ग्रेफाइट

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ग्रेफाइट कार्बन का शुद्धतम एवं स्थाई अतृप्त है इसकी संनरखना षट्फलकीय इसमें कार्बन प्रमाण कार्बन के तीन अन्य प़ प्रसानू के आवंधित होते हैं जिसे सेट कोनी अंजल की परते बनते हैं इनमें से एक आनंद दिवाबंदी होता है जिससे कार्बन की रायो जगह पूर्ण होती है यह शर्ट कोनिया प्राप्त एक दूसरे आकर्षण बल कमजोर होता है यह विकल एवं फिसलन फील होता है

       ग्रेफाइट में कार्बन परवानों केवल तीन अन्य कार्बन परमाणु में आवंटित होते हैं चीता संग लोग में इलेक्ट्रॉन संत्र ही रह जाता है एक कार्बन परमाणु से दूसरे कार्बन परमाणु तक घूम रुकता है इसलिए सुचालक होता है

नामकरण[संपादित करें]

ग्रेफाइट शब्द ग्रीक शब्द ग्रेफो से लिया गया है जिसका अर्थ है मैं लिखता हूँ अर्थात् इसके द्वारा कागज पर निशान बनाया जा सकता है।

रासायनिक संरचना[संपादित करें]

ग्रैफाइट अधातु होकर भी मुलायम और विद्युत चालक है। उसके अपवादात्मक गुण उसकी विशिष्ट संरचना के कारण होते हैं। इसमें कार्बन परमाणु विभिन्न परतों में व्यवस्थित होते हैं और प्रत्येक परमाणु उसी परत के तीन निकटवर्ती परमाणुओं से सहसंयोजक बंधन में होता है। प्रत्येक परमागु का चौथा संयोजी इलेक्ट्रॉन अलग परतों के मध्य उपस्थित होता है और यह गमन के लिए मुक्त होता है। यही मुक्त इलेक्ट्रॉन ग्रैफाइट को विद्युत का उत्तम चालक बनाते हैं। विभिन परतें एक-दूसरे पर सरक सकती हैं। यह ग्रैफाइट को मुलायम ठोस और उत्तम ठोस स्नेहक बनाते हैं।[1]

उपयोग[संपादित करें]

ग्रेफाइट का उपयोग पेन्सिल की लीड तथा घड़ियों की कमानी बनाने में होता है। उच्च ताप पर चलने वाली मशीनों में इसको तेल या पानी के साथ मिलाकर स्नेहक के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसका पाउडर पालिश करने के काम में आता है। न्यूक्लियर रियेक्टर में मोडेरेटर के रूप में इसका उपयोग किया जाता है। धातुओं को पिघलाने के लिए क्रुसिबल बनाने में इसका उपयोग किया जाता है।[2]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. रसायनशास्त्र, भाग १, कक्षा १२, नई दिल्ली, पृष्ठ ५
  2. गुप्त, तारकनाथ (नवंबर २००४). भौतिकी एवं रसायन शास्त्र. कोलकाता: भारती पुस्तक मन्दिर,. पृ॰ 252-253. |access-date= दिए जाने पर |url= भी दिया होना चाहिए (मदद)