ख़ुर्द और कलाँ

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ख़ुर्द और कलाँ फ़ारसी भाषा के शब्द हैं जो हिन्दी में और भारतीय उपमहाद्वीप में कई सन्दर्भों में पाए जाते हैं, विशेषकर जगहों के नामों में। "ख़ुर्द" का मतलब "छोटा" होता है और "कलाँ" का मतलब बड़ा होता है।[1][2] इन नामों को मुग़लिया ज़माने से प्रयोग किया जा रहा है। छोटी आबादी वाले गांवों-कस्बों के पीछे खुर्द शब्द लगाया गया । फ़ारसी के इस शब्द का अर्थ होता है छोटा। यह खुर्द संस्कृत के क्षुद्र से ही बना है जिसमें लघु, छोटा या सूक्ष्मता का भाव है। देश भर में खुर्द धारी गांवों की तादाद हजारों में है।

सी तरह कई गांवों के साथ कलां शब्द जुड़ा मिलता है जैसे कोसी कलां , बामनियां कलां । जिस तरह खुर्द शब्द छोटे या लघु का पर्याय बना उसी तरह कलां शब्द बड़े या विशाल का पर्याय बना। कलां का प्रयोग लगभग उसी अर्थ में होता था जैसे भारत के लिए प्राचीनकाल में बृहत्तर भारत शब्द का प्रयोग होता था जिसमें बर्मा से लेकर ईरान तक का समूचा भूक्षेत्र आता था।  हालांकि किसी यात्रावृत्त में हिन्दुस्तान कलां जैसा शब्द नहीं मिलता।  ग्रेटर ब्रिटेन की बात चलती थी तो उसके उपनिवेशों का संदर्भ निहित होता था। इसी तरह कलां शब्द की अर्थवत्ता भी ग्रामीण आबादियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

लां मूलतः फ़ारसी  का शब्द है जिसका मतलब होता है वरिष्ठ, बड़ा, दीर्घ या विशाल। वैसे इसकी व्युत्पत्ति अज्ञात है। कुछ संदर्भों में इसे सेमेटिक भाषा परिवार का बताया जाता है और इसे ईश्वर की महानता से जोड़ा जाता है। कलां की अर्थवत्ता के आधार पर यह ठीक है मगर इसकी पुष्टि किसी सेमेटिक धातु से नहीं होती। कलां शब्द का प्रयोग सिर्फ स्थानों का रुतबा बताने के लिए ही नहीं होता था बल्कि व्यक्तियों के नाम भी होते थे जैसे मिर्जा कलां या अमीर कलां अल बुखारी जिसका मतलब बुखारा का महान अमीर होता है। जाहिर है यहां कलां शब्द का अर्थ महान है।  

मुस्लिम शासनकाल में बसाहटों के नामकरण की महिमा यहीं खत्म नहीं होती। कई गांवों के नामों के साथ बुजुर्ग शब्द लगा मिलता है जैसे सोनपिपरी बुजुर्ग । जाहिर है हमनाम गांव से फर्क करने के लिए एक बसाहट को वरिष्ठ मानते हुए उसके आगे बुजुर्ग लगा दिया गया और दूसरा हुआ सोनपिपरी खुर्द । ऐसी कई ग्रामीण बस्तियां हजारों की संख्या में हैं। इसी तरह किसी गांव के विशिष्ट दर्जे को देखते हुए उसके साथ जागीर शब्द लगा दिया जाता था । इसका अर्थ यह हुआ कि सालाना राजस्व वसूली से उस गांव का हिस्सा सरकारी ख़जाने में नहीं जाएगा अथवा उसे आंशिक छूट मिलेगी। मुग़लों के दौर में प्रभावी व्यक्तियों को अथवा पुरस्कार स्वरूप सामान्य वर्ग के लोगो को भी गांव जागीर में दिये जाते थे। मगर उसी नाम के अन्य गांवों से फ़र्क करने के लिए नए बने जागीरदार उसके आगे जागीर जोड़ देते थे जैसे हिनौतियाऔर हिनौतिया जागीर ।

जगहों के नामों में[संपादित करें]

उत्तर भारत, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में कई ऐसे गाँव, शहर और मोहल्ले हैं जो एक जगह शुरू हुए और फिर फैलकर उनके दो हिस्से हो गए - एक मुख्य या बड़ा हिस्सा और एक छोटा हिस्सा। ऐसे में बड़े हिस्से के नाम के पीछे "कलाँ" कहा जाने लगा और छोटे हिस्से के पीछे "ख़ुर्द"। इसके इस क्षेत्र में हज़ारों उदहारण हैं -

कभी-कभी दो गाँव और बस्तियां (एक ख़ुर्द और दूसरी कलाँ) अलग तो होती हैं लेकिन बढ़-बढ़कर एक दुसरे से मिलकर एक ही हो जाती हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में रिवाज है के यह बात स्पष्ट की जाए के ख़ुर्द और कलाँ दोनों की बात हो रही है और उन्हें "ख़ुर्द कलां कहा जाता है -

  • उत्तर प्रदेश के बरेली ज़िले के बिठीरी-चैनपुर मंडल का मऊदी ख़ुर्द कलाँ गाँव
  • उत्तर प्रदेश के इटावा ज़िले के महेवा मंडल का मुरियाना कलाँ ख़ुर्द गाँव

अन्य प्रयोग[संपादित करें]

इन दोनों शब्दों का प्रयोग कुछ और सन्दर्भों में भी होता है -

  • ख़ुर्दबीन - सूक्ष्मबीन (माइक्रोस्कोप) के लिए एक और नाम है
  • ख़ुर्द-ए-शीशा - ऐसे व्यक्ति को कहा जाता है जिसमें बहुत सा छुपा हुआ कमीनापन हो, जिस तरह शीशे का चूरा छूने से वह खाल में घुसकर तक़लीफ़ देता है और निकालना मुश्किल होता है

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "शब्द का अर्थ खोजें: खुर्द". पुस्तक शब्दकोष. http://pustak.org/home.php?mean=52488. अभिगमन तिथि: ४ मई २०११. "... खुर्द वि० [फा०] छोटा। लघु। ‘‘कलाँ’’ का उल्टा। ..." 
  2. "शब्द का अर्थ खोजें: कलाँ". पुस्तक शब्दकोष. http://pustak.org/home.php?mean=52488. अभिगमन तिथि: ४ मई २०११. "... कलाँ वि० [फा०] १. आकार, विस्तार आदि में बड़ा। दीर्घाकार। २. वय में बड़ा। ..."