चाँद (पत्रिका)
चाँद एक प्रसिद्ध हिन्दी मासिक पत्रिका थी जिसका प्रकाशन सन् १९२२ में इलाहाबाद (प्रयागराज) से हुआ।
इस पत्रिका के पहले संपादक लाहौर के एक उद्यमी रामरख सिंह सहगल थे, और इसका पहला अंक नवंबर १९२२ में प्रकाशित हुआ था।
इस पत्रिका का संपादन महादेवी वर्मा और नन्द किशोर तिवारी ने भी किया। कुछ दिनों तक इसका संपादन मुंशी नवजादिक लाल ने किया था। आरम्भ में इस पत्रिका में नारी जीवन से सम्बंधित चर्चा अधिक रहती थी। 'चाँद' का मारवाणी अंक अपने समय में बहुचर्चित रहा। साहित्यिक होते हुए भी इस में समाज सुधार की प्रवृत्ति बलवती रही।[1] इसका एक विशेषांक ‘फाँसी’ नाम से भी (नवम्बर १९२८ ई०) में प्रकाशित हुआ था जो अनेक देशभक्तों के लिये प्रेरणा का स्रोत बना।[2] ‘चाँद’ पत्रिका की 29 विशेषांक प्रकाशित हुए।[3]
पत्रिका का मुख्य नैतिक विचार यह था - ‘आध्यात्मिक स्वराज हमारा ध्येय, सत्य हमारा साधन और प्रेम हमारी प्रणाली है। जब तक इस पावन अनुष्ठान में हम अविचल हैं, तब तक हमें इसका डर नहीं कि हमारे विरोधियों की संख्या और शक्ति कितनी है।'
स्त्री विमर्श
[संपादित करें]यह पत्रिका अपनी आरम्भ से स्त्री को केंद्रित करते हुए रचनओं, लेखों, कविताओं और आलेखों को प्रकाशित कर रही थी। स्त्री शिक्षा और विधवा प्रश्न मुख्य केंन्द्र रहे। पत्रिका के पहले खंड में स्त्री शिक्षा पर ५६ लेख थे।[4]
स्वराज्य समाज
[संपादित करें]चाँद पत्रिका का 'फाँसी' अंक अपनी राजनीतिक चेतना और आंदोलनकारी दृष्टिकोण की वजह से चर्चित रहा। इसी अंक में भगत सिंह, बटुकेश्वर दत्त आदि द्वारा लिखित ३७ रेखाचित्र बदले हुए नामों के साथ प्रकाशित हुए। चतुरसेन शास्त्री के एक संस्मरण ‘पहले सलामी’ के अनुसार, इस अंक में छपने वाले राजनीतिक हुतात्माओं के सम्पूर्ण चित्र और चरित्र उन्हें तत्कालीन क्रांतिकारियों द्वारा ही प्राप्त हुआ था जिसे उन्होंने नाम बदल कर प्रकाशित किए थे।[3] इस अंक को ब्रिटिश सरकार द्वारा ज़ब्त कर लिया गया था। 'फाँसी' अंक का संपादन चतुरसेन शास्त्री ने किया था।[5]
इस पत्रिका का 'मारवाड़ी' नाम का एक और अंक अंग्रेज़ों ने ज़ब्त किया था।[5]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ समाज दर्शन : अर्थात सामाजिक कुरीतियों का दिग्दर्शन (रामरख सिंह सहगल)
- ↑ बाहरी, डॉ॰ हरदेव (१९८६). साहित्य कोश, भाग-2,. वाराणसी: ज्ञानमंडल लिमिटेड. p. 184.
{{cite book}}:|access-date=requires|url=(help) - 1 2 उद्धरण त्रुटि:
<ref>का गलत प्रयोग;:1नाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है। - ↑ "क्या 'चांद' ने स्त्रियों को रोशनी दी थी". https://www.outlookhindi.com/ (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-05-07.
{{cite web}}: External link in(help)|website= - 1 2 Bhadauriyā, Santosha (2001). Aṅgrezī rāja aura pratibandhita Hindī patrikāem̐. Svarāja Saṃsthāna Sañcālanālaya, Saṃskr̥ti Vibhāga, Madhyapradeśa Śāsana.
बाहरी कड़ियाँ
[संपादित करें]- चाँद का फाँसी अंक (गूगल पुस्तक ; लेखक - नरेशचन्द्र चतुर्वेदी)
- भविष्य (रामरख सिंह सहगल)