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चुंबकीय टेप

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1950–70 के दशक में उपभोक्ता उपयोग के लिए प्रचलित ¼-इंच चौड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग टेप का 7-इंच रील

चुंबकीय फीता या चुम्बकीय टेप (magnetic tape) चुंबकीय संचयन का एक माध्यम है, जो एक लंबी और संकरी प्लास्टिक फ़िल्म पट्टी पर पतली चुंबकीय परत चढ़ाकर बनाया जाता है। इसका विकास सन् 1928 में जर्मनी में हुआ, जो डेनमार्क की पूर्ववर्ती चुंबकीय तार रिकॉर्डिंग पर आधारित था। चुंबकीय टेप का उपयोग करने वाले उपकरण अपेक्षाकृत सरलता से ध्वनि, दृश्य तथा डिजिटल संगणक आँकड़ों को रिकॉर्ड और पुनः चलाने में सक्षम होते हैं।

चुंबकीय टेप ने ध्वनि रिकॉर्डिंग और पुनरुत्पादन तथा प्रसारण में क्रांति ला दी। इसके कारण रेडियो कार्यक्रमों को, जो पहले हमेशा सीधा प्रसारित होते थे, रिकॉर्ड कर बाद में या दोबारा प्रसारित करना संभव हुआ। 1950 के दशक की शुरुआत से बड़े पैमाने पर आँकड़ों के भंडारण हेतु कंप्यूटरों में भी इसका उपयोग होने लगा, और आज भी यह बैकअप के लिए प्रयुक्त होता है।

चुंबकीय टेप 10–20 वर्षों के बाद क्षीण होने लगता है, इसलिए दीर्घकालिक अभिलेखन के लिए यह आदर्श माध्यम नहीं है।[1] इसका अपवाद कुछ डेटा टेप प्रारूप, जैसे लीनियर टेप-ओपन, हैं जिन्हें विशेष रूप से दीर्घकालिक अभिलेखन के लिए बनाया गया है।[2]

चुंबकीय टेप में सूचना प्रायः पतली और लंबी पट्टियों (ट्रैक) में रिकॉर्ड की जाती है, जो एक-दूसरे से अलग होती हैं। ये ट्रैक आमतौर पर टेप की लंबाई के समानांतर होती हैं (अनुदैर्ध्य ट्रैक),[3] या टेप की लंबाई के सापेक्ष तिरछी दिशा में होती हैं, जैसा कि हेलिकल स्कैन में होता है।[4] अन्य विधियों में अनुप्रस्थ स्कैन और चापीय स्कैन सम्मिलित हैं। अज़िमुथ रिकॉर्डिंग का उपयोग समीपवर्ती ट्रैकों के बीच की दूरी को कम करने हेतु किया जाता है।

स्थायित्व

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अल्पकालिक उपयोग के लिए उपयुक्त होने के बावजूद चुंबकीय टेप में विघटन की संभावना अधिक होती है। पर्यावरण के अनुसार यह प्रक्रिया 10–20 वर्षों के भीतर आरंभ हो सकती है।[1]

1970 और 1980 के दशकों में निर्मित टेपों में कभी-कभी “चिपचिपा-परत सिंड्रोम” देखा जाता है, जो बाइंडर की जल अपघटन प्रक्रिया के कारण होता है और टेप को अनुपयोगी बना सकता है।[5] इसका उपचार कम तापमान पर “बेकिंग” द्वारा किया जाता है, जिससे अस्थायी रूप से टेप को पढ़कर अन्य माध्यमों में स्थानांतरित किया जा सकता है, लेकिन यह दीर्घकालिक स्थिरीकरण नहीं करता।

उत्तरवर्ती तकनीकें

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चुंबकीय टेप के बाद अन्य तकनीकों ने समान कार्य करना प्रारंभ किया। उदाहरणस्वरूप कंप्यूटरों में हार्ड डिस्क ड्राइव ने कैसेट आधारित सॉफ़्टवेयर रीडरों का स्थान लिया,[6] सीडी और मिनीडिस्क ने ऑडियो कैसेट का स्थान लिया, तथा डीवीडी ने वीएचएस का। फिर भी 2014 के अनुसार  सोनी और आईबीएम टेप की क्षमता बढ़ाने पर कार्यरत थे।[7]

कॉम्पैक्ट कैसेट

ध्वनि रिकॉर्डिंग हेतु चुंबकीय टेप का आविष्कार सन् 1928 में जर्मनी में फ्रिट्स प्फ्लॉयमर द्वारा किया गया।[8]

द्वितीय विश्व युद्ध के समय जर्मनी में विकसित यह तकनीक गोपनीय रही। युद्ध के बाद जैक मुलिन, जॉन हर्बर्ट ऑर और रिचर्ड एच. रेंजर जैसे व्यक्तियों ने इसे आगे बढ़ाया। प्रारंभिक समर्थकों में बिंग क्रॉस्बी भी थे, जिन्होंने एम्पेक्स में निवेश किया।[9]

कुछ प्रमुख ऑडियो प्रारूप:

  • रील-टू-रील
  • फिडेलिपैक
  • 8-ट्रैक टेप
  • कॉम्पैक्ट कैसेट
  • माइक्रोकैसेट
  • डिजिटल ऑडियो टेप
  • डिजिटल कॉम्पैक्ट कैसेट
वीएचएस हेलिकल स्कैन हेड ड्रम

वीडियोटेप वह चुंबकीय टेप है जो वीडियो तथा सामान्यतः ध्वनि को रिकॉर्ड करने के लिए प्रयुक्त होती है। यह एनालॉग या डिजिटल संकेत के रूप में सूचना संग्रहीत कर सकती है।

कुछ प्रमुख वीडियो प्रारूप:

  • क्वाड्रूप्लेक्स वीडियोटेप
  • यू-मैटिक
  • वीएचएस
  • बीटामैक्स
  • वीडियो 2000
  • वीडियो8
  • हाई8
  • डिजिटल8
  • डीवी (वीडियो प्रारूप)

कंप्यूटर डेटा

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9-ट्रैक टेप की छोटी खुली रील


सन्दर्भ

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  1. 1 2 David Pogue (1 September 2016). "Digitize Those Memory-Filled Cassettes before They Disintegrate". अभिगमन तिथि: 26 July 2022.
  2. Coughlin, Tom. "LTO Tape Capacity Shipments Up In 2022". अभिगमन तिथि: 2023-12-19.
  3. Magnetic Recording: The First 100 Years. John Wiley & Sons. 31 August 1998.
  4. Magnetic Recording Handbook. Springer. 6 December 2012.
  5. Memory of the World: Safeguarding the Documentary Heritage. UNESCO. 1998.
  6. "Popular Science". सितम्बर 1983.
  7. "Sony develops magnetic-tape technology". Sony Global. अभिगमन तिथि: 4 May 2014.
  8. Magnetic Recording: The First 100 Years. Wiley-IEEE. 1998.
  9. Fenster, J.M. (Fall 1994). "How Bing Crosby Brought You Audiotape". Invention & Technology.

बाहरी कड़ियाँ

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