गाज़ोलाज़ का गिरजाघर

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गाज़ोलाज़ का गिरजाघर

गाज़ोलाज़ का गिरजाघर गाज़ोलाज़ (Gazólaz) गाँव में स्थित है जो सिज़ुर (Cizur) नगर पालिका के अंतरगत स्पेन का ऐतिहासिक गिरजाघर है। इसे बिएन दे इंतेरेस कल्चरल की श्रेणी में जून 1931 में शामिल किया गया था। .[1]

इतिहास[संपादित करें]

इस गिरजाघर का निर्माण रोमनेस्क शैली में हुआ था। इसका निर्माण कार्य 13 वीं सदी में शुरू हुआ था [2][3][4]पर कुछ विद्वानों का यह मानना है यह गिरजाघर 11वीं सदी का है।[5][6][7][8][9]इसको नवारे के प्रमुख्य गिरजाघरों में से एक माना जाता है। [10][11] यह संत जान के निर्माण शास्त्रियों द्वारा बनाया गया था। संभावना है कि इसको पेदरो एकसीमिनाज़ के आदेश पर बनाया गया था,[3][12] यां फिर उसके उदार पिता के कहने पर बनाया गया।[13][14]

गैलरी[संपादित करें]

रेताबलोस
Retablo lateral de la Virgen del Rosario
Retablo mayor. 
Retablo lateral de San José

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. स्पेन के संस्कृति मंत्रालय का संरक्षित इमारतों के डेटाबेस (Database of protected buildings) (movable और non-movable) (स्पेनिश)।
  2. "Turismo Navarra - Iglesia de Gazólaz". नामालूम प्राचल |fechaacceso= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद); नामालूम प्राचल |yearacceso= की उपेक्षा की गयी (मदद); नामालूम प्राचल |citation= की उपेक्षा की गयी (मदद)
  3. De Lojendio, Luis María (1995). Encuentro, संपा॰. Rutas románicas en Navarra. पृ॰ 61. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 84-749-0378-5. नामालूम प्राचल |fechaacceso= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद); नामालूम प्राचल |citation= की उपेक्षा की गयी (मदद)
  4. Actas del séptimo Congreso Internacional de Estudios pirenaicos. 1983. पृ॰ 13. नामालूम प्राचल |citation= की उपेक्षा की गयी (मदद); नामालूम प्राचल |autor= की उपेक्षा की गयी (|author= सुझावित है) (मदद); नामालूम प्राचल |fechaacceso= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद)
  5. Clavería Arza, Carlos (1971). Imprenta Popular, संपा॰. Historia del Reino de Navarra. पृ॰ 600. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788470810022. नामालूम प्राचल |fechaacceso= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद); नामालूम प्राचल |citation= की उपेक्षा की गयी (मदद)
  6. De Madrazo, Pedro (1886). D. Cortezo y ca, संपा॰. Navarra y Logroño. पृ॰ 508. नामालूम प्राचल |fechaacceso= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद); नामालूम प्राचल |citation= की उपेक्षा की गयी (मदद)
  7. Naval, Francisco (1904). J. Sáenz, संपा॰. Elementos de arqueología y bellas artes para uso de universidades y seminarios. पृ॰ 233. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788470810022. नामालूम प्राचल |fechaacceso= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद); नामालूम प्राचल |citation= की उपेक्षा की गयी (मदद)
  8. Biurrun Sótil, Tomás (1936). El arte románico en Navarra: o, Las órdenes monacales, sistemas constructivos y monumentos cluniacenses, sanjuanistas, agustinianos, cistercienses y templarios. नामालूम प्राचल |editorial= की उपेक्षा की गयी (|publisher= सुझावित है) (मदद); नामालूम प्राचल |fechaacceso= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद); नामालूम प्राचल |citation= की उपेक्षा की गयी (मदद); नामालूम प्राचल |pagess= की उपेक्षा की गयी (मदद)
  9. Lampérez y Romea, Vicente (1999). Historia de la arquitectura cristiana espyearla en la edad media. पृ॰ 616. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 84-7846-905-2. नामालूम प्राचल |citation= की उपेक्षा की गयी (मदद); नामालूम प्राचल |editorial= की उपेक्षा की गयी (|publisher= सुझावित है) (मदद)
  10. Biurrun Sótil, Tomás (1936). El arte románico en Navarra: o, Las órdenes monacales, sistemas constructivos y monumentos cluniacenses, sanjuanistas, agustinianos, cistercienses y templarios. पृ॰ 425. नामालूम प्राचल |editorial= की उपेक्षा की गयी (|publisher= सुझावित है) (मदद); नामालूम प्राचल |fechaacceso= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद); नामालूम प्राचल |citation= की उपेक्षा की गयी (मदद)
  11. Biurrun Sótil, Tomás (1928). Inventario de la riqueza artística de la Diócesis de Pamplona. पृ॰ 152. नामालूम प्राचल |fechaacceso= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद); नामालूम प्राचल |citation= की उपेक्षा की गयी (मदद)
  12. Biurrun Sótil, Tomás (1936). El arte románico en Navarra: o, Las órdenes monacales, sistemas constructivos y monumentos cluniacenses, sanjuanistas, agustinianos, cistercienses y templarios. पृ॰ 160. नामालूम प्राचल |editorial= की उपेक्षा की गयी (|publisher= सुझावित है) (मदद); नामालूम प्राचल |fechaacceso= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद); नामालूम प्राचल |citation= की उपेक्षा की गयी (मदद)
  13. Biurrun Sótil, Tomás (1936). El arte románico en Navarra: o, Las órdenes monacales, sistemas constructivos y monumentos cluniacenses, sanjuanistas, agustinianos, cistercienses y templarios. पृ॰ 160. नामालूम प्राचल |editorial= की उपेक्षा की गयी (|publisher= सुझावित है) (मदद); नामालूम प्राचल |fechaacceso= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद); नामालूम प्राचल |citation= की उपेक्षा की गयी (मदद)
  14. Galdiano, Uranga (1973). Aranzadi, संपा॰. Arte medieval navarro: Arte gótico, Volumen 1; Volumen 4. पृ॰ 134. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788450055863. नामालूम प्राचल |fechaacceso= की उपेक्षा की गयी (|access-date= सुझावित है) (मदद); नामालूम प्राचल |citation= की उपेक्षा की गयी (मदद)

=बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]


निर्देशांक: 42°47′29.9″N 1°43′4.4″W / 42.791639°N 1.717889°W / 42.791639; -1.717889