घोरपडे राजवंश

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घोरपडे उपनाम शिवाजी के समय से अधिक प्रसिद्ध हुआ है। शिवाजी के पिता शाहजी एक महान योद्धा थे। बीजापुर के आदिलशाह के आदेश पर उन्हें मुस्तफा खान, अफजल खान और बाजी घोरपड़े ने धोखे से कैद कर लिया। शिवाजी ने शाहजहां से परदे के पीछे संपर्क किया और अपने पिता को मुक्त करा लिया। लेकिन, शाहजी अपने अपमान को भूले नहीं। बाजी घोरपड़े के बारे में उन्होंने अपने बेटे शिवाजी को लिखा: ‘मेरे बेटे, वह बाजी घृणित तुर्कों की साजिश में शामिल हो गया और उसने मुझे धोखा दिया। तुम उससे बदला जरूर लेना।’ शिवाजी ने अक्टूबर, 1664 में एक खुली लड़ाई में बाजी घोरपड़े को मार डाला था।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]