चुम्बकीय प्रवर्धक

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चुम्बकीय प्रवर्धक के कार्य का सिद्धान्त ; I2 डीसी धारा है जिसे बढ़ा-घटाकर प्रेरक का प्रेरकत्व घटाया-बढ़ाया जाता है।
लार्स लन्ढाल नामक स्विस इंजीनियर द्वारा डिजाइन किया गया एक चुम्बकीय श्रव्य प्रवर्धक

चुम्बकीय प्रवर्धक (magnetic amplifier या "mag amp") एक विद्युतचुम्बकीय युक्ति है जिसके द्वारा विद्युत संकेतों को प्रवर्धित किया जाता है। इसका विकास २०वीं शताब्दी के आरम्भिक दिनों में हुआ था। यह निर्वात नलिका प्रवर्धकों का एक विकल्प हुआ करता था। इसकी मजबूती तथा अधिक विद्युत धारा प्रदान करने की क्षमता इसकी विशेषता थी। द्वितीय विश्वयुद्ध में जर्मनी ने इसकी डिजाइन को उँचाई प्रदान की और इसका उपयोग V-2 रॉकेट में किया। शक्ति के नियन्त्रण के लिए १९४७ से १९५७ तक इसका खूब प्रयोग किया गया, किन्तु उसके बाद ट्रांजिस्टर के आ जाने से इसका उपयोग क्षीण होता गया। आज इसका उपयोग नहीं के बराबर होता है। आज भी कहीं-कहीं चुम्बकीय प्रवर्धक तथा ट्रांजिस्टर मिलाकर काम में लिए जाते हैं।

देखने पर चुम्बकीय प्रवर्धक, ट्रान्सफॉर्मर जैसा ही दिखता है किन्तु इसके कार्य का सिद्धान्त बिल्कुल अलग है। वास्तव में, चुम्बकीय प्रवर्धक, एक संतृप्त्य प्रेरक (saturable reactor) है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]