ग़ालिब की हवेली
ग़ालिब की प्रतिमा | |
![]() | |
| स्थापित | 27 दिसंबर 2000[1] |
|---|---|
| अवस्थिति | |
| प्रकार | स्मारक संग्रहालय, जीवनी संग्रहालय |
| मान्यता | भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण |
| Key holdings | ग़ालिब की हस्तलिखित कविताएँ |
| स्वामी | दिल्ली सरकार |
| सार्वजनिक परिवहन पहुंच | चावड़ी बाज़ार मेट्रो स्टेशन |
ग़ालिब की हवेली भारत के पुरानी दिल्ली के चाँदनी चौक मोहल्ले में स्थित एक हवेली है। यह 19वीं शताब्दी के कवि ग़ालिब का निवास होता था और अब धरोहर स्थल है।[2] इसे गत मुग़ल काल में निर्मित किया गया था।
यह घर उसे हाकिम द्वारा दी गई थी, जो उनकी कविताओं का उत्साही था। 1869 में कवि की मृत्यु के बाद, हाकिम हर शाम वहाँ बैठता था और किसी को अंदर नहीं आने देता।[3]
इतिहास
[संपादित करें]ग़ालिब आगरा से आकर इस हवेली में लंबे समय के लिए रहे थे। इस हवेली में रहकर वह अपनी उर्दू और फ़ारसी दीवान लिखें। उनकी मृत्यु के वर्षों बाद, हवेली के अंदर 1999 तक दुकानें खुली रही, जिसके बाद सरकार ने इसका एक भाग पाकर नवीकरण किया। इसपर मुग़ल लखौरी ईंटें, बलुआ पत्थर और एक लकड़ी का द्वारा डालकर 19वीं शताब्दी की शैली में नवीकृत किया गया था।[2]
2000 को दिल्ली सरकार ने हवेली को एक स्थायी स्मारक संग्रहालय बनाया तथा अंदर में कवि और उसके समय के वस्तुओं डाले गए थे। वहाँ उनके पुस्तकों के साथ-साथ उनके हस्तलिखित कविताएँ भी हैं। संग्रहालय में कवि का एक यथार्थ प्रतिकृति है, जिसके हाथ में हुक़्क़ा है। ज़ौक़, ज़फ़र, मोमिन और ग़ालिब के अन्य समकालीन व्यक्तियों के चित्र भी हैं। 27 दिसंबर 2010 को, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने प्रसिद्ध मूर्तिकलाकार भगवान रामपुरे द्वारा निर्मित तथा कवि गुलज़ार द्वारा आयुक्त ग़ालिब की मूर्तिकला का अनावरण किया।[4][5] इसका ख़ाका भारत के राष्ट्रपति ज़ाकिर हुसैन द्वारा ग़ालिब का चित्र था।[6]
हवेली की दीवारें कवि के एक विशाल चित्र और उनके दोहों से सजाई गई हैं।
اگ رہا ہے در و دیوار سے سبزہ غاؔلب
ہم بیاباں میں ہیں اور گھر میں بہار آئی ہے
उग रहा है दर-ओ-दीवार से सब्ज़ा ग़ालिब
हम बयाबाँ में हैं और घर में बहार आई है
वास्तुकला
[संपादित करें]स्तंभों और ईंटों से निर्मित हवेली का बड़ा परिसर दिल्ली में मुग़ल साम्राज्य की स्मृति है। यह लखोरी ईंटों और चूने के गारे सहित पारंपरिक सामग्रियों से बनाया गया था।[7][8][9][10]
जानकारी
[संपादित करें]चावड़ी बाज़ार मेट्रो स्टेशन और दिल्ली जंक्शन रेलवे स्टेशन के निकट स्थित, हवेली में प्रवेश निःशुल्क है तथा सोमवार को छोड़कर 11 AM से 6 PM तक सब के लिए खुला है।
गैलरी
[संपादित करें]- ग़ालिब की वंशावली
- हवेली की नवीकृत छ्त
- ग़ालिब की दीवान का एक पन्ना "यह ना थी हमारी क़िस्मत..."
- ग़ालिब की स्मृति में डाक टिकट, पाकिस्तान सरकार
- ग़ालिब की एक पुस्तक
- चौपड़ का खेल, ग़ालिब का मनपसंद शौक़
- अपने ख़ाली समय में ग़ालिब का चित्र
- दीवार पर दोहा
यह भी देखें
[संपादित करें]संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Ghalib ki Haveli". मूल से से 20 नवंबर 2013 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 22 January 2014.
- 1 2 "Ghalib ki Haveli". मूल से से 25 December 2018 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 22 January 2014.
- ↑ "Lost in the Chaos of Chandni Chowk, Mirza Ghalib's 300-Year-Old Haveli is a Forgotten Treasure". The Better India. 2016-12-27. अभिगमन तिथि: 2020-07-27.
- ↑ "Ghalib's marble bust unveiled". The Times of India. 27 December 2010. मूल से से 22 January 2014 को पुरालेखित।.
- ↑ "Profile of Sculptor Bhagwan Rampure". indiaart.com. अभिगमन तिथि: 2024-10-04.
- ↑ "Ghalib's Legacy". Sufi News. 3 January 2013.
- ↑ "Haveli to speak of a history lost in time". Times of India. 21 December 2015.
- ↑ "5. Havelis of Kucha pati Ram, in South Shahjahanabad" (PDF). World Monument Fund. मूल से (PDF) से 23 May 2024 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 27 November 2017.
- ↑ "Revival of Hemu's Haveli on the cards". Yahoo News India. 6 August 2015.
- ↑ "A Jail, school and orphanage: Bawana's fortress gets another makeover". Hindustan Times. 21 February 2017. अभिगमन तिथि: 26 August 2018.
