चक्रवात

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फ़रवरी 27, 1987 को बेरिंट सागर के ऊपर ध्रुवीय ताप

चक्रवात (साइक्लोन) घूमती हुई वायुराशि का नाम है।

उत्पत्ति के क्षेत्र के आधार पर चक्रवात के दो भेद हैं :

  • (१) उष्ण कटिबंधीय चक्रवात या वलकियक चक्रवात (Tropical cyclone), तथा
  • (२) बाह्योष्णकटिबंधीय चक्रवात या शीतोष्णकटिबंधीय चक्रवात या उष्णवलयपार चक्रवात (Extratropical cyclone या Temperate cyclones)

उष्णवलयिक चक्रवात - ये वायुसंगठन या तूफान हैं, जो उष्ण कटिबंध में तीव्र और अन्य स्थानों पर साधारण होते हैं। इनसे प्रचुर वर्षा होती है। इनका व्यास ५० से लेकर १,००० मील तक का तथा अपेक्षाकृत निम्न वायुदाब वाला क्षेत्र होता है। ये २० से लेकर ३० मील प्रति घंटा तक के वेग से चलते हैं। इनमें वायुघूर्णन ९० से लेकर १३० मील प्रति घंटे तक का होता है। ये वेस्ट इंडीज में प्रभंजन (hurricane) तथा चीनसागर एवं फिलिपिन में बवंडर (typhoon) और अमेरिका में टोर्नेडो तथा ऑस्ट्रेलिया में विल्ली विलिज कहे जाते हैं।

उष्णवलयपार चक्रवात - यह मध्य एवं उच्च अक्षांशों का निम्न वायुदाब वाला तूफान है। इसका वेग २० से लेकर ३० मील प्रति घंटे के वेग से सर्पिल रूप से चलती है। प्राय: इससे हिमपात एवं वर्षा होती है।

दोनों प्रकार के चक्रवात उत्तरी गोलार्ध में वामावर्त (counter-clockwise) तथा दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिणावर्त (clockwise) रूप में संचारित होते हैं। उष्णवलयपार चक्रवात में साधरणतया वायु-विचनल-रेखा होती है, जो विषुवत की ओर निम्नवायुकेंद्र में सैकड़ों मील तक बढ़ी रहती है तथा गरम एवं नम वायु को ठंडी और शुष्क वायु से पृथक् करती है।

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परिचय[संपादित करें]

मौसम विज्ञान में, चक्रवात एक ऐसा बंद परिपत्र है जिसका तरल पदार्थ, पृथ्वी के समान एक ही दिशा में चक्कर लगाता रहता है।[1][2] इसमें आमतौर पर हवा सर्पिल आकार में, पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध में दक्षिणावर्त और दक्षिणी गोलार्द्ध में वामावर्त रूप से घूमती है।

बड़े चक्रवात वाले परिसंचरण लगभग हमेशा कम वायुमंडलीय दबाव[3][4] के क्षेत्रों पर केंद्रित रहते हैं। सबसे बडी कम दबाव वाली प्रणालियाँ कोर ध्रुवीय चक्रवात और अतिरिक्त उष्ण कटिबंधीय चक्रावात कहलाती हैं जो साइनोपटीक पैमाने पर रहती है। गर्म सत् चक्रवात जैसे उष्णकटिबंधीय चक्रवात, मेसोसैक्लोनेस और ध्रुवीय कम छोटे मेसोस्केल के भीतर रहती हैं। अंत: कटिबंधीय चक्रवात मध्यवर्ती आकार के होते हैं।[5][6] ये चक्रवात पृथ्वी के बाहर अन्य ग्रहों पर जैसे मंगल और वरुण पर भी देखे गए हैं।[7][8]

साइक्लोजेनीसिस, चक्रवात गठन और उत्कटता की प्रक्रिया के बारे में बताते है।[9] चक्रवाती अंशअतिरिक्त उष्ण कटिबंधीय चक्रवात बड़े अक्षांशों वाले तापमान पर तरंगों का रूप धारण करते है जिन्हें बरोक्लिनिक क्षेत्र कहा जाता है। यही क्षेत्र संकुचित होकर जब चक्रवातीय परिसंचरण में बंद होते है या उग्र रूप धारण करते हैं तब वातावरण में बदलते हैं। बाद में यही चक्रवात ठंडे केंन्द्रों के रूप में बन जाते है। एक चक्रवात का पथ 2 से 6 दिन के चक्र में ध्रुवीय या उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में प्रवाहित होता रहता है।

मौसम अलग घनत्व वाली हवाओं के दो भागों को अलग करता है और मौसामिक घटना चक्र में सबसे प्रमुख होता हैं। हवा के अंश तापमान या आर्द्रता में अलग हो सकते है। मजबूत ठंडी हवाएं आमतौर पर गंभीर मौसम में तूफान की संकीर्ण पट्टीयों के रूप में, कभी कभी प्रचंड रेखाओं के रूप में तो कभी सूखी रेखाओं के रूप में दिखाई देतीं हैं। वे पश्चिम में संचलन केन्द्र बनाती है और आमतौर पर पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ती जाती हैं गर्म हवाए चक्रवात केंद्र के पूर्व में रहती है और ज्यादातर स्ट्रेटफार्म के रूप में दिखाई देती हैं। ये चक्रवातीय पथ में ध्रुव की ओर बढ़ती रहती है। बंद केंद्र चक्रवातीय जीवन चक्र में देर से प्रवेश करते है और तूफानी केंद्र को लपेट लेते है।

उष्णकटिबंधीय चक्रवाती अंश उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के विकास की प्रक्रिया का वर्णन करता है। उष्णकटिबंधीय चक्रवात अव्यक्त गर्मी सार्थक आंधियों की अव्यक्त गर्मी के कारण संचालित होटी हैं और गर्म मूल की होती है।[10] चक्रवातों सही परिस्थितियों में, अन्तः उष्ण कटिबंधीय, अतिरिक्त कटिबंधीय और उष्णकटिबंधीय चरणों के बीच परिवर्तन कर सकते हैं। भूमि के ऊपर गर्म कोर चक्रवात मिसोसैक्लोनेस का रूप धारण करते है और तूफान का गठन बंधन भी कर सकते हैं।[11] मिसोसैक्लोनेस से जलस्तंभ भी बन सकते हैं, लेकिन ज्यादातर उच्च अस्थिरता और कम ऊर्ध्वाधर हवा कतरनी के वातावरण से विकसित होती है।[12]

संरचना[संपादित करें]

सभी चक्रवातों की कुछ समान संरचनात्मक विशेषताएँ हैं। जैसे जो कम दबाव वाले क्षेत्र होते हैं, उनका केंन्द्र सबसे कम वायुमंडलीय दबाव के क्षेत्र में स्थित होता है और परिपक्व उष्णकटिबंधीय चक्रवात के मुख्य अंश के रूप में जाना जाता है।[2] [20][13] केंद्र के पास, ढार शक्ति दबाव (चक्रवात के केंद्र के दबाव की तुलना में चक्रवात के बाहरी दबाव में) और कोरिओलिस बल को एक संतुलित अनुपात में होने चाहिये अन्यथा दबाव में परिवर्तन से चक्रवात का पतन हो सकता है।[14] कोरिओलिस प्रभाव से एक बड़े चक्रवात के आसपास की वायु का प्रवाह उत्तरी गोलार्द्ध में दक्षिणावर्त दिशा में और दक्षिणी गोलार्द्ध में वामावर्त दिशा में घूमता है।[15](दूसरी ओर एक प्रतिचक्रवात, उत्तरी गोलार्द्ध में दक्षिणावर्त दिशा में और दक्षिणी गोलार्द्ध में वामावर्त दिशा में घूमता है)

बनावट[संपादित करें]

आरंभिक अत्तिरिक्त उषण कटिबंधीयकम दबाव क्षेत्र छवि पर लाल बिंदु के स्थान पर बनता है। चक्रवाती अंश के प्रारंभिक चरण के दौरान उपग्रह पर आमतौर पर लम्बवत (एक सही कोण पर) पत्ते की तरह बादल गठन देखा जाता है। ऊपरी स्तर की जेट धाराकी धुरी का स्थान हल्के नीले रंग में है।

सैक्लोजेनेसिस, वायुमंडल में विकसित चक्रवातीय संचलन (एक कम दबाव क्षेत्र) के मजबूत होने से बनता है।[9] सैक्लोजेनेसिस, कई विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए एक छतरीनुमा पद है, जिनके परिणाम से चक्रवात का विकास हो सकता है। यह विभिन्न पैमाने पर हो सकता है। सूक्षम पैमाने से ले कर संक्षिप्त पैमाने तक .अत्तिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवात ठंडे सत चक्रवातों के रूप में परिवर्तित होने से पहले मौसम के अग्रांत में तरंगों के रूप में विकसित होते है। उष्णकटिबंधीय चक्रवातों अव्यक्त गर्मी महत्वपूर्ण आंधी गतिविधि से संचालित होने के कारण हैं और गर्म मूल की होती है।[10] मेसोसै्क्लोन्स भूमि पर स्थित गर्म[10] चक्रवातों के कारण बनते है और तूफान के गठन का कारण भी बना सकते हैं।[11] जलस्तंभ मैसोसैक्लोंस से भी बन सकते है, पर वे अक्सर उच्च अस्थिरता और कम ऊर्ध्वाधर हवा कतरनी के वातावरण से विकसित होते है।[12] सैक्लोजेनिसिस सैक्लोसिस के विपरीत है, इसमें एक विपरीत चक्रवातीय अनुरूप (उच्च दबाव प्रणाली) होता है जो उच्च दबाव क्षेत्र का गठन करता है -जिसे एनटीसैक्लोजेनेसिस कहा जता है।[16]

सतह निम्न बनने के अनेक तरीके है। तलरूप, पूर्व में स्थित उत्तर-दक्षिण पहाड़ पर स्थित कम दबाव वाले सतह को कम-स्तर परन्तु अधिक दबाव वाली प्रणाली बनने पर मजबूर कर सकते हैं।[17] मेसोस्केल की जो भी समबंधित प्रणालियाँ है वे गर्म कोर को निम्न सतह बनने का कारण भी बन सकते हैं।[18] यह उथल-पुथल आगे को एक लहर की तरह बन जाता है और शिखर पर निम्न बना रहता है। पारिभाशिक रूप में यह निम्न चक्रवात ही बनेगा .यह घूर्णी प्रवाह अपनी अनुगामी के माध्यम से कम ध्रुवीय हवा को ठंडे अग्रांत से भूमध्य रेखीय वृत्त में और पश्चिमी गर्म हवा को निचले ध्रुवीय वृत्त से गर्म अग्रांत में धक्का देता है। आमतौर पर ठंडा फ्रंट, गरम फ्रंट की तुलना में तेज गति से चलता है और उच्च घनत्व वाली हवाराशी जो चक्रवात से आगे हैं, के साथ मिल जाती है और उच्च घनत्व वाली हवाराशी जो चक्रवात के पीछे है वह एक व्यापक गर्म क्षेत्र को उत्पन्न करती है।[19] इस समय एक बंद राशि बन जाती है जो गर्म हवा को ऊपर धकेलते हुए एक गर्म गर्त बनाता है जिसे त्रोवल कहते है।[20]

उष्णकटिबंधीय चक्रवात बनते है जब ऊपर उठती हवा में नमी के संक्षेपण द्वारा छोड़ी गई उर्जा गर्म समुद्र जल के ऊपर एक सकारात्मक प्रतिक्रिया पाश का कारण बनती है।

उष्णकटिबंधीय सैक्लोगेनेसिस एक तकनीकी शब्द है जो वातावरण में स्थित एक उष्णकटिबंधीय तूफान को विकसित करने और मजबूत करने के लिए प्रयुक्त होता है।[21] वह प्रक्रिया जिसके जरिए उष्णकटिबंधीय सैक्लोजेनेसिस घटित होता है, वह मध्य अक्षांश सैक्लोजेनेसिस घटने से अलग होता हैं। उष्णकटिबंधीय चक्रवाती अंश, एक गरम-सत चक्रवात को विकसित करने में सहायक होता है जो अनुकूल महत्वपूर्ण वातावरण के कारण बनता है। उष्णकटिबंधीय सेक्लोगेनेसिस की छह मुख्य आवश्यकताएँ हैं : पर्याप्त गर्म समुद्री सतह का तापमान, वायुमंडलीय अस्थिरता, निम्न से मध्य स्तर वाले त्रोपोस्फियर में उच्च आर्द्रता, आवश्यक कोरिओलिस बल, एक पूर्व अस्तित्व प्राप्त निम्न स्तर या उथल पुथल और कम ऊर्ध्वाधर कतरती हवा .[22] विश्वभर में सलाना, उष्णकटी बंधीय तूफानों में से औसतन 86 उष्णकटिबंधीय तूफानों में बदल जाते है। इन में से 47 तूफान / ताकतवर आंधी बन जाते हैं और 20 गहन उष्णकटिबंधीय चक्रवात बनते है। [39](साफिर-सिम्पसन इकाई पर ये तीसरी श्रेणी के मापे जाते हैं)[23]

मेसोसाईंक्लोनेस तब बनते है, जब हवा की गति तीव्र हो बदलाव और/या ऊँची के साथ दिशा ('हवा कतरनी') निर्देश होकर वातावरण के निचले भाग में नाली रुपी गोले में घूमते हुए एक अंश स्थापित करते हैं। एक तूफान की संवहनी उप्ड्राफ्ट इस कतरनी हवा को एक गोलाकार अभिविन्यास को ऊपर से एक किनारे से उठाता है (धरती के समांनानतर और सतह से लम्बवत) जिसके कारण सारा का सारा उपद्रफ्त एक ऊर्ध्वाधर स्तम्भ के रूप में घूमता है। मेसोसाईंक्लोनेस सामान्य रूप से अपेक्षाकृत स्थानीयकृत हैं: वे संक्षिप्त पैमाने (सैकड़ों किलोमीटर) और सू्क्ष्म पैमाने (सैकडों मीटर) के बीच स्थित होते है। रडार इमेजरी इन सुविधाओं को पहचानने के लिए प्रयोग किया जाता है।[24] तूफान का केंद्र आमतौर पर शांत होता है और एक जगह पर स्थित होता है।

प्रकार[संपादित करें]

चक्रवातों के छह मुख्य प्रकार हैं: ध्रुवीय चक्रवात, ध्रुवीय कम, अत्तिरिक्त उष्ण कटिबंधीय चक्रवात, अंत:उष्ण कटिबंधीय चक्रवात, उष्णकटिबंधीय चक्रवात और मेसोसाईंक्लोनेस .

ध्रुवीय चक्रवात[संपादित करें]

एक ध्रुवीय, उपध्रुवीय, या आर्कटिक चक्रवात (जो ध्रुवीय भंवर भी कहलाता है)[25] एक कम दबाव वाला विस्तृत क्षेत्र है, जो सर्दियों में मजबूत है और गर्मियों में कमजोर पड़ जाता है।[26] एक ध्रुवीय चक्रवात एक कम दबाव वाली मौसम प्रणाली है जो 1,000 किलोमीटर (620 मील)[44]2,000 किलोमीटर (1,200 मील)[45]फैलता है, इसमें हवा उत्तरी गोलार्थ में उत्तरावर्त दिशा में और दक्षिणी गोलार्द्ध में एक दक्षिणावर्त दिशा में घूमती है। उत्तरी गोलार्द्ध में, ध्रुवीय चक्रवात में औसतन दो केन्द्र होते है। एक केन्द्र बफ्फिन द्वीप में और दूसरी उत्तर पूर्व साइबेरिया के निकट होती है।[25] दक्षिणी गोलार्द्ध में, यह 160 पश्चिम देशांतर के पास रोस आइस शेल्फ के किनारे स्थित हो जाता है।[27] जब ध्रुवीय भंवर शक्तिशाली होता है तो इसका प्रवाह पृथ्वी की सतह की ओर बढ़ जाता है। जब ध्रुवीय चक्रवात कमजोर होते हैं, तो महत्वपूर्ण शीत प्रकोप बढ़ने लगते हैं।

ध्रुवीय कम[संपादित करें]

एक ध्रुवीय कम छोटे पैमाने पर, कम समय तक जीवित कम दबाव प्रणाली है जो दोनों उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध के मुख्य ध्रुवीय अग्रांत के सामने महासागर क्षेत्रों पर पायी जाती है। यह प्रणाली आमतौर पर समानान्तर पैमाने पर कम दिखाई देती है और एक दो दिन से ज्यादा जीवित नहीं रह सकती है। वे बड़े वर्ग के मेसोस्केल मौसम प्रणाली का हिस्सा है। पारंपरिक मौसम रिपोर्ट से ध्रुवीय कम का पता लगाना कठिन है और उच्च अक्षांश प्रक्रियाओं, जैसे जहाजरानी, गैस और तेल प्लेटफार्मों के लिए एक खतरा हैं। ध्रुवीय कम का उल्लेख अन्य शब्दों से भी किया जाता है, जैसे कि ध्रुवीय मेसोस्कल भंवर, आर्कटिक तूफ़ान, आर्कटिक कम और ठंड हवा का दबाव .आमतौर पर यह शब्द अधिक जोरदार प्रणालियों के लिए आरक्षित किया गया है जहा कम से कम 17 मीटर की निकट-सतह की हवाएं है।1

आतिरिक्त ऊष्ण कटिबंधीय चक्रवात[संपादित करें]

एक आतिरिक्त उषण कटिबंधीय चक्रवात का काल्पनिक संक्षिप्त चार्ट ब्रिटेन और आयरलैंड को प्रभावित कर रहा हैसम भार परमाणु के बीच नीले तीर हवा की दिशा का संकेत करते है जबकि "" एल "" प्रतीक "कम" के मध्य बिन्दु का संकेत करता है। अवरोधित, ठंडे और गर्म ललाट सीमाओं पर ध्यान दे

एक अत्तिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवात एक संक्षिप्त पैमाने पर कम दबाव वाली मौसम प्रणाली है जिनके न तो उष्णकटिबंधीय और न ही कोई ध्रुवीय विशेषताएँ हैं, जो तापमान और हिम बिंदु में अग्रांत और समानान्तर ढाल में जुडी हुई होती है, इसे वैसे "बरोक्लिनिक क्षेत्र " कहा जाता है।

'अत्तिरिक्त उष्णकटिबंधीय' शब्द इस तथ्य का निरूपण करते है कि इस प्रकार के चक्रवात ग्रह के कटिबंधों के बाहर, मध्य अक्षांशों के बीच होते हैं। इन प्रणालियों में उनके क्षेत्रीय गठन या उत्तर उष्णकटीबंधीय चक्रवात के कारण 'मध्य अक्षांश चक्रवात' के रूप में सूचित किया जाता है, जहाँ अत्तिरिक्त उष्णकटिबंधीय संक्रमण होता है[28][29] और अक्सर मौसम का पूर्व अनुमान लगाने वालों और आम जनता के द्वारा 'कम' या 'कम दबाव' वर्णित होता हैं। ये हर रोज़ की घटनाएं हैं, जो विरोधी चक्रवातों के साथ, धरती के अधिकतर हिस्से के मौसम को बनाती हैं।

हालांकि अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को लगभग हमेशा बरोक्लिनिक कहा जाता है, क्योंकि ये पश्चिमी हवा के तापमान और हिमबिंदु ढार के क्षेत्रों के साथ रहते है और कभी कभी ये बरोत्रोपिक भी बन जाता है जब चक्रवात के पास का तापमान वितरण त्रिज्या के साथ एक समान हो जाता है।[30] एक अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवात एक उपकटीबंधीय तूफान में और वहाँ से एक अन्तः उष्णकटिबंधीय चक्रवात में परिणत हो जाता है अगर यह गर्म पानी के ऊपर रहता है और जो अपनी मूल गरमी को केंद्रीय संवहन में विकसित करता है।[10]

अन्त: ऊष्ण कटिबंधीय[संपादित करें]

2007 में Subtropical तूफान Andrea

एक अंत: उष्णकटीबंधीय चक्रवात एक मौसम प्रणाली है जिसके कुछ लक्षण उष्णकटिबंधीय चक्रवात और कुछ अतिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवात के होते हैं। ये भूमध्य रेखा और 50 वें समानांतर के बीच बन सकते हैं।[31] 1950 के दशक से ही अन्तारिक्ष विज्ञान शास्त्रियों को यह समझ में नहीं आ रहा था कि इसे वे उष्णकटिबंधीय चक्रवात कहें या अधिक उष्ण कटिबंधीय चक्रवात कहें . इसीलिए इन्हें वे उष्णकटिबंधीय समान और अर्द्ध उष्णकटिबंधीय कहते थे जो संकर चक्रवात भी कहे जाते थे[32] 1972 तक में राष्ट्रीय हरीकेन केंद्र ने इसे सरकारी तौर पर इस चक्रवात वर्ग को मान्यता दी। [33] अन्तः उष्ण कटिबंधीय चक्रवातों को 2002 से अटलांटिक बेसिन से सरकारी उष्णकटिबंधीय चक्रवात सूची से नाम प्राप्त होने लगे। [31] उनके पास व्यापक हवा प्रतिमान है, जो अधिकतम हवा को थाम सकता है जो उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के मुकाबले केंद्र से दूर स्थित होते है और जो कमजोर से लेकर मध्य स्तर तक के तापमान तक पाया जाता है।[31]

क्योंकि ये अधिक कटिबंधों वाले चक्रवातों से बनते हैं, जिनका तापमान अन्य कटी बंधों से ठंडा होता है, उनके गठन के लिए प्रयुक्त समुद्र के सतह का तापमान उष्णकटिबंधीय चक्रवात दहलीज की तुलना में तीन डिग्री सेल्सियस, या पाँच डिग्री फेरनहाइट से कम होता है जो, 23 डिग्री सेल्सियस के आसपास होता हैं।[34] इससे यह पता चलता है कि अन्तः उष्ण कटिबंधीय चक्रवात परंपरागत सीमा के बाहर तूफानी मौसम में बनते हैं। यद्यपि अंत:उष्णकटिबंधीय तूफानों में कभी-कभार ही तूफानी हवाओं का दबाव होता है, वे प्रकृतित: उष्णकटिबंधीय हो सकते है यदि उनके सत्व गर्म हो जाएँ तो .[35]

उष्णकटिबंधीय[संपादित करें]

चक्रवात Catarina, एक दुर्लभ दक्षिण अटलांटिक उष्णकटिबंधीय चक्रवात जिसे मार्च 262004 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की और से देखा गया .

एक उष्णकटिबंधीय चक्रवात एक तूफानी प्रणाली है, जो एक कम दबाव केंद्र है और गरजदार तूफ़ान, तेज हवाएं और ज्यादा वर्षा देता है। एक उष्णकटिबंधीय चक्रवात, तब बनता है जब नम हवा से गर्मी निकलती है, जिसके परिणामस्वरूप नम हवा में निहित बाष्प जारी हो जाता है। ये अलग गर्मी घटकों द्वारा बनती है और अन्य चक्रवातीय तूफानो, जैसे नोर'ईस्तेर्स, यूरोपीय आंधिया, ध्रुवीय कम, तूफानी प्रणालिया कहलाती है।

यह शब्द 'उष्णकटिबंधीय' दोनों भूगोलिक रूपों को सूचित करता है, जो अनन्य रूप से ग्लोब के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाये जाते है और समुद्री हवा, उष्णकटिबंधीय हवा समूहों में बनती है।'चक्रवात' शब्द प्रकृति से तूफानी चक्रवात को सूचित करता है, जो उत्तरी गोलार्द्ध में उत्तरावरत और दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिणावर्त घूमते है। स्थान और शक्ति के आधार पर उष्णकटिबंधीय चक्रवातो को अन्य नामों से भी जाना जाता है, जैसे तूफान, आँधी, उष्णकटिबंधीय तूफान, चक्रवाती तूफ़ान, उष्णकटिबंधीय दबाव, या केवल चक्रवात.}सामान्यतया, एक उष्णकटिबंधीय चक्रवात को अटलांटिक बेसिन और प्रशांत महासागर में तूफान (एक प्राचीन सेंट्रल अमेरिकन हवा के देवता, हुराकां, के नाम पर) कहा जाता है।[36]

हालांकि उष्णकटिबंधीय चक्रवात अत्यंत शक्तिशाली हवाओं और मूसलधार बारिश का उत्पादन कर सकते हैं, वे उच्च तरंगों और विनाशकारी तूफान का उत्पादन करने में भी सक्षम हैं।[37] वे गर्म पानी के बड़े निकायों पर विकसित होती है[38] और जमीन के उप्पर हिलने से उनकी ताकत कम हो जाटी है।[39] इसी कारण उष्णकटिबंधीय तूफान से तटीय क्षेत्रों को काफी नुकसान हो सकता है, जबकि अंतर्देशीय क्षेत्र इनसे अपेक्षाकृत सुरक्षित रहते हैं। भारी वर्षा तथापि, अंतर्देशीय क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न करते हैं और तूफ़ानी तरंगे समुद्र तट के ऊपर व्यापक तटीय बाढ़ की स्थिति पैदा करते हैं। यद्यपि मानव आबादी पर उनके प्रभाव विनाशकारी हो सकते है, उष्णकटिबंधीय चक्रवात सूखे की स्थिति से राहत दिला सकते है।[40] वे कटिबंधों से गर्मी और ऊर्जा को उठाकर शीतोष्ण अक्षांश की ओर ले जाता है, जिसके कारण ये वैश्विक वातावरण परिसंचरण तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाते है। परिणामस्वरूप, उष्णकटिबंधीय चक्रवात दुनिया भर में तापमान को अपेक्षाकृत स्थिर और गर्म बनाए रखने के लिए, पृथ्वी के शोभमंडल में संतुलन बनाए रखने में मदद आते है।

कई उष्णकटिबंधीय चक्रवात उस समय विकसित होते हैं जब वातावरण में एक कमजोर उथल-पुथल के साथ वातावरण की स्थिति अनुकूल होती है। दूसरे तब बनते हैं जब अन्य प्रकार के चक्रवात उष्णकटिबंधीय विशेषताओं को प्राप्त कर लेते हैं। उष्णकटिबंधीय प्रणालियाँ तब बहती हवाओं के साथ शोभमंडल में चली जाती है ; यदि स्थिति अनुकूल हो तो, उष्णकटिबंध अशांत हो जाता है और फिर वहां एक केंद्र विकसित हो जाता है। वर्णक्रम के दूसरे छोर पर, अगर प्रणाली के आस पास की स्थितियां बिगड़ जाती हैं या उष्णकटिबंधीय चक्रवात भूम बिछल बनते हैं, तो प्रणाली कमज़ोर हो जाती है और अंततः नष्ट हो जाती है। एक उष्णकटिबंधीय चक्रवात अत्तिरिक्त उष्णकटिबंधीय चक्रवात तब बन जाता है जब वह उच्च अक्षांश की ओर बढता है अगर इसकी उर्जा का मूल संक्षेपण द्वारा जारी की गई हो तो वह गर्मी से बदल कर हवा राशीयों के बीच वातावरण में बदल जाता है;[10] एक क्रियाशील दृष्टि से कहा जा सकता है कि, एक उष्णकटिबंधीय चक्रवात अपने अतिरिक्त संक्रमण के दौरान अंत: उष्णकटिबंधीय नहीं बनता .[41]

मेसोस्कैल[संपादित करें]

एक mesocycloneGreensburg, Kansas जलव्रज की और से Dopplerमौसम रडार पर दिखाया गया।

मेसोसायक्लोन हवा का एक भंवर है, जो लगभग2 किलोमीटर (1.2 मील)[86]10 किलोमीटर (6.2 मील)[87] बंद तूफ़ान के व्यास में (मौसम विज्ञान का मेसोस्कैल), में निहित होता है।[42] हवा उठती है और एक ही ऊर्ध्वाधर धुरी, एक ही दिशा में घूमती है जैसे किसी भी गोलार्द्ध में कम दबाव वाली प्रणाली में घूमती है। वे अक्सर तूफानी होती हैं, अर्थात ये एक स्थानीयकृत कम दबाव के क्षेत्र से जुड़े होते हैं। [43] इस तरह के तूफानो से सतह पर प्रचंड हवाएं चलती हैं और ओले पड़ते हैं। मेंसोसैक्लोनेस अक्सर एक साथ उच्च कोशिका में उपद्रफ्ट्स के साथ पाए जाते हैं, जहाँ वे अंधड़ बन सकते हैं। हर वर्ष लगभग 1700 मेसोसैक्लोनेस संयुक्त राज्य अमेरिका में बनते हैं, लेकिन उनमें से केवल आधे भयंकर तूफ़ान बनते हैं।[11]

अतिरिक्त स्थलीय चक्रवात[संपादित करें]

Hubble स्पेस टेलीस्कोप के द्वारा मंगल ग्रह पर चक्रवात आकृतिक होते है

चक्रवात पृथ्वी के लिए निराले नहीं हैं।वरुण ग्रह पर छोटे अंधेरे बिन्दु की तरह चक्रवाती तूफान उल्लासपूर्ण ग्रहों पर आम हैं। यह जादूगर की आँख के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि यह ग्रेट डार्क स्पॉट के व्यास से एक तिहाई है। इसने 'जादूगर की आँख' का नाम पाया क्योंकि यह एक आंख की तरह लगता है। यह उपस्थिति जादूगरों की आँख के बीच में एक सफेद बादल के कारण होता है।[8] मंगल ने भी तूफानी हवाओं का प्रदर्शन किया है।[7] उल्लासपूर्ण तूफानों, जैसे ग्रेट रेड स्पॉट आमतौर पर गलती से विशाल तूफानों और चक्रवातीय तूफानो के रूप में जाने जाते हैं। बहरहाल, यह गलत है, क्योंकि वास्तव में यह ग्रेट रेड स्पॉट एक प्रतिचक्रवात व्युत्क्रम घटना है।[44]

सन्दर्भ[संपादित करें]

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इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

  • चक्रवात - वायु दाब का खेल
  • फंडामेंटल्स ऑफ फिजिकल जियोग्राफी : दी मिड - लाटीत्युड साइक्लोन - डॉ॰ मिशेल पिडविर्नी, ब्रिटिश कोलंबिया, ओकानगन विश्वविद्यालय
  • ग्लोसरी डेफिनिशन सैक्लोजेनेसिस - दी नेशनल स्नो एंड आइस डेटा सेंटर
  • ग्लोसरी डेफिनिशन : साइक्लोसिस - दी नेशनल स्नो एंड आइस डेटा सेंटर
  • वेदर फैक्ट्स - दी पोलर लो वेदर ऑनलाइन यू॰के॰
  • एन ओ ए ए
  • साइक्लोनेस 'क्लीअरली एक्स्प्लैन्ड [मृत कड़ियाँ]
  • दी एम -डाट इंटरनेशनल डिसास्टर डेटाबेस बय दी सेंटर ओंन दी एपिदेमोलोजी ऑफ दिसास्तार्स