चुललंगकरण
चुललंगकरण (20 सितम्बर 1853 – 23 अक्टूबर 1910) चक्री राजवंश के श्याम के राजा थे। उन्हें राम पंचम कहा जाता है और मरणोपरांत उन्हें राजा चुललंगकरण महान (King Chulalongkorn the Great) की उपाधि दी गयी। चुललंगकरण का शासनकाल सन् 1868 से आरम्भ हुआ और सन् 1910 में उनके निधन तक जारी रहा। उन्हें श्याम के आधुनिकीकरण, सरकारी और सामाजिक सुधारों तथा ब्रिटिश व फ़्रांसीसी रियासतों के विलय के लिए जाना जाता है। चूँकि श्याम चारों तरफ से यूरोपीय उपनिवेशों से घिरा हुआ था अतः चुललंगकरण को उनकी नीतियों एवं कार्यों के लिए भी जाना जाता है जिससे श्याम की स्वतंत्रता सुनिश्चित रही। उन्होंने अपने राज्य के दौरन रेलवे का भी विकास किया।[1]
चुललंगकरण श्याम के चौथे राजा मोंग्कुट के पुत्र थे। सन् 1868 में वो अपने पिता के साथ 18 अगस्त 1868 को प्रचुअप खीरी खन प्रान्त में सूर्यग्रहण देखने के लिए यात्रा की। इस समय उनके पिता को मलेरिया हो गया और इसके परिणामस्वरूप उनके पिता का निधन भी हो गया। चुललंगकरण के शासनकाल में राज्य ने सन् 1893 का फ्रेंको-श्याम संकट और हॉ युद्ध देखे।
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Thailand profile - timeline". बीबीसी न्यूज़ (ब्रिटिश अंग्रेज़ी भाषा में). 2011-11-09. अभिगमन तिथि: 2025-05-22.
बाहरी कड़ियाँ
[संपादित करें]- श्याम के चुललंगकरण की डायरी और यात्रा वृत्तांत | दक्षिणपूर्व एशिया की डिजिटल लाइब्रेरी. Archived 4 मार्च 2016 at the वेबैक मशीन.
चुललंगकरण (राम पंचम) जन्म: 20 सितम्बर 1853 मृत्यु: 23 अक्टूबर 1910 | ||
| राजसी उपाधियाँ | ||
|---|---|---|
| पूर्वाधिकारी मोंग्कुट |
श्याम के राजा 1 अक्टूबर 1868 – 23 अक्टूबर 1910 |
उत्तराधिकारी वाजिर्वुध |
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