चार्ल्स अल्बर्ट गोबैट
चार्ल्स अल्बर्ट गोबाट (21 मई 1843 – 16 मार्च 1914) एक स्विस वकील, शैक्षिक प्रशासक और राजनेता थे। इन्हें 1902 में 'परमानेंट इंटरनेशनल पीस ब्यूरो' के नेतृत्व के लिए एली डुकोमुन के साथ संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।[1]
जन्म और शिक्षा
[संपादित करें]गोबट का जन्म 21 मई 1843 को स्विट्जरलैंड के ट्रामेलन में हुआ था। वे एक प्रोटेस्टेंट पादरी के बेटे और सैमुअल गोबात के भतीजे थे। सैमुअल गोबात एक मिशनरी थे जो बाद में यरुशलम के बिशप बने। उन्होंने बेसल विश्वविद्यालय, हीडलबर्ग विश्वविद्यालय, बर्न विश्वविद्यालय और पेरिस विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। 1867 में उन्हें हीडलबर्ग विश्वविद्यालय से कानून में 'सुम्मा कम लॉड' (सर्वोच्च सम्मान) के साथ डॉक्टरेट की उपाधि मिली।
कानून और राजनीति में करियर
[संपादित करें]इन्होंने सबसे पहले बर्न में और फिर बर्न कैंटन के डेलेमोंट में वकालत की। उन्होंने सोरबोन में फ्रांसीसी नागरिक कानून पर व्याख्यान भी दिए। 1880 के दशक में वे कैंटन और राष्ट्रीय राजनीति तथा लोक प्रशासन में सक्रिय थे।[2]
इन्होंने 1888 में इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन की स्थापना के समय से ही इसके साथ काम किया। इस यूनियन की स्थापना विलियम रैंडल क्रेमर ने की थी। इन्होंने पी.एच.डी. पूरी करने के बाद बर्न में वकालत शुरू की। इन्होंने बर्न विश्वविद्यालय में फ्रांसीसी सिविल कानून पर लेक्चर भी दिए। इसके बाद उन्होंने बर्न कैंटन के डेलेमोंट में अपना एक दफ़्तर खोला, जो जल्द ही उस ज़िले की सबसे बड़ी कानूनी फ़र्म बन गया।
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Nobel Peace Prize 1902". NobelPrize.org. अभिगमन तिथि: 3 जून 2026.
- ↑ "Charles-Albert Gobat | Biography, Nobel Prize & Law | Britannica". Encyclopedia Britannica (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 3 जून 2026.