्टूबर 2025.{{cite book}}: CS1 maint: url-status (link)

बाहरी कड़ियाँ

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