क्रिया विशेषण और उसके भेद

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

जिन शब्दों से क्रिया की विशेषता का पता चलता है उन्हें क्रियाविशेषण कहते हैं। जैसे - वह धीरे-धीरे चलता है। इस वाक्य में चलता क्रिया है और धीरे-धीरे उसकी विशेषता।

इसके चार प्रकार है :

स्थानवाचक[संपादित करें]

  • जो अविकारी शब्द किसी क्रिया के व्यापार-स्थान का बोध कराते हैं, उन्हें स्थानवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं।
  • जैसे- यहाँ, वहाँ, कहाँ, जहाँ, सामने, नीचे, ऊपर, आगे, भीतर, बाहर आदि।

उदाहरण- कनिका यहाँ चल रही है। इस वाक्य में "यहाँ" चल क्रिया के व्यापार-स्थान का बोध करा रही है।

कालवाचक[संपादित करें]

  • जो अविकारी शब्द किसी क्रिया के होने का समय बतलाते हैं, उन्हें कालवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं।
  • जैसे- परसों, पहले, पीछे, कभी, अब तक, अभी-अभी, बार-बार।

परिमाणवाचक[संपादित करें]

  • जो अविकारी शब्द किसी क्रिया के परिमाण अथवा निश्चित संख्या का बोध कराते हैं, उन्हें परिमाणवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं।
  • जैसे- बहुत, अधिक,अधिकाधिक पूर्णतया, सर्वथा, कुछ, थोड़ा, काफ़ी, केवल, यथेष्ट, इतना, उतना, कितना, थोड़ा-थोड़ा, तिल-तिल, एक-एक करके, आदि।

रीतिवाचक[संपादित करें]

  • जो शब्द किसी क्रिया की रीति का बोध कराए, वह रीतिवाचक क्रियाविशेषण कहलाते है।
  • वधु पक्ष द्वारा सुविवाह की रीति को तोड़ने की एवज में वर पक्ष ने वधु पक्ष से नुकसान लिया, इसमें सुविवाह रीतिवाचक क्रियाविशेषण का बोध करा रहा है