ग्राहम का विसरण का नियम

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ग्राहम का विसरण का नियम गैस की विसरण की दर से सम्बन्धित एक नियम है जिसे स्कॉटलैण्ड के रसायन शास्त्री थॉमस ग्राहम ने प्रतिपादित किया था। थॉमस ने प्रयोगों के आधार पर पाया कि किसी गैस के विसरण (effusion) की की दर उसके कणों के द्रव्यमान के वर्गमूल के व्युत्क्रामुपाती होती है। इसे सूत्र रूप में इस प्रकार लिखा जा सकता है-

जहाँ:

Rate1 पहली गैस के विसरण की दर है। (आयतन या मोल प्रति इकाई समय)
Rate2 दूसरी गैस के विसरण की दर है।
M1 पहली गैस का मोलर द्रव्यमान (molar mass) है।
M2 दूसरी गैस का मोलर द्रव्यमान (molar mass) है।

ग्राहम के इस नियम की पूर्ण सैद्धान्तिक व्याख्या वर्षों बाद गैसों के गत्यात्मक सिद्धान्त के द्वारा हुई। यह नियम तभी शुद्धता पूर्वक लागू होता है जब केवल एक गैस के अणु ही एक समय में विसरण कर रहे हों। जब कोई गैसोंका मिश्रण का किसी छेद से होकर विसरण हो रहा हो, या एक गैस दूसरी गैस मेंविसरित हो रही हो तब यह नियम पूर्णत: सत्य न होकर लगभग सत्य होता है।

महत्व[संपादित करें]

  • ग्राहम का नियम विसरण की विधि का उपयोग करते हुए समस्थानिकों (isotopes) को अलग-अलग करने (separation) के लिये उपयोग में लाया जाता है। इसी विधि से परमाणु बम के निर्माण के लिये शुद्ध यूरेनियम (enriched Uranium) प्राप्त की गयी थी।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]