कोलकाता ट्राम
| कोलकाता ट्राम प्रणाली | |
|---|---|
एस्प्लेनेड टर्मिनस पर विश्राम करती एक आधुनिक ट्राम (२०१०, ऊपर) तथा बी.बी.डी. बैग टर्मिनस में प्रवेश करती एक पुरातन ट्राम (२००९, नीचे)। | |
| अवलोकन | |
| स्वामित्व | पश्चिम बंगाल सरकार |
| सेवाकृत क्षेत्र | कोलकाता शहर |
| स्थान | |
| पारगमन प्रकार | ट्राम |
| लाइनो की संख्या | २ |
| लाइन संख्या | कुल मार्ग - ५०, संचालित मार्ग - २ (अप्रैल २०२५ तक) |
| दैनिक सवारियां | १५,००० प्रतिदिन[1] |
| वार्षिक सवारियां | ५.४ लाख (अनुमानित) |
| जालस्थल | कलकत्ता ट्रामवेज़ |
| संचालन | |
| संचालन प्रारंभ | 1873[2] |
| संचालक | पश्चिम बंगाल परिवहन निगम (WBTC) |
| विशेषता(एँ) | ट्राम |
| वाहन संख्या | कुल बेड़ा - २५७, परिचालित - २५ (घूर्णी आधार पर), परित्यक्त - २३२.[3] |
| तकनीकी | |
| प्रणाली लंबाई | १४ किमी (पूर्व - ६१ किमी) |
| रेल गेज | मानक गेज 1,435 मि.मी. (4 फीट 8½ इंच)[2] |
| विद्युतीकरण | ५५० वी डीसी ओवरहेड लाइन, ट्रॉलीपोल |
कोलकाता ट्राम प्रणाली, भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में संचालित होने वाली एक ट्राम सेवा है, जिसका परिचालन पश्चिम बंगाल परिवहन निगम (WBTC) द्वारा किया जाता है। यह कलकत्ता ट्रामवेज़ कंपनी (CTC) के WBTC में विलय के बाद अस्तित्व में आई। १८७३ में शुरू हुई कोलकाता ट्राम, जो इटली के ट्यूरिन (१८७१) के बाद विश्व की दूसरी सबसे पुरानी संचालित ट्राम व्यवस्था है।[4] १९०२ में विद्युतीकृत होने के बाद, कलकत्ता विद्युत ट्रामवे वाला एशिया का पहला शहर बना। कोलकाता ट्राम वर्तमान में भारत की एकमात्र संचालित ट्राम प्रणाली है।[5]
व्यवस्थित उपेक्षा के चलते, पश्चिम बंगाल सरकार (वर्तमान परिचालक) ने शहर से पूरी ट्राम व्यवस्था को बंद करने और संपत्तियाँ बेचने की योजनाबद्ध पहल की। हालाँकि, २०१६ में कोलकाता ट्राम प्रणाली के पक्ष में वकालत करने हेतु 'कलकत्ता ट्राम यूज़र्स एसोसिएशन' (CTUA) नामक एक गैर-राजनीतिक संगठन बनाया गया।[6][7] इस नेटवर्क में १९६० के दशक में ३७ मार्ग हुआ करते थे, किंतु वित्तीय संकट, खराब रखरखाव, यात्री संख्या में कमी, सड़क फ्लाईओवरों के निर्माण, कोलकाता मेट्रो के विस्तार, ट्राम की धीमी गति, और यह धारणा कि ट्राम पुरानी हो चुकी हैं व अधिक सड़क स्थान घेरती हैं, के कारण यह धीरे-धीरे सिमटकर वर्तमान में केवल एक मार्ग (मार्ग संख्या २५: ग़रियाहाट — एस्प्लेनेड) पर संचालित होती है।
संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ Das, Soumya (12 May 2018). "Kolkata's famed trams slowly drive into history". The Hindu. अभिगमन तिथि: 19 December 2019.
- 1 2 "History – CTC" (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2020-06-07.
- ↑ "Bankrupt CTC to introduce two more AC trams". The Times of India. 14 August 2013. 16 August 2013 को मूल से पुरालेखित.
- ↑ "Kolkata trams to get a GenX makeover". The Times of India. 13 July 2012. 27 September 2013 को मूल से पुरालेखित.
- ↑ Ghosh, Bishwanath (July 25, 2024). "Give Kolkata back its tram, reiterate enthusiasts as they step up pressure on government". The Hindu – via www.thehindu.com.
- ↑ Ghosh, Bishwanath (July 25, 2024). "Give Kolkata back its tram, reiterate enthusiasts as they step up pressure on government". The Hindu – via www.thehindu.com.
- ↑ Singh, Shiv Sahay (23 July 2020). "Kolkata's historic trams trundle once more". The Hindu. अभिगमन तिथि: 26 August 2020.