गोविन्दपुर झखराहा

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गोविन्दपुर झखराहा
—  गाँव  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य बिहार
ज़िला वैशाली
जनसंख्या 1,753
लिंगानुपात 1000:871 /
साक्षरता 59.66%
आधिकारिक भाषा(एँ) हिन्दी, उर्दू एवं बज्जिका
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)

• 52 मीटर (171 फी॰)
आधिकारिक जालस्थल: http://vaishali.bih.nic.in/

निर्देशांक: 25°41′11″N 85°21′54″E / 25.6865°N 85.365°E / 25.6865; 85.365

गोविन्दपुर झखराहा भारत में बिहार राज्य के ऐतिहासिक वैशाली जिलान्तर्गत एक छोटा गाँव है। निकटस्थ शहर एवं जिला मुख्यालय हाजीपुर से यह गाँव १३ किलोमीटर पूर्व राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवस्थित है। सघन आबादी वाले इस कृषिप्रधान गाँव में बज्जिका बोली जाती है लेकिन शिक्षा का माध्यम हिंदी और उर्दू है। लगभग १ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र वाले इस छोटे से गाँव की वर्तमान जनसंख्या लगभग 1800 है।

भूगोल[संपादित करें]

गोविन्दपुर झखराहा: गाँव का एक परिद्श्य
  • अवस्थिति: भारत के बिहार प्रांत से गुजरनेवाले राष्ट्रीय राजमार्ग ३२२ पर स्थित इस गाँव की अक्षांश एवं देशान्तर स्थिति २५४१'१०" उत्तर एवं ८५२१'५६" पूर्व में है[1]। समुद्रतल से गाँव की औसत ऊँचाई 52 मीटर है[2]। ईस्वी सन 1860 में अंग्रेजों द्वारा पहली बार तैयार किए गए नक्शे में गाँव का प्रचलित नाम गोविन्दपुर झकराहा, थाना- महुआ दिया गया है। गोविन्दपुर के उत्तर में शेखपुरा, दक्षिण में दोबरकोठी एवं चकसिकन्दर, पूर्व में बाकरपुर और पश्चिम में श्यामपुर उर्फ मंसूरपुर पड़ोसी गाँव हैं। पूर्व एवं दक्षिण से बहनेवाली प्राकृतिक नहर गाँव के सीमा का निर्धारण करती है जबकि पश्चिम तथा उत्तर में ग्रामीण सड़क सीमारेखा है। गाँव में बसे स्थानीय बाजार का विस्तार चकसिकन्दर तक है। बाकरपुर पंचायत अन्तर्गत आनेवाला यह गाँव दो वार्डों (वार्ड नं २ एवं ३) में बँटा है। गाँव राजापाकर विधान सभा क्षेत्र एवं हाजीपुर (सुरक्षित) संसदीय क्षेत्र में पड़ता है।
  • जलवायु: उत्तर बिहार में स्थित होने से यहाँ की जलवायु शीतोष्ण है किंतु सर्दी और गर्मी की पराकाष्ठा सहनी पड्ती है। गर्मी में तापमान 44 °C - 21 °C तथा सर्दियों में 20 °C - 2 °C रहता है। बिहार के अन्य भागों की तरह यहाँ भी 1,000 मिलीमीटर के आसपास औसत वर्षा होती है। वर्षा के कारण भादो और अश्विन का महीना हरियाली और जीवन से पूर्ण होता है। कार्तिक महीने में दीपावली और छठ पूजा के बाद शीत ऋतु का आगाज होता है। पौष और माघ (दिसंबर एवं जनवरी) के महीनों की ठिठुरन सहने के बाद फागुन (फरवरी) में वसंत का स्वागत विद्या की देवी माँ सरस्वती के पूजन तथा होली के रंगारंग आयोजन से होता है। बैसाख और जेठ (मई और जून) में गर्मी और लू का असर आम और लीची से कम मालूम होता है। जून के मध्य यानी आषाढ़ में मॉनसून की फुहारों से राहत पहुँचती है और सावन में वर्षा ऋतु का श्रीगणेश होता है। चैत्र एवं अगहन का महीना सबसे सुहाना होता है।

शिक्षा एवं जनसुविधाएँ[संपादित करें]

  • शैक्षिक स्तर: गाँव के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में आठवीं स्तर तक तथा उच्च विद्यालय चकसिकन्दर में १२वीं कक्षा तक पढाई का साधन मौजूद होने के बावजूद लोगों में शिक्षा का स्तर मध्यम है। साक्षरता राष्ट्रीय औसत से नीचे है। कुछ परिवारों में उच्च स्तरीय शिक्षा का विस्तार हुआ है। स्नातक (बी ए, बी एस सी) या परास्नातक (एम ए, एम एस सी) के अलावा कई लोग बी एड, डिप्लोमा या डिग्री इंजिनियरिंग जैसी रोजगारोन्मुख डिग्रीयाँ लेकर नौकरी कर रहे हैं। विदेशी विश्वविद्यालय से उच्च डिग्री हासिल करने वाले लोग भी हैं। लेकिन, ज्यादातर लोगों के लिए खेती जीविका का मुख्य स्रोत है। शिक्षक, सेना तथा इंजिनियर के अतिरिक्त अन्य सरकारी तथा निजी सेवाओं में गाँव के लोग कार्यरत हैं।
  • नागरिक सुविधाएँ: गाँव में पक्की तथा ग्रामीण सड़कों का अच्छा नेटवर्क है। २००६ में भारत सरकार द्वारा शुरु किए गए राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल योजना योजना के अधीन गाँव को चिह्नित कर कई जगहों पर नलकूप लगाया गया है[3]। राजीव गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अधीन गाँव को पूर्णतः विद्युतीकृत किया जा चुका है लेकिन उपभोक्ताओं की संख्या बहुत कम है। महत्वपूर्ण स्थलों पर सौरऊर्जा से रात्रि प्रकाश व्यवस्था की गयी है लेकिन निजी आवश्यकताओं के लिए लोग मिट्टीतेल पर ही निर्भर है। कुछ संपन्न परिवारों को छोड़ अधिकांश घरों में भोजन के लिए लकड़ी या उपले से जलावन की जरुरतें पूरी होती हैं। ग्रामवासियों की धार्मिक उपासना के लिए निजी स्तर पर विकसित सुविधाओं में काली मंदिर और शिवमन्दिर है। दैनिक उपभोक्ता सामग्री के लिए गाँव में ही स्थानीय बाजार है। गाँव के पास चकसिकन्दर में लगने वाले साप्ताहिक हाट में ताजी हरी सब्जियाँ उपलब्ध हो जाती है।
  • दूरसंचार एवं बैंकिंगः दूरभाष संचार के लिए बीएसएनएल का मोबाईल तथा लैंडलाइन सेवा के अतिरिक्त एयरटेल, वोदाफोन तथा एयरसेल मोबाईल सर्विस का अच्छा नेटवर्क है। इंटरनेट के लिए बीएसएनएल ब्रॉडबैंड सेवा उपलब्ध कराती है। डाक सेवाओं के लिए स्थानीय चकसिकन्दर बाजार में डाकघर (पिन कोड- ८४४११५) है जहाँ डाक बचत योजनाएं एवं धन निकासी एवं जमा सुविधा मिल जाती है। बैंकिंग सेवाओं के लिए वैशाली क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक है जो सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अधीन कार्यरत है। स्थानीय बाजार में भारतीय स्टेट बैंक के अलावे दो अन्य एटीएम कि सुविधा है।
  • ज्ञान एवं मनोरंजन: समाचार एवं मनोरंजन के लिए दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल का प्रसारण आसानी से देखा जा सकता है। बढती तकनीकि सुविधाओं के चलते लोग अब डिश टीवी ले लेते हैं। ऑल इंडिया रेडियो तथा रेडियो मिर्ची का निकटवर्ती प्रसारण केन्द्र पटना है। यहाँ मीडियम तथा एफएम वेव पर प्रसारण सुना जा सकता है। पटना से प्रकाशित समाचारपत्र हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, प्रभात खबर गाँव में आसानी से उपलब्ध हो जाती है। स्थानीय युवक सिनेमाई मनोरंजन के लिए हाजीपुर जाते हैं। खेल के लिए गाँव में कोई मैदान नहीं है इसलिए क्रिकेट के शौक को बच्चे खाली खेत या रास्ते के किसी कोने में पुरा करते हैं।

कृषि एवं व्यवसाय[संपादित करें]

गंगा के अपवाह क्षेत्र में स्थित होने से यहाँ की जमीन उपजाऊ है जिसमें धान, गेहूँ, मक्का के अतिरिक्त अन्य खाद्यान्न एवं दलहन तथा तिलहन का अच्छा उत्पादन होता है। सघन जनसंख्या एवं खेतों का आकार छोटा होने से कृषि का व्यवसायिक रूप नहीं दिखाई देता लेकिन तम्बाकू, मिर्च, सब्जी आदि उगाकर कुछ लोग आर्थिक मदद प्राप्त कर लेते हैं। सिंचाई के लिए निजी नलकूप या इंद्रदेव की कृपा पर लोग निर्भर हैं। गाँव के पूर्वी सीमा से गुजरने वाली नहर का उद्धार कर कृषि में खुशियाली लाई जा सकती है। निजी क्षेत्रों में वागबानी तथा वानिकी का अच्छा विकास हुआ है और गाँव में पर्याप्त हरियाली है। आम, लीची, पाकड़, सीसम के अलावे ताड़ और केले सर्वत्र दिखाई देते हैं। अधिकांश लोगों ने कृषि को व्यवसाय रूप में अपना रखा है लेकिन भूमिहीन लोगों के लिए मजदूरी, दुकानदारी या छोटा व्यवसाय ही जीविका का साधन है। सरकारी नौकरी करना गौरव की बात समझा जाता है इसलिए शिक्षा प्राप्त कर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी में लग जाना आम बात है।

अधिवास एवं जनजीवन[संपादित करें]

  • जनसंख्या: 2011 की जनगणना अनुसार गाँव की आबादी 1753 है जिसमें 937 पुरूष और 816 स्त्रियाँ हैं [4]. लगभग १ किमी² क्षेत्रफल वाले इस गाँव में करीब 341 परिवार बसते हैं जिनमें बहुसंख्य हिंदू के अतिरिक्त मुस्लिम भी हैं। बसावट प्रकीर्ण किस्म का है जिसमें परंपरागत रूप से बननेवाले कच्चे मकानों के अलावे नए पक्के भवन की बहुतायत है। केन्द्रीयकृत अधिवास के विपरित गाँव में लोग अपने छोटे भूखंड में घर बनाकर रहते हैं। नौकरीपेशा अथवा अस्थायी मजदूरी करनेवाले कई लोग बाहर रहते हैं।
  • सामाजिक जीवन: वर्ण व्यवस्था के अधीन बँटी विभिन्न जातियों की संख्या यहाँ के जनजीवन का महत्वपूर्ण घटक है। गाँव यादव बहुल है लेकिन हलवाई, कुर्मी, बरई, लुहार जैसी अन्य पिछडी जातियाँ तथा दुसाध (अनुसूचित जाति) भी पूरक तरीके से वास करती हैं[5]। कुछेक मुस्लिम परिवार लालमन जाति के हैं[6]। रहन-सहन के स्तर के मामले में विभिन्न जातियों में खास अन्तर नहीं है। पारिवारिक व्यवस्था पितृसत्तात्मक एवं एकल है। कभी संयुक्त परिवार को जीवन शैली मानकर चलने वाले इस गाँव में अब माँ-पिता के रहते ही बेटे शादी के बाद अलग हो लेते है। शादियाँ हलाँकि अभी भी पिता की मर्जी से स्वजातीय समुदाय में ही होती है। विवाह को पवित्र बंधन माना जाता है औ‍र मुस्लिम परिवारों में भी तलाक की बात सोचना एक सामाजिक अपराध समझा जाता है। शादी विवाह एवं कर्मकांडों के लिए पुरोहित पास के गाँव के आते हैं। बाल काटने तथा संस्कार-कार्यों में सहायता के लिए आवश्यक नाई, माली, कुम्हार आदि यजमान के बुलाए जाने पर पडोस के गाँव से आते हैं। गाँव के लुहार, जो कभी यहाँ के किसानों के लिए कृषि उपकरण बनाकर आत्मनिर्भर ग्रामीण व्यवस्था की अवधारणा को पूर्ण करते थे, अब अपनी परंपरागत पेशे को छोड चुके हैं। कुछ समय पूर्व यहाँ की परंपरागत जीवन शैली का स्वरूप तेजी से बदला है। तकनीकी परिवर्तनों एवं बेहतर संचार सुविधाओं ने बदलाव की प्रक्रिया को तेज किया है। बढ्ती आर्थिक जरुरतों के आगे घुटने टेक रही जाति व्यवस्था यहाँ के सामाजिक ताना-बाना को भी अपना शिकार बना रही है। आपसी विवाद को सुलझाने के लिए बनी पंचायत का पुराना स्वरूप गायब हो चुका है। मतदान को द्वारा चुनकर बननेवाली नई पंचायत अब धडेबन्दी का अखाडा एवं सरकारी योजनाओं का व्यक्तिगत फायदा उठानेवाली संस्था बन गयी है। इससे निजात पाने हेतु यहाँ तथा पडोसी गाँव के कुछेक प्रबुद्ध नागरिकों ने यादव संघ की स्थापना की है। अधिकांश यादव परिवारों के लोग यादव संघ बाकरपुर से जुडे हैं और अपनी समस्याओं को इसके माध्यम से सुलझाते हैं।
  • धार्मिक जीवन: गाँव में बहुसंख्यक आबादी हिन्दू है। कुछ परिवारों ने राधा स्वामी तथा कबीर पंथ में अपनी आस्था पाल रखी है। सनातन धर्म के लगभग सभी प्रमुख पर्व एवं त्योहार यहाँ श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाए जाते हैं। होली, दिवाली, दुर्गापूजा, रामनवमी, छठ पर्व, सरस्वती पूजा में लोग अपनी खुशी जाहिर करने में कोई कसर बाकी नहीं रखते। कुछेक मुस्लिम परिवारों में इस्लामिक त्योहार मनाए जाते हैं। मुहर्रम मनाने में भी हिंदू लोग पीछे नहीं रहते। मुहर्रम के जुलूस में जिस तरह सारा गाँव बाजार में एकत्रित होकर अपनी शिरकत जाहिर करता है वह देखते बनता है। छठ पूजा नि:संदेह ही सबसे गहरी आस्था एवं पवित्रता के साथ मनाया जाता है। इस दिन सारा गाँव पोखर पर जमा होकर भगवान सूर्य को सांध्यकाल तथा प्रात:काल का अर्घ्य देते हैं। बिहार की ग्रामीण संस्कृति को गहरे तौर पर रेखांकित करनेवाला पर्व चकचंदा, गोवर्धन पूजा, आर्द्रा उत्सव, वट सावित्री आदि भी मनाया जाता है। महिलाएँ तीज एवं जीवित्पुत्रिका व्रत (जितिया) बहुत ही धार्मिक उत्साह के साथ मनाती हैं।

कैसे पहुँचे?[संपादित करें]

  • सड्क मार्ग: राष्ट्रीय राजमार्ग ३२२ से गुजरने वाली निजी तथा सवारी गाड़ियाँ (बसें, टैक्सी, ऑटोरिक्शा आदि) यहाँ से आवागमन का सबसे अच्छा साधन है। जिला मुख्यालय हाजीपुर, अनुमंडल मुख्यालय महुआ तथा प्रखंड मुख्यालय राजापाकर के अतिरिक्त जन्दाहा होते हुए समस्तीपुर जाने के लिए यहाँ से दैनिक जनसवारी उपलब्ध है। ३० किलोमीटर दूर स्थित राज्य की राजधानी पटना के लिए हाजीपुर होकर जाया जा सकता है। गाँव के आसपास जाने के लिए यहाँ पक्की तथा ग्रामीण सड़कों का अच्छा नेटवर्क है।
  • रेलमार्ग: गाँव के पास से गुजरने वाली रेल का नज़दीकी रेलवे स्टेशन चकसिकन्दर है जो पूर्व मध्य रेलवे के हाजीपुर-बरौनी रेलखंड पर पड़ता है। गाँव से रेलवे स्टेशन 1.5 किलोमीटर दूर दक्षिण में है। हाजीपुर तथा बरौनी की ओर जाने के लिए हर रोज लगभग तीन घंटे के अन्तराल पर पाँच जोड़ी सवारी गाड़ियाँ चकसिकन्दर से गुजरती हैं। चकसिकन्दर से आने-जाने वाली गाड़ियों की जानकारी इंडियारेलइन्फो डॉट काम[7] पर मिल सकती है। देश के विभिन्न हिस्सों में सफर के लिए लोग हाजीपुर जाकर ट्रेन लेते हैं।

सन्दर्भ एवं बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]