चक्की
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एक टेबलटॉप हथौड़ा चक्की |
चक्की (अंग्रेज़ी: Mill, मिल) एक ऐसा उपकरण या संरचना है, जो ठोस पदार्थों को पीसकर, कुचलकर या काटकर छोटे टुकड़ों में तोड़ती है। अक्सर यह कोई मशीन, बनावट या घरेलू उपकरण (जैसे आटा चक्की) होती है। कई प्रक्रियाओं में यह विखंडन (टुकड़ों में बाँटना) एक महत्वपूर्ण कार्य होता है। चक्कियाँ कई प्रकार की होती हैं और इनमें अनेक तरह के पदार्थ पिसे जाते हैं।
ऐतिहासिक रूप से, चक्कियाँ हाथ से (जैसे, हैंडल घुमाकर), जानवरों (जैसे, बैलों द्वारा खींची जाने वाली चक्की), हवा (पवनचक्की) या पानी (पनचक्की) की शक्ति से चलाई जाती थीं। आधुनिक युग में, ये आमतौर पर बिजली से संचालित होती हैं।
ठोस पदार्थों का पीसना यांत्रिक बलों द्वारा होता है, जो पदार्थ के भीतरी बंधन बलों को तोड़कर उसकी संरचना को विखंडित कर देते हैं। पीसने के बाद ठोस पदार्थ की अवस्था बदल जाती है: उसके कणों का आकार, कणों का वितरण और कणों की आकृति परिवर्तित हो जाती है।[1]
अभियांत्रिकी में पिसाई के उद्देश्य:
पिसाई (मिलिंग) से तात्पर्य कणिक पदार्थों (जैसे खनिज अयस्क) को तोड़ने, अलग करने, आकार देने या वर्गीकृत करने की प्रक्रिया से भी है। उदाहरण के लिए:
- निर्माण कार्यों हेतु एकसमान आकार की गिट्टी प्राप्त करने के लिए चट्टानों को कुचलना या पीसना,
- संरचनात्मक भराव या भू-सुधार गतिविधियों हेतु चट्टान, मिट्टी या कणिक पदार्थों को अलग करना। कणिक पदार्थों की पिसाई प्रक्रियाओं का उपयोग अशुद्धियों या नमी को हटाने/अलग करने तथा परिवहन या संरचनात्मक भराव से पूर्व "शुष्क भराव" तैयार करने के लिए भी किया जाता है।
अभियांत्रिकी में पिसाई के प्रमुख उद्देश्य:
१. किसी ठोस का पृष्ठ क्षेत्रफल बढ़ाना।
२. वांछित कण आकार वाला ठोस पदार्थ निर्मित करना।
३. संसाधनों को घोल (पल्प) में परिवर्तित करना।
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Thomas, A; Filippov, L.O. (1999). "Fractures, fractals and breakage energy of mineral particles". International Journal of Mineral Processing. 57 (4): 285. बिबकोड:1999IJMP...57..285T. डीओआई:10.1016/S0301-7516(99)00029-0.