चिबिश्योफ़ की असमानता
चिबिश्योफ़ की असमानता मार्कोव की असमानता का ही एक विशेष रूप है। मार्कोव की असमानता जैसे यह भी यादृच्छिक चर के प्रायिकता के परिबंध को इंगित करता है। पर मार्कोव की असमानता से भिन्न इसमें यादृच्छिक चर की अऋणात्मक होने की बाध्यता नहीं है। इसका नाम इसके सूत्रधार रूसी गणितज्ञ पाफ़नुतिय चिबिश्योफ़ पर रखा गया है। यह सांख्यिकी माप - मानक विचलन के शाब्दिक अर्थ को असमानता रूप में प्रकाशित करता है। किसी भी यादृच्छिक चर के अपने औसत मान (प्रत्याशा मान) से विचलन की प्रायिकता उसके मानक विचलन से समानुपाती होगा और विचलन के मूल्य से व्युत्क्रमानुपाती। सरल शब्दों में कोई भी राशि अपने औसत के मान से बहुत नहीं भटकेगी, माने जितना विचलन होगा उसके होने की संभावना (प्रायिकता) उतनी न्यून होती जाएगी। और यह विचलन मानक विचलन के माप में नापा जाएगा, विचलन मानक विचलन सापेक्ष होगा निरपेक्ष नहीं, यथा - विचलन 1 मानक विचलन बराबर हुआ, 1.5 मानक विचलन बराबर हुआ इत्यादि।
कथन
[संपादित करें]मान लें एक यादृच्छिक चर है जिसका प्रत्याशा मान है और मानक विचलन है, , तो
उपपत्ति
[संपादित करें]मार्कोव की असमानता से अगर यादृच्छिक चर जो अऋणात्मक हो और एक संख्या हो तोः
इसमें और अधिरोपित किया जाए तो
चूँकि मानक विचलन की परिभाषा से ही है तो,
और तो,
अतः सिद्ध हुआ।
उदाहरण
[संपादित करें]किसी कक्षा में तुलनात्मक मूल्यांकन होता हो, और औसत से 1.5 गुणा या उससे अधिक विचलित अंक को प्रथम पदवी से उत्तीर्ण माना जाए। तो ऐसे छात्रों की संख्या का अनुपात 9 में से 4 से अधिक नहीं हो सकता।