कोलम

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तमिलनाडु में कोलम।

भारत के दक्षिण किनारे पर बसे केरल और तमिलनाडु राज्यों में रंगोली को कोलम कहते हैं। यह एक लोक कला है जो शुभअवसरों पर घर के फ़र्श को सजाने के लिए की जाती है। कोलम बनाने के लिए सूखे चावल के आटे को अँगूठे व तर्जनी के बीच रखकर एक निश्चित आकार में गिराया जाता है। इस प्रकार धरती पर सुंदर नमूना बन जाता है। कभी कभी इस सजावट में फूलों का प्रयोग किया जाता है। फूलों की रंगोली को पुकोलम कहते हैं। यह प्रायः यहाँ के सबसे महत्वपूर्ण पर्व ओणम के दौरान विशेष रूप से किया जाता है। पूरे सप्ताह चलने वाले ओणम के प्रत्येक दिन अलग अलग-तरह से रंगोली सजाई जाती है। पहले दिन छोटे आकारों में रंगोली सजाई जाती है। हर अगले दिन नए-नए कलाकार इस काम में अपना सहयोग देते हैं और रंगोली की आकृति विस्तृत होती चली जाती है।[1] रंगोली सजाने में प्रायः उन फूलों का सहारा लिया जाता है, जिनकी पत्तियाँ जल्दी नहीं मुर्झाती हैं। इस्तेमाल में होने वाले फूलों में गुलाब, चमेली, गेंदा, आदि प्रमुख हैं। बड़े फूलों को छोटे-छोटे भागों में तोड़ कर रंगोली सजाई जाती है, परंतु रंगोली के किनारों को सजाने में पूरे फूल का प्रयोग किया जाता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "दक्षिण भारत में रंगोली की परंपरा" (एचटीएम). वेब दुनिया. अभिगमन तिथि १७ मार्च 2008. |access-date= में तिथि प्राचल का मान जाँचें (मदद)

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]