गुलाम गौस खान
गुलाम गौस खान (मृत्यु: 3 अप्रैल 1858) सन 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख योद्धाओं में से एक थे। वे रानी लक्ष्मीबाई के विश्वसनीय सहयोगी[1][2][3] और उनकी सेना के मुख्य तोपची (टॉपची) थे।[4][5][6] उन्होंने 1857 का भारतीय विद्रोह में सक्रिय भूमिका निभाई। झांसी की रक्षा के दौरान उन्होंने तोपखाने का कुशल नेतृत्व किया और अंग्रेजों के खिलाफ कई मोर्चों पर बहादुरी से लड़े। जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने झांसी पर हमला किया, तब गौस खान ने किले की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।[7]
व्यक्तिगत पृष्ठभूमि
[संपादित करें]वे एक मनिहार(शेख) परिवार से थे।[8] वे एक धर्मनिष्ठ मुसलमान थे और अब्दुल क़ादिर जीलानी के अनुयायी थे, जिन्हें “गौसुल आज़म” के नाम से भी जाना जाता है।[9] 3 अप्रैल 1858 को झांसी की घेराबंदी के दौरान उन्होंने वीरगति प्राप्त की। गुलाम गौस खान का नाम भारतीय इतिहास में साहस, निष्ठा और देशभक्ति के प्रतीक के रूप में लिया जाता है।
स्मृति और सम्मान
[संपादित करें]- गुलाम गौस खान की वीरता और योगदान को सम्मान देने के लिए झांसी में एक पार्क का नाम गुलाम गौस खान पार्क रखा गया है। यह उनके ऐतिहासिक महत्व और स्थानीय स्मृति में उनकी उपस्थिति को दर्शाता है।[10]
- इसके अलावा, अक्टूबर 2024 में रानी लक्ष्मीबाई समिति ने नई दिल्ली के ईदगाह क्षेत्र के पास एक पार्क में गुलाम गौस खान की प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की। इस पहल में नगर निगम का भी सहयोग बताया गया है।[11]
ग्रन्थसूची
[संपादित करें]- शेख, शमीम (2023). गुलाम गौस खान: झाँसी की रानी का बहादुर तोपची. राष्ट्रिय पुस्तक न्यासा. p. 64. ISBN 9789354912948.
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Topchi Ghulam Ghaus Khan". amritmahotsav.nic.in.
- ↑ "लक्ष्मीबाई के किले में रखी है कड़क बिजली तोप, गुलाम गौस खां इससे करते थे दुश्मनों को ढेर". www.uptak.in. 2023-06-22. अभिगमन तिथि: 2025-02-02.
- ↑ "तोपची गुलाम गौस खान ने मंदिर को बचाकर पीछे छुपी अंग्रेजी सेना के उड़ा दिए थे परखच्चे". अमर उजाला. अभिगमन तिथि: 2025-02-02.
- ↑ "रानी के मन्त्रिमण्डल में शामिल थे 2 गद्दार - रानी के मन्त्रिमण्डल में शामिल थे 2 गद्दार - Uttar Pradesh Jhansi City local News". जागरण. अभिगमन तिथि: 2025-02-02.
- ↑ "Lok Sabha Election 2024: बुंदेलखंड में मुस्लिमों से वोट लेने से नहीं गुरेज, फिर टिकट देने से क्यों परहेज?". नवभारत टाइम्स. अभिगमन तिथि: 2025-02-02.
- ↑ "Holding fort at Jhansi". इंडिया टुडे (अंग्रेज़ी भाषा में). 2009-09-30. अभिगमन तिथि: 2025-02-02.
- ↑ "कौन हैं गौस खान-खुदा बख्श, लक्ष्मीबाई के साथ मूर्तियां लगाने को लेकर बवाल?". न्यूज़18. 2024-09-26. मूल से से 26 सितंबर 2024 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2025-02-02.
- ↑ "पैदाइशी जंगजू क़ौम है 'पठान', मशहूर हैं जांबाज़ी के क़िस्से". आज तक. 2023-02-06. अभिगमन तिथि: 2025-02-02.
- ↑ "गुलाम गौस खाँ भी रहे हैं गौहर अली मस्जिद के नमा़जी - गुलाम गौस खाँ भी रहे हैं गौहर अली मस्जिद के नमा़जी - Uttar Pradesh Jhansi City local News". जागरण. अभिगमन तिथि: 2025-02-02.
- ↑ "Jhansi: झांसी नगर निगम की अनदेखी का दंश झेल रहा है 'गुलाम गौस खां' पार्क, महापौर ने दिया ये जवाब". न्यूज़18. 2022-11-03. मूल से से 9 फ़रवरी 2025 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2025-02-02.
- ↑ "रानी लक्ष्मीबाई के साथ उनके तोपची की भी प्रतिमा लगेगी". हिंदुस्तान.