चीन में हिन्दू धर्म

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हिन्दू उत्कीर्णन, च्वानजो संग्रहालय। ये चित्र होली के समारोह के लिए नरसिंह कथा वर्णन करता है।

चीन में हिंदू धर्म का अभ्यास अल्पसंख्यक चीनी नागरिकों द्वारा होता है। आधुनिक चीनी मुख्यधारा में हिन्दू धर्म की उपस्थिति अपने आप में बहुत ही सीमित, परन्तु पुरातात्विक साक्ष्य से पता चलता है कि, मध्ययुगीन चीन के विभिन्न प्रांतों में हिंदू धर्म की उपस्थिति थी। [1] चीन के अपने इतिहास से अधिक बौद्ध धर्म के विस्तार से सम्पूर्ण देश में हिंदू प्रभाव अवशोषित हुआ।[2] भारती की वैदिक काल से चली आ रही वास्तविक परम्परायें चीन में लोकप्रिय है, जैसे कि योग और ध्यान। 

हिंदू समुदाय विशेष रूप से अय्यवोले और मनिग्रामम् के तमिल व्यापारी मंडली के माध्यम से, एक बार मध्यकालीन दक्षिण चीन में प्रतिष्ठित हुआ।[3][4] इसका प्रमाण दक्षिण पूर्व चीन के च्वानजो और फ़ुज़ियान प्रांत के काई-यु-आन-मंदिर जैसे स्थानों में प्रात हो रहे हिन्दू रूपांकनों और मंदिरों से मिलता है।[5] हाँग काँग में हिन्दू आप्रवासीयों (immigrant) का छोटा समूदाय अस्तित्व में है।

इतिहास[संपादित करें]

प्राचीन हिंदू प्रभाव[संपादित करें]

अप्सराओं का चित्र, जो चीन के लुओयांग प्रात के लोंगमेन ग्रोट्टोइस् में है।

प्राचीन चीनी धर्म पर हिन्दुत्व प्रभाव के कुछ उदाहरण हैं, जिन में "षड्दर्शन" अथली "षड् सिद्धान्त" के साथ साथ योग और स्तूप (पूर्व एशिया में ये शिवालय में परिणत हुए) का भी समावेश होता है।यद्यपि, चीन में हिंदू धर्म को कभी भी अधिक लोकप्रियता प्राप्त नहीं हुई, इससे विपरीत मान्यताओं बौद्ध धर्म और कन्फ्यूशीवाद को अधिक लोकप्रियता प्राप्त हुई। ऐसे में तिब्बत के कुछ प्रान्त अपवाद रूप थे।[6]

चीन में एक छोटा सा हिंदू समुदाय था, जो अधिकतर दक्षिणपूर्वी चीन में स्थित था। तेरहवीं सदी के अन्त में लिखे गये तमिल और चीनी द्विभाषी शिलालेख च्वानजो के एक शिव मंदिर के अवशेषों के साथ प्राप्त हुए हैं। ये संभवतः दो दक्षिण भारतीय शैली के हिन्दू मंदिरों में से एक (115) होना चाहिए। उसका निर्माण पुरातन पोताश्रय (port) के दक्षिणपूर्वी क्षेत्र   में जहां प्राचीन समय में विदेशी व्यापारियों का विदेशी अन्तर्देश (enclave) स्थित था, वहाँ हुआ होगा। [7]

चार स्वर्गीय राजा की विचारधारा मूलतः दिग्पालों से उत्पन्न हुई है। सन-वुकोंग की हनुमान में निष्ठा थी ऐसा कुछ विद्वान स्रोत देते हैं। सन-वुकोंग चीनी पौराणिक चरित्र के एक पात्र हैं।

यक्ष (चीनी: 夜叉) मूल रूप से हिन्दू इतिहास के एक प्राकृतिक भूत या राक्षस वर्ग के हैं। चीन को यक्ष के प्रति विश्वास सद्धर्म पुण्डरीक सूत्र (Lotus Sutra) (पुण्डरीक अर्थात् कमल, अतः इसे कमल सूत्र भी कहते हैं।) के माध्यम से हुआ, जो मूलतः धर्मरक्ष द्वारा 290 CE के समीप चीनी भाषा में अनुदित हुआ था। कालान्तर में 406 CE के समीप कुमारजीव द्वारा उस सूत्र का सप्त पूलिका (fascicle) के रूप में किया अनुवाद लोकप्रिय हुआ। 

चीनी लोक धर्म (folk religion) में कई किंवदंतियां और कथायें, जैसे कि विद्रोही (Nezha), हिंदू पौराणिक कथाओं में से ली गई हैं। [8] 10 वीं शताब्दी में  टिएन्झै (Tianxizai) के अनुवाद के पश्चात् ये देखा जाता है। [9] इस प्रभाव और विचारों के संश्लेषण के कालखण्ड में, पूर्व-उपस्थित अवधारणाओं के साथ कुछ पारिभाषिक शब्दों का तादात्म्य हुआ - राक्षस को लू-ओ-चा (luocha) के रूप में और पिशाच  को पिशेझुओ (pishezuo) रूप में स्वीकारा गया।

प्रभावकारी धर्म[संपादित करें]

प्राचीन चीन प्रदेश के अभिलेख और आधुनिक पुरातत्त्व संशोधनो के अनुसार हिन्दुत्व की कुछ विचारधारा चीन के बहुत प्रेदशों में स्वीकारी गई थी। 

मोगाओ गुहाएँ (Tun-huang - Mogao) चीन के उत्तरी भाग में स्थित गांसू प्रान्त में हैं। बौद्ध कला से प्रभावित हिन्दु देवताओं की मूर्ति भी प्राप्त हुई है। उदाहरण के रूप में, 285 क्रमांक की गुहा में गजमुखी गणेश की स्थापना छठवीं शताब्दी में हुई थी। [10]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Huang Xinchuan (1986), Hinduism and China, in Freedom, Progress, and Society (Editors: Balasubramanian et al.
  2. John Kieschnick and Meir Shahar (2013), India in the Chinese Imagination - Myth, Religion and Thought, ISBN 978-0812245608, University of Pennsylvania Press
  3. W.W. Rockhill (1914), Notes on the relations and trade of China with the Eastern Archipelago and the coasts of Indian Ocean during the 14th century", T'oung-Pao, 16:2
  4. T.N. Subramaniam (1978), A Tamil Colony in Medieval China, South Indian Studies, Society for Archaeological, Historical and Epigraphical Research, pp 5-9
  5. John Guy (2001), The Emporium of the World: Maritime Quanzhou 1000-1400 (Editor: Angela Schottenhammer), ISBN 978-9004117730, Brill Academic, pp. 294-308
  6. Sherring and Longstaff (1936), Western Tibet and the British borderland - The Sacred Country of Hindus and Buddhists Edward Arnold, London
  7. [1]
  8. Chinese Nezha has been traced to Hinduism's Nalakubara
  9. Meir Shahar (2013), in India in the Chinese Imagination - Myth, Religion and Thought, ISBN 978-0812245608, University of Pennsylvania Press, pp. 21-44
  10. Alice Getty (1936), Gaṇeśa: a monograph on the elephant-faced god, Reprinted in 1971, Oxford: Clarendon Press, Chapter 7, pp. 67-78

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]