खड़ीन

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खड़ीन खेत के किनारे सिद्ध-पाल बाँधकर वर्षा-जल को कृषि भूमि पर संग्रह करने तथा इस प्रकार संग्रहीत जल से कृषि भूमि में पर्याप्त नमी पैदाकर उसमें फसल उत्पादन करने की एक परम्परागत तकनीक है।

मरुस्थल में जल-संग्रह तकनीकों का विवरण बिना खड़ीन के नाम से अधूरा है। पश्चिमी राजस्थान के जल विशेषज्ञ भी इस तकनीक को जल-संग्रह की महत्त्वपूर्ण तकनीक के रूप में देखते हैं तथा इसे आज के परिप्रेक्ष्य में भी जरूरी मानते हैं। खड़ीन को धोरा भी कहा जाता है।[1] आजकल सीमेंट की दीवारों का प्रयोग होने लगा है,जिससे पानी के रिसने की समस्या कम हो गई है.[2]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "संग्रहीत प्रति". मूल से 3 जुलाई 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 26 अक्तूबर 2018.
  2. "संग्रहीत प्रति". मूल से 27 अक्तूबर 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2 नवंबर 2018.