योगेन्द्र सिंह यादव

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सूबेदार मेजर
योगेन्द्र सिंह यादव
परमवीर चक्र

परमवीर चक्र से सुसज्जित तत्कालीन सूबेदार यादव
जन्म 10 मई 1980 (1980-05-10) (आयु 38)[1]
बुलंदशहर जिला, उत्तर प्रदेश, भारत
निष्ठा भारत भारत
सेवा/शाखा Flag of Indian Army.svg भारतीय सेना
उपाधि ग्रेनेडियर, बाद में Subedar Major - Risaldar Major of the Indian Army.svg सूबेदार मेजर
सेवा संख्यांक 2690572
दस्ता 18वीं ग्रेनेडियर्स
युद्ध/झड़पें कारगिल युद्ध (ऑपेरशन विजय)
सम्मान Param-Vir-Chakra-ribbon.svg परमवीर चक्र

ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव (वर्तमान सूबेदार मेजर) भारतीय सेना के जूनियर कमीशनन्ड ऑफिसर (जेसीओ) हैं, जिन्हें कारगिल युद्ध के दौरान 4 जुलाई 1999 की कार्रवाई के लिए उच्चतम भारतीय सैन्य सम्मान परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया। मात्र 19 वर्ष की आयु में परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले ग्रेनेडियर यादव, सबसे कम उम्र के सैनिक हैं जिन्हें यह सम्मान प्राप्त हुआ।

प्रारम्भिक जीवन[संपादित करें]

श्री यादव का जन्म 10 मई 1980 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले औरंगाबाद अहिर गांव में हुआ था। उनके पिता करण सिंह यादव ने 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों में भाग लेकर कुमाऊं रेजिमेंट में सेवा की थी। यादव 16 साल और 5 महीने की उम्र में ही भारतीय सेना में शामिल हो गए थे।

सैन्य जीवन[संपादित करें]

ग्रेनेडियर यादव 18 ग्रेनेडियर्स के साथ कार्यरत कमांडो प्लाटून 'घातक' का हिस्सा थे, जो 4 जुलाई 1999 के शुरुआती घंटों में टाइगर हिल पर तीन सामरिक बंकरों पर कब्ज़ा करने के लिए नामित की गयी थी। बंकर एक ऊर्ध्वाधर, बर्फ से ढके हुए 1000 फुट ऊंची चट्टान के शीर्ष पर स्थित थे। यादव स्वेच्छा से चट्टान पर चढ़ गए और भविष्य में आवश्यकता की सम्भावना के चलते रस्सियों को स्थापित किया। आधे रस्ते में एक दुश्मन बंकर ने मशीन गन और रॉकेट फायर खोल दी जिसमे प्लाटून कमांडर और दो अन्य शहीद हो गए। अपने गले और कंधे में तीन गोलियों के लगने के बावजूद, यादव शेष 60 फीट चढ़ गए और शीर्ष पर पहुंचे। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वह पहले बंकर में घुस गए और एक ग्रेनेड से चार पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या कर दी और दुश्मन को स्तब्ध कर दिया, जिससे बाकी प्लाटून को चट्टान पर चढ़ने का मौका मिला।

उसके बाद यादव ने अपने दो साथी सैनिकों के साथ दूसरे बंकर पर हमला किया और हाथ से हाथ की लड़ाई में चार पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या की। अतः प्लाटून टाइगर हिल पर काबिज होने में सफल रही।

रोचक तथ्य[संपादित करें]

ग्रेनेडियर यादव के लिए परमवीर चक्र की घोषणा मरणोपरांत के लिए की गई थी, लेकिन जल्द ही पता चला कि वह अस्पताल में सुधार की हालत में हैं और जीवित हैं।

सम्मान[संपादित करें]

जान की बाजी लगा कर देश की सेवा करने के कारण भारत सरकार द्वारा मरणोपरांत परमवीर चक्र का सम्मान दिया गया था किन्तु बाद में उन्हें बचा लिया गया।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Grenadier Yogendra Singh Yadav, PVC". twdi.in. http://twdi.in/node/506.