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चित्रभानु

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चित्रभानु (जीवनकाल १६वीं शताब्दी ) केरल गणित सम्प्रदाय के एक गणितज्ञ और नीलकंठ सोमयाजी के शिष्य थे। वे वर्तमान त्रिशूर के पास कोववरम शहर के एक नम्बूदिरी ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे।[1] उन्होंने 1530 ई० में 'करण'' नामक एक संक्षिप्त खगोलीय ग्रन्थ की रचना की। इसके अतिरिक्त उन्होंने बीजगणित पर भी एक ग्रन्थ लिखा एवं काव्यशास्त्र सम्बन्धी एक ग्रन्थ पर टीका भी लिखी। चित्रभानु और नीलकंठ दोनों शंकर वरियार के गुरु थे।[2][3]

चित्रभानु ने दो अज्ञात राशि वाले युगपत् डायोफैंटाइन समीकरणों की 21 प्रकार की प्रणालियों के लिए पूर्णांक हल प्रदान किया।[2] ये निम्नलिखित सात प्रकार के समीकरणों के सभी संभावित जोड़े हैंः [4]

प्रत्येक स्थिति के लिए, चित्रभानु ने अपनी विधि का स्पष्टीकरण और औचित्य बताया है और इसके साथ-साथ एक उदाहरण भी दिया है। उनकी कुछ व्याख्याएँ बीजगणितीय हैं, जबकि अन्य ज्यामितीय हैं।

सन्दर्भ

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  1. Joseph, George Gheverghese (10 December 2009). A Passage to Infinity: Medieval Indian Mathematics from Kerala and Its Impact. ISBN 9788132104810.
  2. 1 2 Joseph, George Gheverghese (2009), A Passage to Infinity: Medieval Indian Mathematics from Kerala and Its Impact, SAGE Publications India, p. 21, ISBN 9788132104810. उद्धरण त्रुटि: अमान्य <ref> टैग; "ggj" नाम कई बार भिन्न सामग्री के साथ परिभाषित है
  3. Plofker, Kim (2009). Mathematics in India. Princeton: Princeton University Press. pp. 220, 319, 323. ISBN 9780691120676.
  4. Hayashi, Takao; Kusuba, Takanori (1998), "Twenty-one algebraic normal forms of Citrabhānu", Historia Mathematica, vol. 25, no. 1, pp. 1–21, डीओआई:10.1006/hmat.1997.2171, MR 1613702.