गायत्री प्रभु

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
Gayathri Prabhu
Prabhu's Ted Talk on 24 February 2019 at TedX Manipal.jpg
Prabhu's talk at TedX Manipal on 24 Feb, 2019
जन्म1974 (आयु 46–47)
निवासManipal, Karnataka
राष्ट्रीयताIndian
विधाNovel, Memoir
विषयFiction
सक्रिय वर्ष2003 - present
जालस्थल
gayathriprabhu.com

गायत्री प्रभु (जन्म: 1974) भारतीय उपन्यासकार हैं जो वर्तमान में मणिपाल, कर्नाटक में रहती हैं। उनकी सबसे हालिया पुस्तक 2017 में हार्पर कॉलिंस द्वारा प्रकाशित संस्मरण, इफ आई हैड टू टैल इट अगेन है।

शिक्षा[संपादित करें]

गायत्री ने मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर, जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से मास कम्युनिकेशन में एमए की डिग्री प्राप्त की।

उपन्यास[संपादित करें]

गायत्री प्रभु द अनटाइटल्ड (फोर्थ एस्टेट, हार्पर कॉलिन्स, 2016), बर्डस्विम फिशफ्लाय (रूपा प्रकाशन, 2006), और माया (इंडियलॉग पब्लिकेशन, 2003) उपन्यासों के लेखिका हैं।

द अनटाइटल्ड, 2016 में फोर्थ एस्टेट, हार्पर कॉलिन्स इंडिया द्वारा प्रकाशित किया गया। इसका शोध और लेखन एक दशक से भी अधिक समय और तीन महाद्वीपों पर किया गया था।[1] यह उपन्यास 1799 के युद्ध के ऊपर है और भारतीय और पश्चिमी चित्रकला परंपराओं के एक साथ आने के बारे में है। जब अंग्रेजों ने टीपू सुल्तान को हराया था और अंत में भारतीय उप-महाद्वीप में वर्चस्व स्थापित किया था।[2]

संस्मरण[संपादित करें]

हार्पर कॉलिंस द्वारा प्रकाशित गायत्री प्रभु का संस्मरण इफ आई हैड टू टैल इट अगेन, को नवंबर 2017 में जारी किया गया। यह एक पिता की मृत्यु के बाद लिखा गया है और अवसाद के बारे में डब्ल्यु एच ओ के साल भर के अंतरराष्ट्रीय अभियान में प्रकाशित हुआ है। पुस्तक उदासी और लत पर भारतीय परिवारों की चुप्पी को दर्शाती है।

पुरस्कार[संपादित करें]

अपने लेखन करियर के प्रारंभिक चरण से ही अपने काम के लिए मान्यता प्राप्त करते हुए, गायत्री ने 2011 में नेब्रास्का विश्वविद्यालय में सर्वश्रेष्ठ रचनात्मक पांडुलिपि के लिए प्रतिष्ठित वैरलैंड पुरस्कार जीता। गायत्री को प्रतिष्ठित सुशीला देवी साहित्य पुरस्कार के लिए पाँच लेखकों में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया गया था।

साहित्यिक क्षेत्र में अपने कार्य के लिए, 2019 में गायत्री ने अंग्रेज़ी में सर्वश्रेष्ठ लेखन के लिये प्रतिष्ठित आर. के. नारायण अवार्ड प्राप्त किया। यह पुरस्कार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री द्वारा चेन्नई पुस्तक मेले के उद्घाटन के अवसर पर दक्षिण भारत के बुकसेलर्स एंड पब्लिशर्स एसोसिएशन (BAPASI) की ओर से दिया गया।[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "the untitled". 6 October 2017. मूल से 30 मार्च 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 30 मार्च 2019.
  2. Keshavmurthy, Prashant. "In The Untitled, Gayathri Prabhu Magnifies the Miniature". thewire.in. मूल से 5 नवंबर 2017 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 30 मार्च 2019.
  3. "संग्रहीत प्रति". मूल से 30 मार्च 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 30 मार्च 2019.