क्रिया विशेषण और उसके भेद

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जिन शब्दों से क्रिया की विशेषता का पता चलता है उन्हें कविशेषण कहते हैं। जैसे - वह धीरे - धीरे चलता है। इस वाक्य में चलता क्रिया है और धीरे - धीरे उसकी विशेषता।

स्थानवाचक[संपादित करें]

  • जो अविकारी शब्द किसी क्रिया के व्यापार-स्थान का बोध कराते हैं, उन्हें स्थानवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं।
  • जैसे- यहाँ, वहाँ, कहाँ, जहाँ, तहाँ, सामने, नीचे, ऊपर, आगे, भीतर, बाहर आदि।

कालवाचक[संपादित करें]

  • जो अविकारी शब्द किसी क्रिया के व्यापार का समय बतलाते हैं, उन्हें कालवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं।
  • जैसे- आज, कल, परसों, पहले, पीछे, अभी, कभी, सदा, अब तक, अभी-अभी, लगातार, बार-बार, प्रतिदिन आदि।

परिमाणवाचक[संपादित करें]

  • जो अविकारी शब्द किसी क्रिया के परिमाण अथवा निश्चित संख्या का बोध कराते हैं, उन्हें परिमाणवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं।
  • जैसे- बहुत, अधिक, पूर्णतया, सर्वथा, कुछ, थोड़ा, काफ़ी, केवल, यथेष्ट, इतना, उतना, कितना, थोड़ा-थोड़ा, तिल-तिल, एक-एक करके आदि।

रीतिवाचक[संपादित करें]

  • जो अविकारी शब्द किसी क्रिया की रीति का बोध कराते हैं, उन्हें रीतिवाचक क्रियाविशेषण कहते हैं।
  • जैसे- सचमुच, ठीक, अवश्य, कदाचित्, यथासम्भव, ऐसे, वैसे, सहसा, तेज़, ठीक, सच, अत:, इसलिए, क्योंकि, नहीं, मत, कदापि, तो, हो, मात्र, भर आदि।