क्वांटम रॉबिन

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European Robin

यूरोपीय रॉबिन पक्षी अपने प्रवास के स्वभाव के कारण " क्वांटम रॉबिन " के रूप में जाना जाता है। ये पक्षी अपने प्रवास के लिए क्वांटम यांत्रिकी के सिद्धांतों का उपयोग करते है।

वर्णन[संपादित करें]

यूरोपीय रॉबिन एक छोटा कीटभक्षी गौरैया पक्षी है जो लंबाई में 12.5-14.0 सेमी के आसपास है। पुरुष और महिला रंगाई में समान होते हैं, इनका चेहरा भूरा रंग, स्तन नारंगी और सफेद रंग का पेट होता है। यह यूरोप भर में, पूर्वी पश्चिमी साइबेरिया और दक्षिण उत्तरी अफ्रीका में पाया जाता है। रॉबिन दक्षिण अल्जीरिया और अटलांटिक द्वीपों पर, पश्चिमी साइबेरिया के पूर्वी यूरेशिया में होता है। दक्षिण पूर्व में यह काकेशस सीमा तक पहुँच जाता है। ब्रिटिश रोबिन्स अत्यधिक निवासी होते है, लेकिन एक छोटे से अल्पसंख्यक, आमतौर पर महिला, सर्दियों के दौरान दक्षिणी यूरोप की ओर पलायन करते है। स्कैंडिनेवियाई और रूसी रोबिन्स कठोर सर्दियों से बचने के लिए ब्रिटेन और पश्चिमी यूरोप की ओर पलायन करते है। इन प्रवासियों को अपने शरीर के भूरे स्वर और नारंगी स्तन से पहचाना जा सकता है।

प्रवास- तंत्र[संपादित करें]

यह यूरोपीय रॉबिन पक्षी बड़े ही अनोखे तरिके से अपने मंज़िल के दिशा पता लगा लेते है। रॉबिन की एवियन चुंबकीय कंपास बड़े पैमाने पर शोध और दृष्टि आधारित मग्नेटोरेसेप्शन का उपयोग करता है, जिसमें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से दिशा का बोध कराने के लिए रॉबिन चिड़िया की क्षमता, आखों में प्रवेश प्रकाश से प्रभावित होता है। रॉबिन के चुंबकीय भावना शारीरिक तंत्र की पूरी तरह समझ नहीं है, लेकिन इलेक्ट्रॉन स्पिन के प्रमात्रा उलझन शामिल है। रॉबिन पक्षी के आखों के दृष्टिपटल में "क्रीपटोक्रोम" नामक प्रोटीन अणुऐं पाए जाते है जो प्रकाश से सक्रिय होते है। यह प्रमात्रा उलझाव पैदा करता है। जब रोशनी रोबिन पक्षी के दृष्टिपटल में गिरता है तो प्रकाश प्रोटीन अणु में प्रस्तुत परमाणु कण के इलेक्ट्रॉनों की जोड़ी में से एक को बाहर दस्तक कर देता है। लेकिन यह किसी तरह एक अनोखे तंत्र के सहारे, अपनी जोड़ी से जुड़ा लगा रहता है। और वह तंत्र है-प्रमात्रा उलझन। क्योंकि यह दोनों कुछ दूरी से अलग होते है, इस प्रकार पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र उन्हें प्रभावित करता है, जो रासायनिक समन्वय को प्रभावित कर मस्तिष्क में पहुंचने वाले संकेतों में फेरबदल करता है। इसलिए चुंबकीय क्षेत्र के कारण मस्तिष्क में उत्पादित संकेतों से दिशा का पता लगा पाते है।

क्वांटम उलझाव[संपादित करें]

प्रमात्रा उलझाव का तंत्र बड़ा ही विचित्र तथा आकर्षक है। अंग्रेज़ी में "प्रमात्रा यान्त्रिकी" को "क्वाण्टम मॅकैनिक्स" (quantum mechanics) और "प्रमात्रा उलझाव" को "क्वाण्टम ऍन्टैन्गलमॅन्ट" (quantum entanglement) कहते हैं। प्रमात्रा उलझन, प्रमात्रा यांत्रिकी के अजीब घटनाओं में से एक है जो कणों और उपपरमाण्विक कणों के व्यवहार का वर्णन करते है। कण एक ही समय (superposition कहा जाता है) में दो स्थानों पर हो सकता है और आम तौर पर ऐसे मायनों में कार्य कर सकते हैं जो हमे हमारे रोजमर्रा की दूनिया में देखने की बिलकूल भी उम्मीद नहीं होती। प्रमात्रा उलझन ऐसी घटना है जहां कणों के व्यवहार दूरी की परवाह किए बिना जुड़े हुए होते हैं जहां एक कण पर कोई कार्रवाई का प्रभाव दूसरे पर प्रदर्शन होता है। उदाहरण:- आपने एक वस्तु को पृथ्वी पर रखा है और एक अन्य को चाँद पर, यदि आपने पृथ्वी पर रखे वस्तु पर कोई कार्रवाई की तो उसका प्रभाव तुरन्त चाँद पर रखे वस्तु पर पड़ेगा। प्रमात्रा उलझाव में कई कणों इस तरह से एक साथ जुड़े हुए हैं कि एक कण की क्वांटम राज्य की माप अन्य कणों के संभावित राज्यों मात्रा निर्धारित करता है। यह एक बहुत ही रहस्यमय, अजीब प्रभाव है कि आइंस्टीन ने स्वयं इसे "एक दूरी पर डरावना कार्रवाई" कहा है। वैज्ञानिक अब तक पूरी तरह से इसे समझने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वास्तव में कणों के इस विचित्र व्यवहार को समझ पाना इतना कठिन है कि अगर किसी व्यक्ति ने इसे पूरी तरह से समझ लिया तो वह महाज्ञानी कहलाया जाएगा।

उपयोग[संपादित करें]

महावैज्ञानिक रिचर्ड फेनमैन ने स्वयं कहा था कि कोई व्यक्ति "क्वांटम यांत्रिकी" को पूरी तरह नहीं समझ सकता। लेकिन यह विचित्र प्रभाव के कई उपयोग पाए गए है, जैसे यूरोपीय रॉबिन के प्रवास में यह मदद करता है, यह कंप्यूटिंग के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है जो बड़े से बड़े परिगणनाओं को सेकंड्स में कर सकता है तथा नए प्रमाणों से पाया गया है कि पौधें प्रमात्रा उलझाव का उपयोग कर अपनी ऊर्जा प्राप्त करते है। यह धारणा कि नाजूक क्वांटम घटनाऐं एक जीवित कोशिका की गर्म गंदा जटिल वातावरण के अंदर बनाए रखा जा सकता है कोई चमत्कारी से कम नहीं है।

संदर्भ[संपादित करें]

1. http://en.wikipedia.org/wiki/European_Robin

2. http://io9.com/5729061/birds-might-actually-be-using-quantum-mechanics-to-find-their-way-through-the-skies

3. http://www.symmetrymagazine.org/article/january-2014/quantum-entanglement