कौशाम्बी जिला

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कौशांबी
—  जिला  —
समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०)
देश Flag of India.svg भारत
राज्य उत्तर प्रदेश
ज़िला कौशांबी
जनसंख्या 14,150 (2001 के अनुसार )
क्षेत्रफल
ऊँचाई (AMSL)

• 90 मीटर (295 फी॰)

निर्देशांक: 25°32′N 81°23′E / 25.53°N 81.38°E / 25.53; 81.38 कौशांबी भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश का एक जिला है। मंझनपुर इसका मुख्यालय है। बौद्ध भूमि के रूप में प्रसिद्ध कौशांबी उत्तर प्रदेश राज्य का एक ज़िला है। कौशांबी, बुद्ध काल की परम प्रसिद्ध नगरी, जो वत्स देश की राजधानी थी। इसका अभिज्ञान, तहसील मंझनपुर ज़िला इलाहाबाद में प्रयाग से 24 मील पर स्थित कोसम नाम के ग्राम से किया गया है। इस जिले में स्थितभरवारी सबसे घनी आबादी वाला छोटा सा शहर है जो कि खरीदारी के लिए मशहूर है। सबसे नजदीक वाला रेलवे स्टेशन भरवारी ही है जहां पर महाबोधि जैसी सुपरफास्ट ट्रेन का स्टॉपेज है। जो कि कौशांबी को बुद्ध सर्किट से जोड़ता है ।ऐतिहासिक दृष्टि से भी कौशांबी काफी महत्वपूर्ण है। यहाँ स्थित प्रमुख पर्यटन स्थलों में शीतला मंदिर, दुर्गा देवी मंदिर, प्रभाषगिरी और राम मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है। इलाहाबाद के दक्षिण-पश्चिम से 63 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कौशांबी को पहले कौशाम के नाम से जाना जाता था। यह बौद्ध व जैनों का पुराना केंद्र है। पहले यह जगह वत्स महाजनपद के राजा उदयन की राजधानी थी। माना जाता है कि बुद्ध छठें व नौवें वर्ष यहाँ घूमने के लिए आए थे। जिले का मुख्यालय मंझनपुर में है।

प्राचीनता[संपादित करें]

पुराणों के अनुसार हस्तिनापुर नरेश निचक्षु ने, जो राजा परीक्षित के वंशज (युधिष्ठिर से सातवीं पीढ़ी में) थे, हस्तिनापुर के गंगा द्वारा बहा दिए जाने पर अपनी राजधानी वत्स देश की कौशांबी नगरी में बनाई थी—अधिसीमकृष्णपुत्रो निचक्षुर्भविता नृपः यो गंगयाऽपह्नते हस्तिनापुरे कौशंव्यां निवत्स्यति। इसी वंश की 26वीं पीढ़ी में बुद्ध के समय में कौशांबी के राजा उदयन थे। इस नगरी का उल्लेख महाभारत में नहीं है, फिर भी इसका अस्तित्व ईसा से कई सदियों पूर्व था। गौतम बुद्ध के समय में कौशांबी अपने ऐश्वर्य के मध्याह्नाकाल में थी। जातक कथाओं तथा बौद्ध साहित्य में कौशांबी का वर्णन अनेक बार आया है। कालिदास, भास और क्षेमेन्द्र कौशांबी नरेश उदयन से संबंधित अनेक लोककथाओं की पूरी तरह से जानकारी थी।

ऐतिहासिक तथ्य[संपादित करें]

कौशांबी से एक कोस उत्तर-पश्चिम में एक छोटी पहाड़ी थी, जिसकी प्लक्ष नामक गुहा में बुद्ध कई बार आए थे। यहीं श्वभ्र नामक प्राकृतिक कुंड था। जैन ग्रंथों में भी कौशांबी का उल्लेख है। आवश्यक सूत्र की एक कथा में जैन भिक्षुणी चंदना का उल्लेख है, जो भिक्षुणी बनने से पूर्व कौशांबी के एक व्यापारी धनावह के हाथों बेच दी गई थी। इसी सूत्र में कौशांबी नरेश शतानीक का भी उल्लेख है। इनकी रानी मृगावती विदेह की राजकुमारी थी। मौर्य काल में पाटलिपुत्र का गौरव अधिक बढ़ जाने से कौशांबी समृद्धिविहीन हो गई। फिर भी अशोक ने यहाँ प्रस्तरस्तम्भ पर अपनी धर्मलिपियाँ—संवत 1 से 6 तक उत्कीर्ण करवायीं। इसी स्तंभ पर एक अन्य धर्मलिपि भी अंकित है, जिससे बौद्ध संघ के प्रति अनास्था दिखाने वाले भिक्षुओं के लिए दंड नियत किया गया है। इसी स्तंभ पर अशोक की रानी और तीवर की माता कारुवाकी का भी एक लेख है।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

शीतला देवी मंदिर[संपादित करें]

शीतला देवी मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मंदिर है। यह मंदिर इलाहाबाद के उत्तर-पश्चिम से लगभग 69 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस स्थान क‌‌ो कडा़ धाम के नाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त, यहां स्थित प्रमुख मंदिरों में हनुमान मंदिर, छत्रपाल मंदिर और कालेश्‍वर मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है। मां शीतला देवी मंदिर गंगा नदी के तट पर स्थित है। इस मंदिर को देवी के 51 शक्तिपीठों में से सबसे प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है। सभी धर्मो के लोग मंदिर में मां के दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर में स्थित शीतला देवी की मूर्ति स्थित है। इस मूर्ति में माता गर्दभ पर बैठी हुई है। ऐसा माना जाता है कि चैत्र माह में कृष्णपक्ष के अष्टमी पर यदि देवी शीतला की पूजा की जाए तो बुरी शक्तियों से पीछा छुटाया जा सकता है। यह मंदिर 1000 ई. में बनाया गया था। यह स्थान प्रसिद्ध संत मलूकदास की जन्मभूमि भी है। यहां पर संत मलूकदास का आश्रम और समाधि भी स्थित है। इसके अलावा, सिक्ख गुरू तेग बहादुर भी यहां आए थे।& yanhi ke paas sipah me bhageerathi ghat hai

प्रभाषगिरी:[संपादित करें]

प्रभाषगिरी एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यमुना नदी के तट पर स्थित यह जगह मंझनपुर तहसील से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण की मृत्यु इसी स्थान पर हुई थी। प्रभाषगिरि में दो पर्वत हैं जो कि यहां की समतल एवं उपजाऊ भूमि को देखते हुए बहुत ऊँचे हैं। वर्तमान समय में एक ऊंचे पर्वत पर बहुत बड़ा जैन मंदिर स्थित है तथा दूसरे पर्वत पर एक देवी का मन्दिर है। जैन मंदिर का निर्माण 1824 ई. में करवाया गया था। यहां पर एक नौ फीट लम्बी और सात फीट चौड़ी गुफा स्थित है। इस गुफा में दूसरी शताब्दी की ब्राह्मी लिपि में लिखी हुई मुद्रापत्र प्राप्त हुई थी। इसके अलावा, यह वही स्थान है जहां छठे जैनतीर्थंकर पदमप्रभु ने अपना अधिकांश जीवन व्यतीत किया था। वर्तमान समय में प्रभाषगिरि में प्रत्येक मकर संक्रान्ति को मेला लगता है और यहां आस-पास के जिलों के लोग आकर गृहस्थी के लिए प्रस्तर ( पत्थर ) के सामान खरीदते हैं तथा यहाँ रहने वाले जैन संन्यासियों एवं लोगों को यथेच्छानुसार दान करते हैं। कौशाम्बी के निवासियों के लिए पर्वतारोहण का यही सबसे अच्छा एवं नज़दीकी स्रोत माना जाता है।

दुर्गा देवी मंदिर:[संपादित करें]

मंझनपुर मुख्यालय में स्थित मंदिर में देवी दुर्गा और भगवान शिव की काले पत्थर की बनी मूर्ति स्थित है। ऐसा माना जाता है कि यह मूर्तियां बुद्ध के समय की है। नवरात्रों के अवसर पर काफी संख्या में भक्त देवी दुर्गा की उपासना के लिए आते हैं। यह पर लोगों का मानना है कि लोगो की काफी मंतने पूरी होती है और यह मंदिर क्षेत्र में काफी प्रचलित है

श्री राम मंदिर:[संपादित करें]

यह स्थान इलाहाबाद से लगभग तीस किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। श्री राम मंदिर काफी विशाल मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण लगभग बीस वर्ष पूर्व किया गया था। यह मंदिर बजहा नाम ग्राम में बना हुआ है। जो कि मुरतगंज के निकट स्थित है।

ठहरने के स्थान[संपादित करें]

कौशाम्‍बी में ठहरने के अच्‍छे होटलों का अभाव है। भरवारी ही छोटा सा शहर है जहां पर थोड़े बहुत होटल हैं। इसलिए यहां आने वाले पर्यटक इसके नजदीकी शहर इलाहाबाद में ठहरते हैं।

पहुंचने के साधन[संपादित करें]

वायु मार्ग

कौशांबी का सबसे निकटतम हवाई अड्डा इलाहाबाद विमानक्षेत्र है।

रेल मार्ग

कौशांबी रेल मार्ग द्वारा भारत के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। भरवारी और सिराथू ही मुख्य रेलवे स्टेशन है। भरवारी रेलवे स्टेशन बुद्ध सर्किट से कौशांबी को जोड़ता है।

सड़क मार्ग

यह जगह सड़कमार्ग द्वारा भारत के कई प्रमुख स्थानों से जुड़ी हुई है। सबसे निकट इलाहाबाद शहर है। कौशांबी जिला इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) जिले का ही भाग था।


बाहरी कड़ियां[संपादित करें]