ग्रंथिल प्लेग

ग्रंथिल प्लेग तीन प्रकार के प्लेग में से एक है जो यर्सिनिया पेस्टिस नामक जीवाणु के कारण होता है।[1] जीवाणु के संपर्क में आने के एक से सात दिन बाद फ्लू जैसे लक्षण विकसित होते हैं। इन लक्षणों में बुखार, सिरदर्द और उल्टी के साथ-साथ त्वचा में जीवाणु के प्रवेश के निकटतम क्षेत्र में सूजन और दर्दनाक लिम्फ नोड्स शामिल हैं।
लक्षण
[संपादित करें]संक्रमित पिस्सू के काटने से फैलने के बाद वाई पेस्टिस जीवाणु सूजन वाले लिम्फ नोड में स्थानीयकृत हो होकर ये बसना और प्रजनन करना शुरू कर देते हैं। संक्रमित लिम्फ नोड्स में रक्तस्राव होता है जिसके परिणामस्वरूप ऊतक मर जाते हैं।[2] वाई पेस्टिस बेसिली फागोसाइटोसिस का प्रतिरोध कर सकती है और यहां तक कि फागोसाइट्स के अंदर प्रजनन कर उन्हें मार भी सकती है।
जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है लिम्फ नोड्स में रक्तस्राव हो सकता है जिससे सूजन और परिगलितता हो सकती है। कुछ मामलों में ग्रंथिल प्लेग घातक सेप्टिकमिक प्लेग में बदल सकता है।
उपचार
[संपादित करें]ग्रंथिल प्लेग के उपचार में कई प्रकार की एंटीबायोटिक दवाएं प्रभावी हैं। इनमें स्ट्रेप्टोमाइसिन और जेंटामाइसिन जैसे एमिनोग्लाइकोसाइड्स, टेट्रासाइक्लिन (विशेष रूप से डॉक्सीसाइक्लिन) और फ्लोरोक्विनोलोन सिप्रोफ्लोक्सासिन शामिल हैं। ग्रंथिल प्लेग के उपचारित मामलों में मृत्यु दर लगभग 1 से 15% होती है जबकि उपचार न किए गए मामलों में मृत्यु दर 40 से 60% होती है।[3]