चार्ल्स का नियम

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आयतन और ताप में सम्बन्ध दिखाने वाला एक चलायमान चित्र।

चार्ल्स का नियम (इसे आयतन नियम के नाम से भी जाना जाता है) प्रायोगिक गैस नियम है जिसके अनुसार गैस को गर्म करने पर उसमें विस्तार होता है। चार्ल्स के नियम का आधुनिक कथन निम्नलिखित प्रकार से लिखा जा सकता है:

जब किसी शुष्क गैस को नियत दाब पर रखा जाता है तो केल्विन तापमान और आयतन एक दूसरे के अनुक्रमानुपाती होते हैं।[1]

यह अनुक्रमानुपाती सम्बन्ध निम्न प्रकार लिखा जा सकता है:

अथवा

जहाँ:

V गैस का आयतन है
T गैस का (कैल्विन पैमाने पर) तापमान है
k नियतांक है।
         चार्ल्स का नियम 

सन् 1787 मे फ्रांस के वैज्ञानिक जे0 चार्ल्स ने संपादन किया। इस नियम के अनुसार स्थिर दाब पर किसी गैस की निशचित मात्रा का आयतन के परमताप के समानुपाती होता है ।

माना किसी गैस की निशचित मात्रा का आयतन v तथा परमताप T हो तो, ,,

           V ~ T
 या।        v=KT 

या। V/T=K या। V1/T1=V2/T2

         परमताप

-237°C ताप को परमशून्य कहते है। परमशून्य मानकर जो ताप लिखे जाते है, उन्हे परमताप कहते है।

       परमताप = t°C+273
        

Written by --- Tanis punia

       16×2=8. Only JAAT

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सन्दर्भ[संपादित करें]

{{टिप्पणीसूची}

  1. फुललिक, पी॰ (1994), Physics [भौतिकी] (अंग्रेज़ी में), हाइनमान, पपृ॰ 141–42, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-435-57078-1.