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गाल्वा सिद्धांत

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गाल्वा सिद्धांत एक गणितीय सिद्धान्त है जिसका प्रतिपादन एवारिस्त गाल्वा ने किया था। यह क्षेत्र सिद्धांत और समूह सिद्धांत के बीच एक संबंध स्थापित करता है। इस संबंध को गाल्वा सिद्धांत का मौलिक प्रमेय भी कहा जाता है। इसकी सहायता से क्षेत्र सिद्धांत की कुछ समस्याओं को समूह सिद्धांत में परिवर्तित किया जाता है जिससे समस्या का सरल रूप प्राप्त होता है और समझने में आसान हो जाती हैं।

सन् 1830 में 18 वर्ष की आयु में, गाल्वा ने अपनी “रैडिकल्स द्वारा हल करने के सिद्धांत” पर एक शोध-पत्र फ्रेंच एकेडमी ऑफ साइंसेज़ में प्रस्तुत किया। लेकिन 1831 में उस पेपर को अस्वीकार कर दिया गया क्योंकि उसे बहुत अधूरा माना गया और उसने समीकरण के गुणांकों के बजाय मूलों के संदर्भ में शर्तें दी थीं।

सन् 1830 में जब गाल्वा (Évariste Galois) सिर्फ़ 18 साल के थे, उन्होंने अपनी गणित की खोज “रैडिकल्स से समीकरण हल करने का सिद्धांत” पर एक शोध-पत्र फ्रेंच साइंस अकादमी में भेजा।

लेकिन सन् 1831 में उस पेपर को यह कहकर अस्वीकृत कर दिया गया कि वह बहुत अधूरा है और उसमें समीकरण के हल की शर्तें गलत तरीके से बताई गई हैं।

इसके बाद सन् 1832 में गाल्वा की एक द्वंद्व (लड़ाई) में मौत हो गई। उनका वह शोध-पत्र मरने के बाद भी लंबे समय तक छपा नहीं।[1]

1846 में जोसेफ लियूविल (Joseph Liouville) ने वह पेपर खोजकर प्रकाशित किया और उसमें अपने स्पष्टीकरण भी जोड़े।

इससे पहले, 4 जुलाई 1843 को, लियूविल ने फ्रेंच साइंस अकादमी में एक भाषण में गैल्वा की खोजों के बारे में जानकारी दी थी। [2]

गणितज्ञ एलन क्लार्क ने कहा कि गाल्वा की खोजें “अबेल और रूफिनी के काम से कहीं ज़्यादा आगे की थीं।”

सन्दर्भ

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  1. Tignol, Jean-Pierre (2001). Galois' Theory of Algebraic Equations. World Scientific. pp. 232–3, 302. ISBN 978-981-02-4541-2.
  2. Stewart, Ian (2004). Galois theory. Chapman & Hall/CRC mathematics (Third ed.). Boca Raton: Chapman & Hall/CRC. pp. xxiii. ISBN 978-0-412-34550-0.

बाहरी कड़ियाँ

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