कैपिटल इन द ट्वेंटी-फर्स्ट सेंचुरी
हार्डकवर संस्करण | |
| लेखक | थॉमस पिकेटी |
|---|---|
| अनुवादक | आर्थर गोल्डहैमर |
| भाषा | फ्रेंच |
| विषय | राजनीतिक अर्थव्यवस्था |
| प्रकाशक |
|
| प्रकाशन तिथि | अगस्त 2013 |
| अंग्रेज़ी प्रकाशन | अप्रैल 15, 2014 |
| मीडिया प्रकार | प्रिंट हार्डकवर |
| पृष्ठ | 696 |
| आई.एस.बी.एन | 978-0674430006 |
कैपिटल इन द ट्वेंटी-फर्स्ट सेंचुरी (फ़्रांसीसी: Le Capital au XXIe siècle; उच्चारण: ल कैपिताल ओ वाँत-ए-यँ सियेक्ल; अनुवाद: इक्कीसवीं सदी में पूँजी) फ्रांसीसी अर्थशास्त्री थॉमस पिकेटी द्वारा लिखित पुस्तक है। यह पुस्तक विश्व में तेजी से बढ़ती आर्थिक असमानता (अमीर और गरीब के बीच की खाई) के कारणों और उसके इतिहास को बताती है।
इसमें 18वीं सदी से लेकर अब तक यूरोप और अमेरिका में धन और आय के बीच बढ़ती असमानता को रेखांकित किया गया है। इसका पहली बार प्रकाशन अगस्त 2013 में फ़्रांसीसी भाषा में ल कैपिताल ओ वाँत-ए-यँ सियेक्ल नाम हुआ था। बाद में आर्थर गोल्डहैमर ने इसका अंग्रेजी में अनुवाद किया, जिसका प्रकाशन अप्रैल 2014 में हुआ।[1]
लेखक के बारे में
[संपादित करें]थॉमस पिकेटी फ्रांसीसी अर्थशास्त्री हैं। उन्होंने आर्थिक असमानता, आय, संपत्ति और कर नीति के क्षेत्र में काम किया है। थॉमस पिकेटी का जन्म 7 मई, 1971 को पेरिस के उपनगर क्लिची में हुआ था। थॉमस पिकेटी फ्रांस में स्थित उच्च शिक्षा संस्थान स्कूल ऑफ एडवांस स्टडीज इन सोशल साइंस में निदेशक रहे है और पेरिस स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में प्रोफेसर हैं। पिकेटी ने 1993 से 1995 तक मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के अर्थशास्त्र विभाग में सहायक प्रोफेसर रहे हैं। [2] वे कुशल राजनीतिज्ञ भी थे।
प्रकाशन और शुरुआती प्रतिक्रिया
[संपादित करें]यह पुस्तक मूल रुप से फ्रांसीसी भाषा में अगस्त 2013 में प्रकाशित हुई थी। आर्थर गोल्डहैमर द्वारा किया गया इसका अंग्रेज़ी अनुवाद अप्रैल 2014 में प्रकाशित हुआ था।
मैनहट्टन के कुछ इलाकों में इस पुस्तक को साथ लेकर चलना युवा प्रगतिशील लोगों के बीच पहचान और मेल-जोल का एक नया तरीका बन गया था। दूसरी ओर दक्षिणपंथी टिप्पणीकार थॉमस पिकेटी को नव-मार्क्सवादी कहकर उनकी आलोचना कर रहे हैं।[3]
आलोचना
[संपादित करें]थॉमस पिकेटी की पुस्तक 'कैपिटल इन द ट्वेंटी-फर्स्ट सेंचुरी' की अर्थशास्त्रियों ने आलोचना की। जैसे- आर्थिक विकास की अनदेखी आलोचकों का मानना है कि पिकेटी का नियम r > g (पूंजी पर रिटर्न > आर्थिक विकास) हमेशा लागू नहीं होता। आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था में नवाचार, तकनीक और मानव पूंजी (कौशल) भी धन सृजन के बड़े कारक हैं, जिन्हें इसमें कम आँका गया है।[4]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Gura, David. "Meet Thomas Piketty's translator". www.marketplace.org (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 1 सितम्बर 2026.
- ↑ "Capital in the Twenty-First Century" [कैपिटल इन द ट्वेंटी-फर्स्ट सेंचुरी]. www.goodreads.com (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 1 सितम्बर 2026.
- ↑ Mason, Paul (28 अप्रैल 2014). "Thomas Piketty's Capital: everything you need to know about the surprise bestseller". The Guardian. अभिगमन तिथि: 1 सितम्बर 2026.
- ↑ "A Discussion of Thomas Piketty's Capital in the Twenty‑First Century: By How Much Is r Greater than g?". Liberty Street Economics. 13 जुलाई 2015. अभिगमन तिथि: 1 सितम्बर 2026.