चन्द्रनाथ बसु

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
चन्द्रनाथ बसु
जन्म 31 अगस्त 1844
कैकल, हुगली जिला, बंगाल प्रेसीडेन्सी (अब पश्चिम बंगाल में).[1][2]
मृत्यु 20 जून 1910(1910-06-20) (उम्र 65)
शिक्षा प्राप्त की प्रेसीडेन्सी कॉलेज
संबंधी काशीनाथ बसु (दादा)

चंद्रनाथ बसु (1844-1910) [3] एक बंगाली रूढ़िवादी [4] [5] साहित्यकार[6] तथा एक कट्टर हिंदू थे [7] जिन्हें हिन्दुत्व सिद्धांत का संस्थापक माना जाता है। [8] [9] [a] उन्हें बंगाल में आर्थिक राष्ट्रवाद का प्रणेता माना जाता है।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा[संपादित करें]

चंद्रनाथ का जन्म 31 अगस्त 1844 को बंगाल प्रेसीडेंसी के हुगली जिले के कोइकला गाँव में हुआ था। [2] वह काशीनाथ बसु के दूसरे पुत्र थे। उनकी तीन बहनें थीं।

चंद्रनाथ ने पहले कुछ समय के लिए हेडोर स्कूल में अध्ययन किया जो एक मिशनरी संस्थान था। किन्तु बतिस्मा किए जाने के भय से इन्होने इस विद्यालय को छोड़ दिया। इसके बाद उन्होने ओरिएंटल सेमिनरी नामक विद्यालय में प्रवेश लिया।

उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज से बीए (1862-1865) किया। वहाँ उन्हें छात्रवृत्ति मिलती थी। वहाँ वे पहले आर्ट्स परीक्षा में पाँचवें स्थान पर आये और अन्ततः 1865 में सभी स्नातकों की सूची सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया। [3] 1866 में उन्होंने इतिहास में एमए किया तथा अगले वर्ष कानून की डिग्री प्राप्त की।

करीअर[संपादित करें]

उन्होने विभिन्न सरकारी-कानूनी पदों पर कार्य किया जिसमें ढाका के उप-मजिस्ट्रेट के रूप में छह महीने का कार्यकाल भी था। इसके बाद वह स्थायी रूप से कोलकाता में बस गए। इसके बाद उन्हें बंगाल लाइब्रेरी के पुस्तकालयाध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया गया। [3] इसके बाद 1877 में उन्हें बंगाल सरकार का आधिकारिक अनुवादक नियुक्त किया गया। चंद्रनाथ ने 1904 में अपनी सेवानिवृत्ति तक सेवा की।

उन्होंने जॉयपुर कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन के प्रिंसिपल के रूप में भी काम किया, पाठ्यपुस्तक समिति में काम किया , [12] वेबंगीय साहित्य परिषद के एक अस्थायी उपाध्यक्ष थे। [2]

सक्रियता और स्वागत[संपादित करें]

उनकी आरंभिक कृतियाँ अंग्रेजी में थीं और गौरवशाली क्रांति और उसके आंकड़ों से संबंधित थीं। [13] 1864 में प्रकाशित उनके निबंध द इंग्लिशमैन की समीक्षा अत्यन्त सकारात्मक थी, जिसमें संदेह व्यक्त किया गया था कि क्या यह एक 'देशी व्यक्ति' द्वारा लिखा गया है। [14]

चंद्रनाथ की साहित्यिक प्रतिभा को पहली बार बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय ने पहचाना था जब उन्होने 'कृष्णकान्तेर विल्ल' की समीक्षा की थी। इसी के बाद चंद्रनाथ ने बांग्ला में लिखना आरम्भ किए और 1800 के दशक के अंत की अग्रणी पत्रिका बंगदर्शन से जुड़े। [3]

मृत्यु और विरासत[संपादित करें]

20 जून 1910 को चन्द्रनाथ का देहान्त हो गया। [2] उन्होंने भूदेव मुखोपाध्याय को अत्यधिक प्रभावित किया जो बंगाल पुनर्जागरण के एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे। [13]

टिप्पणियाँ[संपादित करें]

  1. Amiya Sen notes that Basu's usage of the word was to merely portray a traditional Hindu cultural view in contrast to the political ideology, purveyed by Vinayak Damodar Savarkar.[10] Other scholars have shared similar observations.[11]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. Sengupta, Subodh Chandra and Bose, Anjali (editors), (1976), Samsad Bangali Charitabhidhan (Biographical dictionary), स्क्रिप्ट त्रुटि: "lang/utilities" ऐसा कोई मॉड्यूल नहीं है।, p 146
  2. Akhter, Shamima. "Basu, Chandranath". Banglapedia. अभिगमन तिथि 13 May 2019. सन्दर्भ त्रुटि: <ref> अमान्य टैग है; "bc" नाम कई बार विभिन्न सामग्रियों में परिभाषित हो चुका है सन्दर्भ त्रुटि: <ref> अमान्य टैग है; "bc" नाम कई बार विभिन्न सामग्रियों में परिभाषित हो चुका है
  3. Sen, Amiya P. (2001-02-28). "Their Finest Hour: Hindu Revivalism and Aggressive Propaganda Through the Press and Platform (c. 1880–1904)". Hindu Revivalism in Bengal c.1872-1905: Some Essays in Interpretation (अंग्रेज़ी में). Oxford University Press. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780199080625. डीओआइ:10.1093/acprof:oso/9780195655391.001.0001. सन्दर्भ त्रुटि: <ref> अमान्य टैग है; ":0" नाम कई बार विभिन्न सामग्रियों में परिभाषित हो चुका है सन्दर्भ त्रुटि: <ref> अमान्य टैग है; ":0" नाम कई बार विभिन्न सामग्रियों में परिभाषित हो चुका है सन्दर्भ त्रुटि: <ref> अमान्य टैग है; ":0" नाम कई बार विभिन्न सामग्रियों में परिभाषित हो चुका है
  4. Bagchi, Jasodhara (1997). "Female sexuality and community in Jyotirmoyee Devi's Epar Ganga Opar Ganga". प्रकाशित Thapan, Meenakshi (संपा॰). Embodiment : Essays on Gender and Identity. New Delhi: Oxford University Press. पृ॰ 85.
  5. Sarkar, Sumit (1997). Writing social history (अंग्रेज़ी में). New York. पृ॰ 375. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780195646337.
  6. Mukherjee, Sujit (1998). A Dictionary of Indian Literature: Beginnings-1850 (अंग्रेज़ी में). 1. New Delhi: Orient Blackswan. पपृ॰ 70–71. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788125014539.
  7. Nagendra (1976). Literary Criticism in India (अंग्रेज़ी में). Sarita Prakashan. पृ॰ 18.
  8. "Will its Hindu revivalist past haunt West Bengal's future?". Open The Magazine. 2019-03-28. अभिगमन तिथि 2019-10-29.
  9. Gopal, Sangita (2003-07-01). "Hindu Buying/Hindu Being: Hindutva Online and the Commodity Logic of Cultural Nationalism". South Asian Review. 24 (1): 161–179. आइ॰एस॰एस॰एन॰ 0275-9527. डीओआइ:10.1080/02759527.2003.11978304.
  10. Sen, Amiya P. (2014-05-22). Discourses, Public Addresses, and Informal Talks (अंग्रेज़ी में). Oxford University Press. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780199083015. डीओआइ:10.1093/acprof:oso/9780198098966.001.0001.
  11. Bhatt, Chetan (2004). "'Majority ethnic' claims and authoritarian nationalism: the case of Hindutva". प्रकाशित Kaufmann, Eric P. (संपा॰). Rethinking Ethnicity : Majority Groups and Dominant Minorities. London: Routledge. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9780203563397. डीओआइ:10.4324/9780203563397.
  12. Chaudhuri, Rosinka (2008-02-01). "The Politics of Poetry: An Investigation into Hindu/Muslim Representation in Nabinchandra Sen's Palashir Yuddha". Studies in History. 24 (1): 1–25. आइ॰एस॰एस॰एन॰ 0257-6430. डीओआइ:10.1177/025764300702400101.
  13. P. Sen, Amiya (4 July 2018). "A Hindu Conservative Negotiates Modernity : Chandranath Basu (1844–1910) and Reflections on the Self and Culture in Colonial Bengal" (PDF). प्रकाशित Klöber, Rafael; Ludwig, Manju (संपा॰). HerStory--Historical Scholarship between South Asia and Europe : Festschrift in Honour of Gita Dharampal-Frick. Berlin: CrossAsia-eBooks. पपृ॰ 175–187. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-3-946742-43-2. डीओआइ:10.11588/xabooks.366.517. सन्दर्भ त्रुटि: <ref> अमान्य टैग है; ":2" नाम कई बार विभिन्न सामग्रियों में परिभाषित हो चुका है
  14. Barua, Ankur (2017-04-04). "Vedantic variations in the presence of Europe: establishing the Hindu dharma in late nineteenth century Bengal". International Journal of Dharma Studies. 5 (1): 10. आइ॰एस॰एस॰एन॰ 2196-8802. डीओआइ:10.1186/s40613-017-0050-3.