चक़

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
चक
Chak
چک
गाँव
चक
जामा मस्जिद चक दक्षिण साइट से खींचे हुए फोटो का दृश्य
जामा मस्जिद चक दक्षिण साइट से खींचे हुए फोटो का दृश्य
चक की उत्तर प्रदेश के मानचित्र पर अवस्थिति
चक
चक
मानचित्र पर चक की अवस्थिति
चक की भारत के मानचित्र पर अवस्थिति
चक
चक
चक (भारत)
चक की एशिया के मानचित्र पर अवस्थिति
चक
चक
चक (एशिया)
निर्देशांक: 27°28′50″N 81°28′30″E / 27.48056°N 81.47500°E / 27.48056; 81.47500
देशFlag of India.svg भारत
राज्यउत्तर प्रदेश
जिलाबहराइच
ब्लाॅकतजवापुर
ग्राम पंचायतरामगढ़ी
डाकघरमैला सरैयां
संस्थापकचंदा अंसारी
शासन
 • प्रणालीलोकतांत्रिक
 • ग्राम प्रधानश्रीमती बानों पत्नी (मुनीर अहमद अंसारी) (निर्दलीय)
 • सांसद MPसावित्री बाई फूले
 • विधायक MLAसुरेश्वर सिंह
 • समाजिक कार्यकर्तामौलाना मुहम्मद सईद साहब क़ासमी
 • समाजिक कार्यकर्ताशेहरे आलम अंसारी
जनसंख्या 990
भाषा
 • अधिकारिकहिंदी
 • बोलचाल की भाषाहिंदी उर्दू अवधी
 • लिखने पढ़ने की भाषाहिंदी उर्दू अंग्रेज़ी और अरबी
चक गाँव के महान लोग
 • अंसारीपहलवान अंंसारी
 • राईनीमुहम्मद अमीन राईनी
समय मण्डलभारतीय मानक समय (यूटीसी+5:30)
पिनकोड271902
टेलिफ़ोन कोड05255
गाड़ियांयूपी-40

चक (अंग्रेज़ी Chak) (उर्दू چک) एक गाँव है जो भारत देश के राज्य उत्तर प्रदेश के जिला बहराइच में पड़ता है। यह गांव महसी तहसील के अन्तर्गत आता है तजवापुर इस गांव का ब्लाक है और थाना बौंडी है। रामगढ़ी इस गांव की ग्राम पंचायत है। इस गाँव से 2 किलोमीटर की दूरी पर खैरा बाज़ार पड़ता है। वहीं से चक गाँव के लोग साग, सब्ज़ी, आटा, और दाल, तेल, चावल आदि। चीजें खरीद कर लाते हैं। चक गाँव के पूरब दिशा में एक बड़ी बाजार फखरपुर और दक्षिण दिशा में जैतापुर बाजार है।

नाम की उत्पत्ति[संपादित करें]

चक नाम की उत्पत्ति अवधी भाषा से हुई है उत्तर प्रदेश में खेतों को चक भी कहते हैं। कुछ पुराने लोगों से सुना गया है कि चक गाँव की जगह पर पहले एक घना जंगल था। उसी जंंगल के पास ही कुछ मुस्लिम रहते थे जैसे भागू अंसारी और उनके लड़के सलाबत अंसारी और एक ठाकुर साहब का घर था। लेकिन उस गाँव का कोई नाम नहीं था। जब उस गांव में चंदा अंसारी और उनके भाई करिया अंसारी आए जो लखनऊ जिला के काकोरी, गाँव से आये हुए थे। तो वह ठाकुर साहब बोले की चंदा भाई आप मेरे इस चक (खेत) में अपना घर बना लो चंदा अंसारी ने उसी चक में घर बना लिया तभी से उस गाँव का नाम चक पड़ गया।

इतिहास[संपादित करें]

इस गाँव का इतिहास चंदा अंसारी से पहले का ज्यादा जानकारी नहीं है। चंदा अंसारी के 6 लड़के थे। चंदा अंसारी के पोतों के नाम हफीजुर्रहमान अंसारी जमीलुर्रहमान अंसारी और हबीबुर्रहमान अंसारी थे। जो चंदा अंसारी के सबसे बड़े लड़के पहलवान अंसारी के थे इस वक्त गाँव में चंदा अंसारी के पोतों के पोते हैं।

काम-धंधा[संपादित करें]

इस गांव के लोग मुख्य रूप से किसान हैं। कृषि का कार्य करते हैं। खेतीबाड़ी और कुछ लोग गाँँव से बाहर दिल्ली, मुम्बई, लखनऊ, बंगलौर, हैदराबाद, पुणे, चण्डीगढ़, और भी भारत के कई शहरों में काम करते हैं। और कुछ लोग भारत गणतन्त्र से बाहर सउदी अरब, कुवैत, दुबई, क़तर, ओमान, मे नौकरी करते हैं।

कृषि[संपादित करें]

  • मुख्य फसलें

गन्ना, धान, गेहूं और मकई, ज्वार, जई, और बजड़ी है। और भी कई तरह की फसलें उगाई जाती हैं जैसे तिलहन (सरसों) उरद  दाल अरहर दाल मूंग दाल बक्कल और चना उगाते हैं।

  • सब्ज़ियाँ

आलू, कद्दू, लौकी, पालक, मटर, भिंडी, तोरई, गाजर, मूली, शलजम, फूल गोभी, पत्ता गोभी, टमाटर, परवल, कुंदरू, चिचिड़ा, अरवी, बैंगन, करेला, कटहल खीरा, और ककड़ी उगाते हैं।

आम अमरूद, पपीता, शरीफा, केला, जामुन, गूलर, बड़हल, बेर, शहतूत, महुआ, अमबार, आमला, करौंदा और इमली के पेेड़ लगाते हैं।

  • मसाले

हल्दी, धनिया, मिर्च, लहसुन, प्याज, अदरक, सौंफ, जीरा, कलौंजी, अजवायन, और मेथी उगाते हैं।

  • साग

पालक, चौलाई, मरसा, बथुआ, करमुआ, सोया, और मेथी उगाते हैं। यहां का मुख्य साग सरसों, लाही, लाहा, और राई (सरसों) का है।

सिंचाई के साधन[संपादित करें]

इस गाँव के पश्चिमदिशा में एक नहर है ज्यादा तर लोग इसी नहेर से सिंचाई करते हैं और कुछ लोग इस गांव के चारों तरफ तालाब हैं उस से सिंचाई करते हैं। और किसी - किसी के खेतों में बोरिंग है वह लोग उस से सिंचाई करते हैं

पेेड़ पौधे[संपादित करें]

पेड़ों में सबसे यहां पर सबसे अधिक पोपलर और यूकेलिप्टस के पेड़ लगाये जाते हैं और भी बहुत से वृक्ष होते हैं जैसे बबूल (कीकर) शीशम सेमल, नीम महुुआ सागौन, लसोर, नहसूत, शहतूत कटगूल्लर, सिहोर, पकड़िया, पीपल बेर बेल, कन्डैल, अढ़वल शहीजन कदम, रबर प्लान्ट शीबबूल, बांस, गुलमोहर और बकैना, के पेड़ होते हैं।



पालतूपशु[संपादित करें]

पालतू पशुओं में गाय, भैंस, बकरी, बतख, मुर्गी, और बहुत से कुक्कुट पालन,(मुर्गी फार्म) मत्स्य पालन, (मछली पालन) भी हैं जानवरों की दवा के लिए यहां से 1.5 किलोमीटर नगदिलपुर चंगिया ग्राम में एक पशु अस्पताल हैं

चिकित्सा के साधन[संपादित करें]

चिकित्सा के क्षेत्र में यहां पर कोई भी अस्पताल (चिकित्सालय) गाँव से 2 किलोमीटर की दूरी पर सरकारी प्राथमिक स्वास्थ सेवा केन्द्र खैरा बाज़ार में है। लोग वहां से दवा लेेकर आते हैं और चक गाँव से 22 किलोमीटर की दूरी पर बहराइच शहर हैै। वहां पर जिला अस्पताल हैै वहां से औषधियां लेते हैं बहराइच शहर में और भी कई बड़े -बड़े प्रााइवेट हॉस्पिटल हैं। गाांववासी वहीं से दवाइयां लेते हैं। वह

कैसे पहूंचें[संपादित करें]

आप अगर यहां हवाई जहाज से जा रहे हैं तो यहां का नजदीकी एयरपोर्ट (हवाई अड्डा) यहां से 110 किलोमीटर लखनऊ में अमौसी अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र है आप वहाँ से जा सकते हैं और रेलगाड़ी से जा रहे हैं तो यहां से 22 किलोमीटर की दूरी पर बहराइच रेलवे स्टेशन और 45 किलोमिटर नजदीकी रेलवे स्टेशन जरवल रोड है। आप सड़क द्वारा जा रहे हैं तो लखनऊ बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग से मरौचा मोड़ उतर कर टैक्सी पकड़ कर भोला बगिया उतर कर चक गाँव जा सकते हैं।

भूगोल[संपादित करें]

निर्देशांक 27°28′50″N 81°28′30″E / 27.48056°N 81.47500°E / 27.48056; 81.47500

रहन-शहन[संपादित करें]

इस गांव के पुरुष लोग कुर्ता पैजामा, सलवार कमीज़, लुंगी और कुछ लोग पैंट शर्ट और टी-शर्ट पहनते हैं। और औरतें सलवार सूट पंजाबी सूट और साड़ी बुर्क़ा पहनती हैं।

भाषा[संपादित करें]

आधिकारिक भाषा हिन्दी है

बोलचाल की भाषा अवधी, उर्दू, और हिंदी हैै।

जनसांख्यिकी[संपादित करें]

शिक्षा[संपादित करें]

शिक्षा के क्षेत्र में उस गाँव के अंदर एक अरबी मदरसा मदरसा इस्लामिया अरबिया अनवारुल उलूम चक और एक हिंदी स्कूल प्राथमिक विद्यालय चक है।

गाँव के उत्तर पूर्व में स्थित प्राथमिक विद्यालय चक

खेल[संपादित करें]

इस गाँव में बहुत सारे खेल खेले जाते हैं। क्रिकेट और कबड्डी मुुख्य खेल हैं। और भी कई खेल खेलते हैं। जैसे कि कैरम, शतरंज, खोखो, सुरबुघी (16 बीड्स) गिल्ली डंडा कँचे फुटबॉल, तैराकी, कुश्ती और पतंग उड़ाना शामिल है।

इबादत गाहें[संपादित करें]

चक गाँव के बीच में कुआं के पास स्थित (जामा मस्जिद चक)

इबादत गाहों में एक मस्जिद (जामा मस्जिद चक) है जहां पर पाँच समय की नमाज़ पढ़ी जाती है। और गांव से पश्चिम की तरफ 500 मीटर की दूरी पर एक तारापुर गांव है वहां पर गाँव का ईदगाह है जहां पर लोग ईद (ईद उल-फ़ित्र) बकरीद (ईद-उल-अज़हा) और नमाज़ ए-जनाज़ा पढ़ते हैं। ईदगाह के पास ही कब्रिस्तान भी है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]