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गरम दल

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गरम दल भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के अन्दर ही सदस्यों के मतभेद के कारण उपजा एक धड़ा था जिसके नेता लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और विपिनचंद्र पाल थे। बंगाल विभाजन के बाद काँग्रेस के नरम दल के लोगों के साथ इस दल के स्पष्ट विरोध सामने आये।[1]स्वदेशी आंदोलन की शुरूआत बंगाल विभाजन के परिणामस्वरूप (1905ई) हुई जिसमें ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार किया गया और स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहित किया गया। गरम दल नेता अरविंद घोष, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, विपिन चंद्र पाल तथा लाल लाजपत राय स्वदेशी आंदोलन को पूरे देश में लागू करना चाहतें थे जबकि नरमपंथ सिर्फ इसे बंगाल तक सीमित रखना चाहतें थे। मतभेद बढ़तें गये तथा 1907 के कांग्रेस के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस ’नरमदल’ व गरमदल’ में विभाजित हो गई। [2]गरम दल वाले वन्देमातरम् को राष्ट्र गान बनाना चाहते थे जबकि नरम दल वाले जन गण मन के समर्थक थे।

सन्दर्भ

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  1. अग्रवाल, मीना. लाला लाजपत राय. डायमंड पाकेट बुक्स. p. 42. 4 मार्च 2016 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 4 अगस्त 2015.
  2. चारण, अमित सिंह (winter 2018). {{cite journal}}: Check date values in: |date= (help); Cite journal requires |journal= (help); Missing or empty |title= (help)

इन्हें भी देखें

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बाहरी कड़ियाँ

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