चिन्तामण विनायक वैद्य

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चिन्तामण विनायक वैद्य (1861–1938) संस्कृत के विद्वान तथा मराठी लेखक एवं इतिहसकार थे। कुछ समय तक वे ग्वालियर राज्य के मुख्य न्यायाधीश भी थे। १९०८ में उन्होने पुणे में मराठी साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षता की थी। बाद में बालगंगाधर तिलक के नेतृत्व वाली कांग्रेस लोकतांत्रिक दल (Congress Democratic Party) में सम्मिलित हो गये।

कृतियाँ[संपादित करें]

  • समग्र अवलोन्नति लेखमाला (1906)
  • एपिक इंडिया (१९०७ ; अंग्रेजी)
  • महाभारत — समालोचन (1914)
  • Mahābhārat — A Criticism (अंग्रेजी में)
  • महाभारत-मीमांसा (हिन्दी अनुवाद- माधवराव सप्रे ; लक्ष्मीनारायण प्रेस, बनारस से प्रथम संस्करण-1920 ई० ; हरियाणा साहित्य अकादमी, चण्डीगढ़ से-1990)
  • निबन्ध आणि भाषणे (1915)
  • वाल्मीकि रामायण परीक्षण (1920)
  • मध्ययुगीन भारत, अथवा हिन्दू राज्यांचा उद्भव, उत्कर्ष आणि उच्छेद (1920)
  • History of Mediaeval Hindu India, Being a History of India From 600 to 1200 A.D. (1921 ; तीन खण्डों में)
  • Downfall of Hindu India
  • हिन्दू भारत का उद्भव (मध्ययुगीन भारत, भाग-1)
  • हिन्दू भारत का उत्कर्ष (मध्ययुगीन भारत, भाग-2) -1929 ई० (काशी विद्यापीठ, काशी से)
  • हिन्दू भारत का अन्त (मध्ययुगीन भारत, भाग-3) -1928 ई०
  • श्री कृष्ण चरित (1922)
  • संस्कृत वाङ्मयाचा त्रोटक इतिहास (1922)
  • श्रीमद महाभारताचे मराठी सरस भाषान्तर (1922)
  • दुर्दैवी रंगू, अर्थात, पानीपतचा शेवटचा संग्राम (1924) - पानीपत के तृतीय युद्ध पर आधारित उपन्यास [1]
  • श्री राम चरित (1926)
  • History of Sanskrit Literature (1930)
  • हिन्दू धर्माची तत्व, अर्थात , यासम्बन्धी निरनिराळ्या विषयांवर वैद्यानी दिलेली व्याखाने व लिहिलेले लेख (1931)
  • वैद्यांचे ऐतिहासिक निबन्ध (1931)
  • मराठा स्वराज्य संस्थापक श्री शिवाजी महाराज (1932)
  • शिवाजी – द फाउण्डर ऑफ मराठा स्वराज्य (अंग्रेजी में)
  • संगीत संयोगिता नाटक, अर्थात, पतिनिष्ठा (1934)
  • Epic India, or, India As Described in the Mahabharat and the Ramayan (दो खण्डों में)
  • The Riddle of the Rāmāyaṇ
  • मराठी भाषेची उत्पत्ति

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Das (1995), पृ॰ 499