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ग्रीक आग

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ग्रीक आग (Greek fire)

उत्पत्ति का मूल स्थान बीजान्टिन साम्राज्य
सेवा इतिहास
द्वारा प्रयोग किया बीजान्टिन नौसेना
युद्ध अरब-बीजान्टिन युद्ध, कुस्तुनतुनिया की घेराबंदी

ग्रीक आग (अंग्रेज़ी: Greek fire), जिसे 'रोमन आग' या 'समुद्री आग' भी कहा जाता है, बीजान्टिन साम्राज्य द्वारा विकसित और उपयोग किया जाने वाला एक अत्यधिक विनाशकारी और रहस्यमय आग लगाने वाला हथियार था। इसका उपयोग मुख्य रूप से नौसैनिक युद्धों में दुश्मन के जहाजों को नष्ट करने के लिए किया जाता था। इस हथियार की सबसे खौफनाक विशेषता यह थी कि यह पानी की सतह पर भी जलता रहता था और इसे सामान्य तरीकों (जैसे पानी डालकर) से बुझाया नहीं जा सकता था। मध्ययुगीन युद्ध के इतिहास में इसने एक तकनीकी क्रांति ला दी थी और सदियों तक बीजान्टिन साम्राज्य के अस्तित्व को बचाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।[1][2]

आविष्कार और ऐतिहासिक उपयोग

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ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, ग्रीक आग का आविष्कार 7वीं शताब्दी (लगभग 672 ईस्वी) में कैलीनिकस नामक एक यहूदी-सीरियाई वास्तुकार और रसायनज्ञ ने किया था, जो अरब आक्रमणों से भागकर कुस्तुनतुनिया आ गया था।

ग्रीक आग ने इतिहास का रुख तब बदल दिया जब इसने कुस्तुनतुनिया की पहली (674–678 ईस्वी) और दूसरी (717–718 ईस्वी) अरब घेराबंदी के दौरान बीजान्टिन राजधानी को पूरी तरह से नष्ट होने से बचाया। बीजान्टिन नौसेना ने इस हथियार का उपयोग करके विशाल अरब बेड़ों को जलाकर राख कर दिया। यह हथियार दुश्मनों के लिए इतना भयानक था कि इसके इस्तेमाल से पहले ही दुश्मन के खेमे में भारी मनोवैज्ञानिक दहशत फैल जाती थी।[3][4][5]

तैनाती और कार्यप्रणाली

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ग्रीक आग को मुख्य रूप से विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए युद्धपोतों (जिन्हें ड्रोमन या Dromon कहा जाता था) से तैनात किया जाता था। इसे दागने के लिए पीतल या तांबे की एक विशेष ट्यूब या पंपिंग तंत्र का उपयोग किया जाता था, जिसे सिफॉन कहा जाता था। तरल को दबाव के तहत सिफॉन के माध्यम से दुश्मन के जहाजों पर छिड़का जाता था, जहाँ वह हवा के संपर्क में आते ही या एक लौ के माध्यम से प्रज्वलित हो जाता था।

प्रत्यक्षदर्शियों के विवरण के अनुसार, जब ग्रीक आग को दागा जाता था, तो यह गड़गड़ाहट जैसी भयानक आवाज़ और घने काले धुएं के साथ बाहर निकलती थी। यह पानी पर गिरते ही फैल जाती थी और जलती रहती थी। समकालीन लेखकों का दावा है कि इसे बुझाने के लिए केवल रेत, तेज़ सिरका, या पुराने मूत्र का ही प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकता था।[6][7]

एक खोया हुआ रहस्य

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ग्रीक आग का सटीक रासायनिक सूत्र इतिहास के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है। बीजान्टिन सम्राटों ने इसे सर्वोच्च 'राज्य रहस्य' घोषित किया था। इसे बनाने की प्रक्रिया को कई अलग-अलग हिस्सों में बाँट दिया गया था, ताकि कोई भी एक व्यक्ति पूरी प्रक्रिया को न जान सके। साम्राज्य के पतन के साथ ही यह रहस्य भी हमेशा के लिए खो गया।

आधुनिक रसायनज्ञों और इतिहासकारों ने कई सिद्धांतों का प्रस्ताव दिया है। सबसे संभावित सिद्धांत यह है कि यह नाफ्था (एक प्रकार का अत्यधिक ज्वलनशील कच्चा तेल) पर आधारित मिश्रण था। इसे गाढ़ा बनाने और पानी पर तैरने में मदद करने के लिए इसमें पाइन रेज़िन मिलाया गया होगा। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पानी के संपर्क में आने पर स्वतः प्रज्वलित होने के लिए इसमें क्विकलाइम (कैल्शियम ऑक्साइड) या सल्फर का उपयोग किया गया होगा।

भले ही आज हम इसका सटीक फ़ॉर्मूला नहीं जानते, लेकिन 'ग्रीक आग' को आधुनिक नेपलम और फ़्लेमथ्रोवर का ऐतिहासिक पूर्वज माना जाता है।[8]

सन्दर्भ

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  1. Haldon, John (2002). Byzantium at War: AD 600-1453. Osprey Publishing. pp. 43-45. ISBN 978-1841763606.
  2. & Jeffreys 2006
  3. Partington, J. R. (1999). A History of Greek Fire and Gunpowder. Johns Hopkins University Press. pp. 12-15. ISBN 978-0801859540.
  4. "Callinicus of Heliopolis | Byzantine Empire, Hagia Sophia, Dome"
  5. "10 Real-Life Historical Connections In Game Of Thrones That You Never Noticed"
  6. Roland, Alex (1992). "Secrecy, Technology, and War: Greek Fire and the Defense of Byzantium". Technology and Culture. 33 (4): 655–679.
  7. British army: its origin, progress, and equipment
  8. Pryor, John H.; Jeffreys, Elizabeth M. (2006). The Age of the ΔΡΟΜΩΝ: The Byzantine Navy ca. 500–1204. Brill Academic Publishers. pp. 607–609. ISBN 978-9004151970.

बाहरी कड़ियाँ

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