क्लब (हथियार)
| क्लब (Club) | |
|---|---|
| उत्पत्ति का मूल स्थान | विश्वव्यापी |
| उत्पादन इतिहास | |
| संस्करण | गदा, ट्रेंच क्लब, पुलिस बैटन, कानाबो |
क्लब (अंग्रेज़ी: Club), जिसे हिंदी में आमतौर पर डंडा, लाठी, मुगदर या गदा भी कहा जाता है, मानव इतिहास का सबसे पुराना, सरलतम और सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला हथियार है। यह मूल रूप से एक 'ब्लंट फोर्स' हथियार है, जिसका उद्देश्य दुश्मन को काटना या छेदना नहीं, बल्कि भारी आघात पहुँचाकर उसे कुचलना या बेहोश करना होता है। एक मानक क्लब का एक सिरा (जहाँ से इसे पकड़ा जाता है) पतला होता है, जबकि दूसरा सिरा (जिससे प्रहार किया जाता है) चौड़ा और भारी होता है, ताकि प्रहार के समय अधिकतम बल उत्पन्न किया जा सके।[1]
इतिहास और प्रागैतिहासिक उत्पत्ति
[संपादित करें]क्लब का इतिहास उतना ही पुराना है जितना कि स्वयं मानव प्रजाति का। पुरातात्विक साक्ष्यों से पता चलता है कि पाषाण युग के दौरान होमो सेपियन्स और निएंडरथल दोनों ने शिकार करने और आपसी संघर्ष के लिए भारी लकड़ियों और जानवरों की बड़ी हड्डियों (जैसे जानवरों के जांघ की हड्डी) का इस्तेमाल क्लब के रूप में किया था।
समय के साथ, जैसे-जैसे मानव सभ्यता का विकास हुआ, क्लब के डिज़ाइन में भी सुधार हुआ। लकड़ियों को तराश कर उन्हें अधिक एर्गोनोमिक बनाया गया और उनकी मारक क्षमता बढ़ाने के लिए उनमें नुकीले पत्थर या जानवरों के दाँत जड़े जाने लगे।[2]
यांत्रिकी और भौतिकी
[संपादित करें]क्लब का कार्य सिद्धांत भौतिकी के 'कोणीय संवेग' और 'द्रव्यमान केंद्र' पर आधारित है।
- एक अच्छे क्लब का वज़न समान रूप से वितरित नहीं होता है; इसका अधिकांश द्रव्यमान प्रहार करने वाले सिरे पर केंद्रित होता है।
- जब कोई योद्धा क्लब को घुमाता है, तो हथियार की लंबाई एक 'लीवर' के रूप में कार्य करती है। प्रहार करने वाले भारी सिरे की गति बहुत अधिक हो जाती है, जो लक्ष्य से टकराने पर अत्यधिक 'गतिज ऊर्जा' उत्पन्न करती है। इस आघात से दुश्मन की हड्डियां टूट सकती हैं या उसे गंभीर आंतरिक चोटें आ सकती हैं, भले ही उसने कोई चमड़े या कपड़े का कवच क्यों न पहना हो।[3]
विश्व भर में क्लब के प्रमुख प्रकार
[संपादित करें]विभिन्न संस्कृतियों ने अपनी भौगोलिक और युद्ध संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार क्लब के अलग-अलग रूप विकसित किए:

- गदा: यह क्लब का एक उन्नत और अधिक घातक रूप है। इसमें लकड़ी या धातु के हैंडल के सिरे पर धातु या पत्थर का एक भारी गोल सिरा लगा होता है। भारतीय उपमहाद्वीप में 'गदा' को भगवान हनुमान और भीम का मुख्य हथियार माना जाता है। मध्ययुगीन यूरोप में शूरवीरों के भारी कवच को तोड़ने के लिए लोहे की गदा का भारी उपयोग किया जाता था।
- कानाबो: यह जापान के समुराई योद्धाओं द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक भारी लकड़ी का क्लब था, जिसमें लोहे के नुकीले स्टड लगे होते थे।
- मैकवाहुटल: एज़्टेक सभ्यता द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला यह एक सपाट लकड़ी का क्लब था, जिसके किनारों पर ओब्सीडियन (ज्वालामुखी कांच) के अत्यधिक धारदार ब्लेड लगे होते थे। यह इतना घातक था कि यह दुश्मन के सिर को धड़ से अलग कर सकता था।
- ट्रेंच क्लब: प्रथम विश्व युद्ध की खाइयों की 'नज़दीकी मुठभेड़' में सैनिकों ने लकड़ी के डंडों पर लोहे की कीलें या धातु के गियर लगाकर इन कामचलाऊ क्लबों का भारी इस्तेमाल किया था।[4]
आधुनिक युग में उपयोग
[संपादित करें]आधुनिक युद्ध में आग्नेयास्त्रों के आने के बाद सैन्य हथियार के रूप में क्लब का उपयोग काफी हद तक समाप्त हो गया है। हालाँकि, यह आज भी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के पास बैटन या लाठी के रूप में जीवित है। इसका उपयोग मुख्य रूप से दंगा नियंत्रण और आत्मरक्षा के लिए एक गैर-घातक हथियार के रूप में किया जाता है। आधुनिक बैटन लकड़ी के बजाय पॉली कार्बोनेट या एल्यूमीनियम से बनाए जाते हैं।[5]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Inter-group violence among early Holocene hunter-gatherers of West Turkana, Kenya"
- ↑ Ferrill, Arther (1985). The Origins of War: From the Stone Age to Alexander the Great. Thames and Hudson. pp. 18-21. ISBN 978-0500250938.
- ↑ Smith, John M. (2008). "The Biomechanics of Blunt Force Trauma in Ancient Warfare". Journal of Historical Martial Arts. 12 (3): 45–52.
- ↑ "leangle – Definition of leangle in English by Oxford Dictionaries"
- ↑ "Notes on the Sherlock Holmes story The Bruce Partington Plans"[मृत कड़ियाँ]
