कैलाश मन्दिर, एलोरा
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| कैलास मन्दिर | |
|---|---|
एलोरा का कैलास मंदिर शैल (चट्टान) को काटकर बनाया गया था। | |
| धर्म संबंधी जानकारी | |
| सम्बद्धता | हिन्दू धर्म |
| देवता | शिव |
| अवस्थिति जानकारी | |
| अवस्थिति | एलोरा गुफाएँ |
| ज़िला | छत्रपति सम्भाजी नगर |
| राज्य | महाराष्ट्र |
| देश | भारत |
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| भौगोलिक निर्देशांक | 20°01′26″N 75°10′45″E / 20.02389°N 75.17917°E |
| वास्तु विवरण | |
| निर्माता | कृष्ण प्रथम (756–773 CE), राष्ट्रकूट शासक |
| निर्माण पूर्ण | ८वीं शताब्दी |
| ऊँचाई (अधि.) | 32.6 मीटर (107 फुट) |
कैलास मंदिर महाराष्ट्र के छत्रपती संभाजीनगर जिले के एलोरा में स्थित मन्दिरों की शृंखला में से सबसे बड़ा मन्दिर है। यह मन्दिर शैल (चट्टानों) को काटकर बनाया गया है । संसार में अपने ढंग का अनूठा वास्तु है जिसे मालखेड स्थित राष्ट्रकूट वंश के नरेश कृष्ण (प्रथम) (757-783 ई0) में निर्मित कराया था।

अन्य मन्दिरों की तरह भीतर से कोरा है, बाहर से मूर्ति की तरह समूचे पर्वत को तराश कर इसे द्रविड़ शैली के मंदिर का रूप दिया गया है। अपनी समग्रता में २७६ फीट लम्बा , १५४ फीट चौड़ा यह मंदिर केवल एक चट्टान को काटकर बनाया गया है। इसका निर्माण ऊपर से नीचे की ओर किया गया है। इसके निर्माण के क्रम में अनुमानत: ४० हज़ार टन भार के पत्थारों को चट्टान से हटाया गया। इसके निर्माण के लिये पहले खंड अलग किया गया और फिर इस पर्वत खंड को भीतर बाहर से काट-काट कर 90 फुट ऊँचा मंदिर गढ़ा गया है। मंदिर के भीतर और बाहर चारों ओर मूर्ति-अलंकरणों से भरा हुआ है। इस मंदिर के आँगन के तीन ओर कोठरियों की पाँत थी जो एक सेतु द्वारा मंदिर के ऊपरी खंड से संयुक्त थी। अब यह सेतु गिर गया है। सामने खुले मंडप में नन्दी है और उसके दोनों ओर विशालकाय हाथी तथा स्तंभ बने हैं। यह कृति भारतीय वास्तु-शिल्पियों के कौशल का अद्भुत नमूना है।
छवि-दीर्घा
[संपादित करें]- नटराज शिव