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गंगा देवी (चित्रकार)

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गंगा देवी (1928 – 21 जनवरी 1991)[1] एक भारतीय चित्रकार थीं,[2] जिन्हें मधुबनी चित्रकला परंपरा की प्रमुख कलाकारों में से एक माना जाता है। उन्हें मधुबनी चित्रकला को भारत के बाहर लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है।

उनका जन्म 1928 में बिहार के मिथिला क्षेत्र में कायस्थ परिवार में हुआ था और उन्होंने पारंपरिक चित्रकला शैली अपनाई, जिसमें विशेष रूप से 'कचनी' (रेखाचित्र शैली) में महारत हासिल थी। उन्होंने अपनी कला के साथ विदेश यात्रा की और अमेरिका में आयोजित 'फेस्टिवल ऑफ इंडिया' का हिस्सा बनीं। इस दौरान उन्होंने 'अमेरिका सीरीज़' के तहत कई चित्र बनाए, जिनमें प्रमुख हैं 'मॉस्को होटल', 'फेस्टिवल ऑफ अमेरिकन फोक लाइफ' और 'रोलर कोस्टर की सवारी'।

भारत सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय मास्टर क्राफ्ट्समैन पुरस्कार से सम्मानित किया और 1984 में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्मश्री' से नवाज़ा।[3]

प्रसिद्ध कोहबर घर म्यूरल

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1980 के दशक में, गंगा देवी ने दिल्ली के क्राफ्ट्स म्यूज़ियम में 'कोहबर घर' (विवाह मंडप) नामक प्रसिद्ध भित्तिचित्र (म्यूरल) बनाया। उन्होंने यह म्यूरल तीन से चार महीनों में पूरा किया, जबकि वे दिल्ली के एक अस्पताल में कैंसर के इलाज के दौरान कीमोथेरेपी ले रही थीं।

हालांकि, यह म्यूरल 2015 में संग्रहालय के नवीनीकरण कार्य के दौरान तोड़ा दिया गया।

प्रारंभिक जीवन

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जब गंगा देवी छोटी थीं, तब उनकी माँ ने उन्हें पहली बार एक ब्रश दिया, जो चावल के तिनकों और साड़ी के किनारे से खींचे गए धागों से बना था। उन्होंने चिमनी की कालिख या मिट्टी के चूल्हे के नीचे जमी कालिख को स्याही के रूप में इस्तेमाल किया। यह आमतौर पर गाय के मूत्र, अरबी गोंद या कभी-कभी बकरी के दूध के साथ मिलाया जाता था।

उन्होंने यह कला अपनी बहनों, चाची, और दादी-नानी से सीखी। गाँव में कागज की कमी के कारण, वे अपने स्कूल की नोटबुक के पन्नों को कपड़े पर चिपकाकर अभ्यास करती थीं।

गंगा देवी का चयन अमेरिका में 'फेस्टिवल ऑफ इंडिया' के लिए हुआ, जहाँ उन्होंने भारत की कला का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने रूस और जापान में भी भारतीय कला को प्रदर्शित किया।

अपने अनुभवों को उन्होंने चित्रों के माध्यम से व्यक्त किया, जिसके लिए भारत सरकार ने उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया।

1980 के दशक में, जब उन्हें कैंसर हुआ, तो वे मिथिला वापस नहीं जा सकीं, क्योंकि उन्हें नियमित कीमोथेरेपी की आवश्यकता थी।

प्रमुख कृतियाँ

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सन्दर्भ[4]

रामायण चित्र श्रृंखला

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गंगा देवी ने भारतीय महाकाव्य 'रामायण' पर आधारित एक चित्र श्रृंखला बनाई, जिसमें उन्होंने कोमल और सूक्ष्म रंगों का उपयोग किया।

'मानव जीवन' (जीवन चक्र) श्रृंखला

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इस श्रृंखला में उन्होंने गाँव की एक महिला के जीवन चक्र को विस्तार से चित्रित किया।

अमेरिका से प्रेरित चित्र

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जब गंगा देवी अमेरिका गईं, तो उन्होंने अपने अनुभवों को चित्रों में ढाला। यह उनकी सजीव अवलोकनों की एक श्रृंखला थी।

व्यक्तिगत जीवन

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गंगा देवी का वैवाहिक जीवन कष्टदायक रहा। बांझपन के कारण उनके पति ने उन्हें छोड़ दिया और दूसरी शादी कर ली, जिससे उन्होंने सबकुछ खो दिया।

हालांकि, उनकी जिंदगी तब बदल गई जब एक फ्रांसीसी कला संग्राहक ने उनसे कई पेंटिंग बनाने के लिए कमीशन दिया। यह सहयोग उनके करियर के विस्तार का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।

सन्दर्भ

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  1. "Ganga Devi - Library of Congress". id.loc.gov. अभिगमन तिथि: 10 December 2022.
  2. Jyotindra Jain (1989). "Ganga Devi: Tradition and expression in Madhubani painting". Third Text. 3 (6): 43–50. डीओआई:10.1080/09528828908576213.
  3. "Padma Awards" (PDF). Ministry of Home Affairs, Government of India. 2015. मूल से (PDF) से 15 October 2015 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 21 July 2015.
  4. Goyal, Anuradha (2015-05-04). "Mithila's Madhubani Artist Ganga Devi & Her Paintings". Inditales (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2019-04-06.