गणपति चन्द्र गुप्त

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डॉ. गणपतिचन्द्र गुप्त (जन्म : १५ जुलाई सन् १९२८ ई. मंढ़ा (सुरेरा) राजस्थान में -- ) हिन्दी साहित्यकार थे। उन्होने आलोचक के रूप में ख्याति अर्जित की।

डॉ गणपतिचन्द्र गुप्त का जन्म १५ जुलाई १९२८ को राजस्थान के मंढा (सुरेरा) में हुआ था। उन्होने पंजाब विश्वविद्यालय से एम॰ए॰ (हिन्दी), पी-एच.डी. एवं डी. लिट् की उपाधियाँ प्राप्त कीं। डी लिट के लिए उन्होने महाकवि बिहारी पर शोधप्रबन्ध लिखा। वे पंजाब विश्वविद्यालय, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, रोहतक विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय एवं आगरा विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे तथा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एवं कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में कुलपति के पद पर भी कार्य किया।

रचनाएँ[संपादित करें]

‘साहित्य-विज्ञान’, ‘हिन्दी साहित्य का वैज्ञानिक इतिहास’, ‘रस-सिद्धान्त का पुनर्विवेचन’, ‘साहित्यिक निबन्ध’, ‘हिन्दी-काव्य में शृंगार-परम्परा’, ‘महाकवि बिहारी’, ‘श्री सत्य साईं बाबा : व्यक्तित्व एवं संदेश’, ‘शिरडी साईं बाबा : दिव्य महिमा’ आदि।